जीडीपी पर मोदी सरकार को मिला विश्व बैंक का साथ, अर्थव्यवस्था में सुस्ती अस्थाई बताई

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट से विपक्ष और अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के निशाने पर आई मोदी सरकार को विश्व बैंक का साथ मिला है.
बैंक का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्दी ही मंदी से उबरने में सफल होगी. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक से पहले विश्व बैंक प्रमुख जिम योंग किम ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती अस्थाई है और यह जल्दी ही रफ्तार पकड़ेगी.
किम ने वाशिंगटन में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती अस्थाई है और यह जल्दी ही पटरी पर लौट आएगी. जीएसटी का असर जल्दी दूर होगा और इसके सकारात्मक असर दिखेगा. बैठक में शामिल होने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई में एक दल अगले सप्ताह यहां आयेगा.
उल्लेखनीय है कि पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई. विपक्ष दलों और अनेक अर्थशास्त्रियों ने इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी को जिम्मेदार बताया है. अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 5.7 प्रतिशत रही जो जनवरी-मार्च तिमाही में 6.1 प्रतिशत थी.
सवाल को जवाब में विश्व बैंक के अध्यक्ष ने जोर दिया कि नरमी अस्थायी है. किम ने कहा, हमारा मानना है कि हालिया नरमी अस्थायी है जो आने वाले महीने में सुधर जाएगी और जीडीपी वृद्धि साल के दौरान स्थिर होगी. हमारी करीबी निगाह है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारोबारी माहौल सुधारने के लिए वास्तव में काम किया है. हमारा मानना है कि इन सभी प्रयासों का अच्छा परिणाम आएगा.
भारत और मानव पूंजी संबंधी एक सवाल पर किम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सफाई से जुड़े मुद्दों पर गहरी प्रतिबद्धता जताई है और स्वच्छ भारत कहीं भी सबसे प्रभावी कार्यक्रमों में से एक है. उन्होंने कहा, मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी खुद समूचे भारत के लिए अवसर सुधारने को बहुत प्रतिबद्ध हैं लेकिन भारत के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं और बाकी देशों की तरह वहां भी सुधार की व्यापक गुंजाइश है.
-एजेंसी