जरदारी की बेटी आसिफा ने कहा, इमरान खान ने पाकिस्‍तान को मजाक बनाकर रख दिया

जम्‍मू-कश्‍मीर पर शोर मचा रहे पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को उनके ही लोग बुरा-भला कहने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इसकी वजह कुछ ये भी है कि उनका यूं शोर मचाना पूरी दुनिया को न तो रास आ रहा है और न ही यह मुहिम किसी भी स्‍तर पर सफल हुई है। इसके चलते भी पाकिस्‍तान के राजनेता ही नहीं, बल्कि आम आदमी भी उनसे खासा नाराज हैं। यहां पर इमरान की वो मुहिम भी विफल हो गई है जिसके तहत वह देश के मुश्किल हालातों पर जम्‍मू कश्‍मीर के मुद्दे को उठाकर इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे थे।
बहरहाल, हम आपको बता दें कि इस बार इमरान खान को जिसने कठघरे में खड़ा किया है वह पूर्व राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी की बेटी हैं, जिनका नाम है- आसीफा। बीबीसी उर्दू को दिए इंटरव्‍यू में उन्‍होंने पाकिस्‍तान की खराब होती हालत के लिए इमरान खान को कठघरे में खड़ा किया है। इमरान खान सरकार के एक साल पूरा होने के बाद आसिफा का यह पहला इंटरव्‍यू है।
मुशर्रफ और इमरान सरकार में कोई फर्क नहीं
उनका कहना है कि इमरान खान और पूर्व तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार में कोई फर्क नहीं है। दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में देश का बुरा ही हुआ है। इन दोनों के ही राज में लोगों की जबरदस्‍त महंगाई से कमर टूटी है। आसिफा का कहना है कि इमरान खान के हाथ में इस एक साल में सफलता से ज्‍यादा निराशा हाथ लगी है। वह हर मोर्चे पर विफल रहे हैं। इतना ही नहीं, उनके इस एक साल के दौरान लोगों के खुलकर विचार व्‍यक्‍त करने पर भी पाबंदी लगा दी गई। ऐसा कर इमरान खान ने बोलने की आजादी के हक को भी लोगों से छीन लिया है।
चरमराई पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था
आसिफा के मुताबिक पीएम बनने से पहले इमरान खान ने कई चुनावी वायदे किए थे, जिन्‍हें वह पूरा करने में पूरी तरफ से विफल रहे। उन्‍होंने देश की जनता से वादा किया था कि सरकार बनने के बाद वह दस लाख लोगों को रोजगार उपलब्‍ध करवाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दस लाख तो दूर किसी एक इंसान को भी वह रोजगार नहीं दिला सके। उनके इस पहले एक साल के दौरान देश की अर्थव्‍यवस्‍था बुरी तरह से चरमरा गई है।
चुनावी वायदों पर झूठे इमरान
इमरान के चुनावी वायदों में बेघरों को पचास लाख घर उपलब्‍ध कराना था, लेकिन वह किसी को भी घर नहीं दे सके। इसके उलट उन्‍होंने लाखों लोगों के घरों को उजाड़ने का काम किया है। आसिफ ने इमरान खान पर तंज भी कसा। उन्‍होंने कहा कि इमरान खान पीएम बनने से पहले चिल्‍ला-चिल्‍ला कर कहते थे कि यदि उन्‍हें किसी देश के आगे भीख मांगनी पड़ी तो वह आत्‍महत्‍या कर लेंगे लेकिन पीएम बनने के बाद देश की खराब होती अर्थव्‍यवस्‍था के लिए वह कई देशों में गए और वहां से अपने लिए भीख मांगने में जरा नहीं हिचकिचाए। ऐसा कर उन्‍होंने पूरी दुनिया में पाकिस्‍तान का मजाक बनाकर रख दिया।
महंगाई के सवाल पर क्‍या बोली आसिफा
महंगाई पर बात करते हुए आसिफा ने कहा कि यदि आम आदमी से बात की जाए तो वह बताएगा कि महंगाई पिछले एक दशक में सबसे ऊंचे स्‍तर पर आ गई है। बेरोजगारी इस वक्‍त चरम पर है। बिजली की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेड की कीमतों में भी जबरदस्‍त इजाफा हुआ है। गैस की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसका असर हर वर्ग के लोगों पर पड़ा है। आलम ये है कि आज पाकिस्‍तान में जीना ही नहीं मरना भी महंगा हो गया है। वहीं इमरान खान हैं जो लगातार अपने ही बयानों पर यू-टर्न लिए जा रहे हैं। आसिफा का कहना है कि पाकिस्‍तान पहले इतना कमजोर मुल्‍क कभी नहीं था जितना इमरान खान की सरकार के आने के बाद हो गया है। वहीं, यदि इमरान खान और जरदारी की सरकार में तुलना की जाए तो पता चल जाएगा कि जरदारी सरकार में पाकिस्‍तान की कितनी बेहतर स्थिति थी।
इमरान ने पाकिस्‍तान को किया बर्बाद
पीपीपी की सरकार के दौरान ऐसा नहीं था कि वह मुश्किल हालात से नहीं गुजरे थे। उस वक्‍त पूरी दुनिया में मंदी का दौर था और उस दौरान पाकिस्‍तान को दो बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा था। पीपीपी सरकार ने साठ लाख लोगों को रोजगार दिलाया। देश के बाहर रह रहे पाकिस्‍तान के लोगों ने भी दिल खोल कर सरकार की मुश्किल हालातों में मदद की। लेकिन, आज कोई हमारी तरफ देखता तक नहीं है। इमरान खान की सरकार के दौरान हमारा सबसे करीबी दोस्‍त चीन भी हमसे अलग खड़ा है जबकि पीपीपी सरकार ने चीन की सरकार से बेहतर संबंध स्‍थापित किए थे। सीपैक दोनों देशों की दोस्‍ती का ही नतीजा है। इसकी वजह से पाकिस्‍तान में लाखों को रोजगार मिला और क्षेत्र का विकास भी हुआ। इमरान खान की सरकार ने उन चीजों को भी तबाह कर दिया जो पूर्व की सरकार से उन्‍हें मिली थीं। राजनीति में एंट्री के सवाल पर आसिफा ने कहा कि उनके परिवार ने देश के लिए बहुत कुर्बानी दी है। हालांकि इस सवाल के जवाब में उन्‍होंने सीधेतौर पर यह नहीं बताया कि वह राजनीति में आएंगी या नहीं।
-एजेंसियां

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