युवा कवि सलिल सरोज की पांच प्रमुख कविताएं

आधा प्रेम मेरे खेत की मुँडेर पर वो उदास शाम आज भी उसी तरह बेसुध बैठी है जिसकी साँसें सर्दी

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ये दौरे-इम्तहान है, बस खुदा का नाम लो…ऐसे वक्‍त में काजी…

ये दौरे-इम्तहान है, बस खुदा का नाम लो ऐसे वक्त में तो काज़ी,नज़ाकत से काम लो क्या सोचा तुम्हारे कर्मों

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सलिल सरोज की कविता: मेरे गाँव की यही निशानी रही

कविता: मेरे गाँव की यही निशानी रही राहों पे बाट जोहती जवानी रही मेरे गाँव  की  यही निशानी रही जो कदम

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