यकीन नहीं होगा…एक रुपए में इलाज करते हैं कुछ डॉक्‍टर

देश में बीमारी से कम इलाज के बाद आने वाले बिल से लोग कहीं अधिक डरे रहते हैं। दिनों दिन इलाज का खर्च काफी बढ़ता ही जा रहा है। वहीं देश में कुछ ऐसे भी डॉक्टर हैं जो एक रुपये में भी लोगों का इलाज कर रहे हैं।
अलग-अलग राज्यों में ऐसे कई डॉक्टर हैं जो एक रुपये, 5 रुपये में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। महाराष्ट्र, ओडिशा बंगाल और देश के दूसरे राज्यों में कुछ ऐसे डॉक्टर हैं जिनका अपने पेशे में बड़ा नाम है लेकिन वो सिर्फ एक रुपये में लोगों का इलाज कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में मरीजों के लिए एक रुपये वाली क्लीनिक
डॉक्टर विशाल वानी मुंबई रेलवे स्टेशन के पास ही एक रुपये वाली क्लीनिक में यह अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के वक्त जब कोरोना की रफ्तार बहुत तेज थी उस वक्त डॉक्टर विशाल वानी के पास इमरजेंसी कॉल आई। स्टेशन मैनेजर ने कॉल करके बताया कि दिल्ली से एक ट्रेन आ रही है जिसमें एक महिला को पेट में तेज दर्द है। महिला 7 महीने की गर्भवती है। कोरोना के डर से बेखौफ विशाल वानी ने महिला डॉक्टर को कॉल किया और पनवेल रेलवे स्टेशन पहुंच गए। महिला की डिलीवरी कराई। यह कोई पहला मामला नहीं इसके पहले भी उनके क्लीनिक के सामने कई मरीज गंभीर हालत में पहुंचते हैं। वानी उस प्राइवेट संस्था में काम करते हैं जो पूरे शहर में एक रुपये की क्लीनिक का संचालन करती है। डॉक्टर राहुल घुले ने इसको लेकर एक सपना देखा और अब तक 2 लाख मरीजों का इलाज किया जा चुका है।
हादसे के बाद आया क्लीनिक का ख्याल
डॉक्टर राहुल घुले को एक हादसे के बाद इस ऐसी क्लीनिक खोलने का ख्याल आया। घुले ने कहा कि हाईवे पर उनके माता पिता का एक्सीडेंट हो गया और उस जगह के पास कोई हॉस्पिटल नहीं था। मेरी मां को ब्रेन हैमरेज हो गया और वो नौ महीने तक न चल सकीं और न बोल सकीं। 25 लाख के लोन के अप्लाई किया एक चैरिटेबल क्लीनिक खोलने के लिए। मुंबई रेलवे स्टेशन पर क्लीनिक खोला जहां 10 लोग रोजना हादसे का शिकार हो जाते हैं। इलाज ही नहीं MRI,CT स्कैन और दूसरी जांच भी सस्ते में किया जाता है। मेडिकल फील्ड की सच्चाई बताते हुए घुले ने कहा कि जांच में 40 प्रतिशत का कमीशन मिलता है। इससे मैं भी अलग नहीं हूं। घुले ने कहा कि ऐसे मरीजों का इलाज करके खुशी मिलती है जिनके पास पैसे नहीं है।
82साल की उम्र में भी रोजाना देखते हैं कई मरीज
82 साल की उम्र में किडनी की बीमारी से जूझ रहे डॉक्टर सुशोभन बनर्जी गरीब मरीजों का फ्री इलाज कर रहे हैं। पिछले 58 साल से बंगाल के बोलपुर के आसपास मरीजों का इलाज सिर्फ एक रुपये में कर रहे हैं। यूके से लौटने के बाद ही ऐसा वो कर रहे हैं। उन्हें लोग एक टकर डॉक्टर एक रुपये वाला डॉक्टर के नाम से जानते हैं। पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजे जा चुके डॉक्टर सुशोभन का कहना है कि जब तक हो सकेगा तब तक वह गरीबों का इलाज ऐसे ही करते रहेंगे। आरजी मेडिकल कॉलेज से MBBS के बाद वो लंदन आराम से बस सकते थे लेकिन उन्होंने अपने लोगों के बीच वापस लौटने का फैसला किया। 1963 में एक रुपये की क्लीनिक खोली। मरीजों को ऐसा न लगे कि वो कोई उपकार कर रहें है इसलिए एक रुपये लेता हूं। मेरी बेटी और दामाद दोनों डॉक्टर हैं और उनको मेरी सेहत को लेकर चिंता होती है लेकिन मैंने अपने दरवाजे कभी किसी मरीज के लिए बंद नहीं किए।
5 रुपये वाले डॉक्टर के नाम से मशहूर
एक हेल्थ वर्कर को जब स्कीन की प्रॉब्लम हुई तो वह अपने इलाके के चर्चित पांच रुपये वाले डॉक्टर एस सी शंकरगौड़ा के पास जाने का फैसला किया। शंकरगौड़ा को लेकर कहा जाता है कि उनके हाथों में जादू है। शंकरगौड़ा एक दिन में 300 से अधिक लोगों का इलाज करते हैं। वो अपना क्लीनिक कई साल से चला रहे हैं कई बार मरीज टेबल पर पांच रुपये रखते हैं कई बार नहीं भी रखते। डॉक्टर एससी शंकर गौड़ा मनिपाल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की।और जल्द ही उन्होंने 1982 के बाद ही मांडया में अपना क्लीनिक खोल लिया। लोगों की सेवा कर रहे हैं। 5 रुपये की क्लीनिक इलाके में काफी लोकप्रिय है।
50 साल से नहीं बढ़ाई मरीजों के लिए फीस
रांची के लालपुर इलाके में एक पुरानी बिल्डिंग के बाहर लोगों की लंबी कतार। सबका ध्यान खींच लेती है। अंदर और बाहर मरीजों की भीड़। पद्मश्री डॉक्टर एस पी मुखर्जी जो मरीजों से सिर्फ 5 रुपये लेते हैं। 1957 से ही क्लीनिक चला रहे हैं और पिछले 50 सालों में कभी फीस नहीं बढ़ाई। एस पी मुखर्जी इस बात को खुद स्वीकार करते हैं कि कोरोना के दौर में 50 रुपये फीस बढ़ाने को मजबूर हुए ताकि क्लीनिक को सेनेटाइज किया जा सके और मरीजों को सेनेटाइजर और मास्क दिया जा सके। यह फीस सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए जो दे सकते थे।
मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने के बाद फ्री इलाज
उड़ीसा के संबलपुर शहर में वीर सुरेंद्र सांई इंस्टीट्यूट VIMSAR की ओर से फ्री क्लीनिक की शुरुआत की गई है। डॉक्ट शंकर रामचंदानी जो कि VIMSARमें असिस्टेंट प्रोफेसर है। मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के बाद वो एक एक घंटे करके क्लीनिक चलाते हैं जहां लोगों का फ्री में इलाज होता है। रामचंदानी बिना डरे खुद अपनी कार में बैठाकर मरीज को हॉस्पिटल ले जाते देखे गए।
-एजेंसियां

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