युवा पत्रकार की एम्स में मौत, DJA ने की न्यायिक जांच की मांग

नई दिल्ली। युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत के मामले में दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से न्यायिक जांच की मांग की है। पत्रकारों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर एक शांति मार्च निकाला पत्रकारों की मांग है कि इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए जाए। प्रशासन की ओर से सीसीटीवी फुटेज लेकर उसकी जांच की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि क्या तरुण सिसोदिया के ऊपर किसी तरह का कोई मानसिक दवाब तो नहीं था ?

दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार के पी मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर जांच की मांग करते हुए लिखा कि युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के लिए जांच की मांग के संदर्भ में देश के ख्याति प्राप्त अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की असामयिक मृत्यु पर ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता है कि तरुण सिसोदिया का कोविड-19 ग्रस्त होने के कारण इस अस्पताल में में इलाज चल रहा था। जानकारी के अनुसार अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक 6 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई।

उनके नियोक्ता अनुसार उनके इलाज में घोर लापरवाही एवं प्रताड़ित किए जाने की बातें भी सामने आई हैं। उन्होंने लिखे पत्र में कहा है कि प्रथम दृष्टया, यह अस्पताल के स्तर पर लापरवाही और उत्पीड़न की संभावना ही उनके असामयिक निधन में सहायक कारक के रूप में दर्शाता है। अतः आपसे अनुरोध है कि एक उचित प्राधिकारी द्वारा इन सभी पहलुओं की व्यापक जांच की जानी चाहिए, यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को दोबारा दोहराया न जाए।

गौरतलब है कि ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ केंद्र सरकार से लगातार वैश्विक महामारी कोरोना काल के लॉक डाउन की इन विकट परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बगैर काम कर रहे मीडिया कर्मियों को कोरोना योद्धा घोषित करने और 50 लाख रुपये का बीमा देने की लगातार मांग उठा रहा है। हमारी उसी मांग के तहत तरुण सिसोदिया को तत्काल 50 लाख की रकम देने और इस दुखद घटना की स्थिति में सरकार या भास्कर समूह तरुण के किसी निकट संबंधी को रोजगार देने के लिए निर्देशित करें।

बहरहाल दिल्ली पत्रकार संघ के साथ ही अन्य पत्रकार संगठनों भी इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक चिट्ठी लिखी है जिसमें मांग की गई है कि मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए जाएं। हालांक‍ि तरुण की बातचीत के अंश व्हाट्सऐप पर वायरल होने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उच्चस्तरीय कमेटी गठ‍ित कर जांच के आदेश दे दि‍ए हैं।

पत्रकारों का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं है बल्कि जिस तरह से सोशल मीडिया पर तमाम उनके कुछ साथियों के मैसेज सामने आ रहे हैं। उनको भी जांच के दायरे में लाना चाहिए जिससे कि यह पता लगाएं कि वास्तविक रूप से उनकी मौत के पीछे का राज सामने आ सके है। पत्रकारों का यह भी कहना है कि तरुण सिसोदिया एक सुलझे हुए और संयमित पत्रकार थे ऐसे में उनका इस तरह का आत्मघाती कदम उठाना आश्चर्यचकित करता है।

र‍िपोर्ट: अशोक कुमार “निर्भय”

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