घर जाने के इच्‍छुक मजदूरों को 15 दिन के भीतर वापस भेज दिया जाएगा

नई दिल्‍ली। अपने घर जाने के इच्‍छुक प्रवासी मजदूरों को 15 दिन के भीतर वापस भेज दिया जाएगा। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्‍य सरकारों के लिए इस बारे में निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि सभी प्रवासियों को आज से 15 दिनों के भीतर वापस भेज दिया जाएगा। प्रवासी श्रमिकों को पंजीकरण के माध्यम से पहचाना जाएगा। SC ने कहा कि खंडपीठ पहचान, पंजीकरण और अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश दे रही है। उसने केंद्र और राज्‍य सरकारों से प्रवासियों को रोजगार देने के लिए योजनाएं प्रस्‍तुत करने को भी कहा है।
लिस्‍ट बनाकर करें रोजगार का इंतजाम
अदालत ने कहा कि राज्‍यों की तरफ से श्रमिक ट्रेनों की डिमांड आने के बाद, केंद्र सरकार को 24 घंटे के भीतर अतिरिक्‍त ट्रेनें देनी चाहिए। SC ने केंद्र और राज्‍य सरकारों से प्रवासी मजदूरों की पहचान के लिए स्‍ट्रीमलाइन्‍ड तरीके से एक लिस्‍ट तैयार करने को कहा है। उन्‍हें मिलने वाली रोजगार सहायता मैप होनी चाहिए और स्किल-मैपिंग भी की जाए। अदालत ने बड़ी राहत देते हुए कहा कि डिजास्‍टर मैनेजमेंट एक्‍ट (DMA) 2005 के तहत प्रवासियों के खिलाफ दर्ज लॉकडाउन के कथित उल्‍लंघन के मामले वापस लिए जाएंगे।
5 जून को सरकारों ने गिनाए थे इंतजाम
इससे पहले 5 जून को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि तब तक प्रवासी श्रमिकों के लिए 4,000 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं। उसी दिन दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी भी लगभग दो लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश वापस जाने के इच्छुक नहीं हैं।
जैन ने कहा कि 10,000 से भी कम मजदूरों ने वापस जाने की इच्छा जताई है। उत्तर प्रदेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. एस. नरसिम्हा ने कहा था कि लगभग 1.35 लाख लोगों को वापस भेजने के लिए 104 विशेष ट्रेनों को संचालित किया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाओं से 5,50,000 मजदूरों को उत्तर प्रदेश वापस भेजा गया और विशेष ट्रेनों के माध्यम से 21.69 लाख श्रमिकों को वापस भेजा गया है।
सिर्फ 20.26 लाख प्रवासी श्रमिकों को मिला मुफ्त राशन
राज्य सरकारें अभी तक सिर्फ 20.36 लाख प्रवासी श्रमिकों को ही मुफ्त खाद्यान्न की आपूर्ति कर पाईं हैं जबकि केंद्र सरकार या राज्य सरकारों ने राशन कार्ड नहीं रखने वाले आठ करोड़ प्रवासी श्रमिकों को मुफ्त अनाज पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के द्वारा रविवार को जारी आंकड़ों में इसका पता चला। केंद्र ने 14 मई को मुफ्त अनाज योजना की घोषणा की थी। इसके तहत बिना राशन कार्ड वाले प्रवासी मजदूरों को भी प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न और प्रति परिवार एक किलोग्राम चना मुहैया कराने की घोषणा की गई थी।
-एजेंसियां

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