संस्कृति यूनिवर्सिटी में इम्पॉर्टेंस ऑफ Cyber Security पर हुई कार्यशाला

मथुरा। कम्प्यूटर और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही साइबर क्राइम में लगातार इजाफा हो रहा है, इससे बचने का मूलमंत्र है Cyber Security के प्रति जागरूकता। जैसे हम असली दुनिया में खुद की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं, ठीक उसी तरह काल्पनिक दुनिया में भी खुद को सुरक्षित रखने के लिए सावधानी जरूरी है। कई बार लोग अनजाने में साइबर क्राइम कर बैठते हैं या इसका शिकार हो जाते हैं। अगर हम इसके प्रति जागरूक रहेंगे तो इससे हमें और समाज को कोई नुकसान नहीं हो सकता। यह विचार मंगलवार को संस्कृति यूनिवर्सिटी में इम्पॉर्टेंस ऑफ Cyber Security पर आयोजित कार्यशाला में डायरेक्टर ऑफ एकेडमिक एलाइंसेज (इंटरनेशनल) ई.सी. काउंसिल यूनिवर्सिटी एबेल डैनियल ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

कार्यशाला में श्री डैनियल ने छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध क्या है, इन अपराधों से कैसे बचा जाए और वर्चुअल दुनिया (काल्पनिक दुनिया) में कैसे सुरक्षित रहें इसकी विस्तार से जानकारी दी। श्री डैनियल ने कहा कि Cyber Security इसलिए जरूरी है क्योंकि सरकार, कॉर्पोरेट, फाइनेंशियल और मेडिकल आदि संस्थाएं अपने कम्प्यूटर सिस्टम में महत्वपूर्ण जानकारियां तथा डाटा संचित रखती हैं। यह डाटा काफी महत्वपूर्ण होता है जिसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। श्री डैनियल ने स्टूडेंट्स को बताया कि Cyber Security की मदद से हम साइबर हमले, डाटा आदि की चोरी से बच सकते हैं।

श्री डैनियल ने स्टूडेंट्स को हैकिंग और एथिकल हैकिंग पर भी विस्तार से जानकारी दी। श्री डैनियल ने  बताया कि एथिकल हैकर का कार्य सिक्योरिटी प्रोटोकॉल में एंट्री के लिए हैकिंग टूल्स, नेटवर्क, एप्लीकेशंस और वेबसाइट की सिक्योरिटी को जांचना और सिक्योरिटी उपायों को लागू करना होता है जबकि सामान्य हैकर्स सिक्योरिटी लूपहोल्स का पता लगाकर गोपनीय जानकारी चुरा लेते हैं, महत्वपूर्ण डाटा के साथ छेड़खानी करते हैं और वायरस फैलाते हैं। एथिकल हैकर्स नेटवर्क में प्रवेश कर सिक्योरिटी सिस्टम की कमजोरियों को पहचानते हुए उन्हें भविष्य के खतरों से दूर कर देते हैं। श्री डैनियल ने छात्र-छात्राओं को बताया कि मौजूदा समय में साइबर के क्षेत्र में करियर की अपार सम्भावनाएं हैं, जिसमें निरंतर इजाफा हो रहा है।

कार्यक्रम के अंत में कुलपति डा. राणा सिंह ने एबेल डैनियल का आभार मानते हुए उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रो. प्रिया शर्मा ने किया।

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