Zapad 2021: रूस के नोवगोरोड इलाके में भारत समेत 17 देशों की सेनाएं कर रही हैं बम वर्षा

रूस के नोवगोरोड इलाके में भारत समेत 17 देशों की सेनाएं बमों की बारिश कर रही हैं। हर तरफ बस बारूद ही बारूद नजर आ रहा है। हालत यह है कि धरती कांप जा रही और दुश्‍मन के कलेजे पर दहशत साफ देखी जा रही है।
दरअसल, रूस में इन दिनों Zapad 2021 युद्धाभ्‍यास चल रहा है जिसमें इन 17 देशों की सेनाएं अपने दमखम का प्रदर्शन कर रही हैं। एक तरफ रूसी सेना अपने अत्‍याधुनिक हथियारों से दुनिया के सामने ताकत का प्रदर्शन कर रही है, वहीं भारतीय सेना के नगा रेजिमेंट के जवान दुश्‍मन को धूल चटाने के लिए एक से बढ़कर करतब का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस जपड़ अभ्‍यास की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन इसे देखने पहुंचे हैं। भारतीय सैनिकों के दमदार प्रदर्शन के बीच चीन और पाकिस्‍तान के कलेजे पर सांप लोट रहा है और वे केवल देखकर ही संतोष कर रहे हैं।
भारतीय सेना बरसा रही बम, देखने को मजबूर चीन-पाक
गत 3 सितंबर से 16 सितंबर चलने वाले जपड़ 2021 युद्धाभ्‍यास में भारत, बेलारूस, आर्मीनिया, कजाकिस्‍तान समेत यूरोशिया और दक्षिण एशिया के 17 देशों के सैनिक अपने युद्ध कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा लेने के लिए भारतीय सेना ने अपनी नगा रेजिमेंट के 200 जवानों को रूस भेजा है। इसके अलावा मैकेनाइज्‍ड इन्‍फैंट्री और भारतीय वायुसेना के कमांडो भी जपड़ में हिस्‍सा ले रहे हैं। भारतीय सैनिक जहां रूस और अन्‍य देशों की सेनाओं के साथ मिलकर बारूद बरसा रहे हैं, वहीं चीन और पाकिस्‍तान की सेना के अधिकारी बस टकटकी लगाए देखने को मजबूर हैं। रूस ने चीन, श्रीलंका, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश, मलेशिया, वियतनाम आदि देशों को पर्यवेक्षक देश का दर्जा दिया है। सोमवार को इस अभ्‍यास को देखने के लिए खुद रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि भारतीय जवानों ने विमान से जमीन पर कूदने, विशेष हेलिकॉप्‍टर अभियान और रक्षात्‍मक कार्रवाई में हिस्‍सा ल‍िया।
​आतंकियों का खात्‍मा है ‘मकसद’, निशाने पर अमेरिका!
रूस ने कहा है कि इस जपड़ 2021 अभ्‍यास का मकसद आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का अभ्‍यास करना है लेकिन विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि रूस जपड़ युद्धाभ्‍यास के जरिए दुनिया को अपनी ताकत दिखा रहा है। रूस के निशाने पर अमेरिका है जो उसका सबसे बड़ा शत्रु है। 16 सितंबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में 200,000 सैन्यकर्मी शामिल हो रहे हैं। उधर, बेलारूस की सेना भी इस युद्धाभ्‍यास में बढ़-चढ़कर हिस्‍सा ले रही है। इससे नाटो देशों के भी कान खड़े हो गए हैं। बेलारूस के साथ भी कई यूरोपीय देशों का विवाद है। इतना ही नहीं, बेलारूस के कुख्‍यात राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको पर मानवाधिकार के हनन का भी आरोप लग चुका है। जपड़ 2021 अभ्‍यास के दौरान एलेक्जेंडर लुकाशेंको भी देखे गए हैं। यूक्रेन और नाटो देशों पोलैंड तथा लिथुआनिया ने कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर सीमा के पास अभ्‍यास बहुत ही उकसाऊ है।
रूस-बेलारूस के बमों की बारिश से पड़ोसी देशों में दहशत
जपड़-2021 युद्धाभ्यास को लेकर सबसे ज्यादा डर बेलारूस के पड़ोसी देशों को है। रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) से घबराए ये देश अपनी-अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। वहीं, बेलारूस से लुकाशेंको के अत्याचारों से परेशान जनता तेजी से पड़ोसी देशों में प्रवेश कर रही है। इस कारण प्रवासियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लिथुआनिया, पोलैंड और लातविया ने सीमावर्ती क्षेत्रों में आपातकाल तक का ऐलान किया हुआ है। इस बीच यूक्रेन के राष्‍ट्रपति ने चेतावनी दी है कि पड़ोसी देश रूस के साथ युद्ध छिड़ सकता है। रूस ने अपने एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम का यूक्रेन की सीमा के पास क्रीमिया में परीक्षण भी किया है। रूस और बेलारूस औपचारिक रूप से एक ‘संघ राज्य’ का हिस्सा हैं। इसके अंतर्गत बेलारूस के सुरक्षा की जिम्मेदारी रूस के ऊपर है। दोनों देश अपने आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए लुकाशेंकों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की थी।
-एजेंसियां

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