अफगानिस्‍तान की बजाय चीन के आक्रामक व्‍यवहार पर नकेल कसेंगे: बाइडेन

वॉशिंगटन। अमेरिका के अफगानिस्‍तान से हटने पर भारत समेत दुनियाभर में तालिबान राज को लेकर चिंता जताई जा रही है। भारतीय सुरक्षा प्रतिष्‍ठानों में इस बात को लेकर चिंता गहराती जा रही है कि कहीं तालिबान-पाकिस्‍तान-चीन की तिकड़ी भारत के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर में बड़ा संकट न बन जाए। अब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे भारत राहत महसूस कर सकता है। बाइडेन ने कहा कि अमेरिका अफगानिस्‍तान की बजाय चीन के ‘आक्रामक’ व्‍यवहार पर नकेल कसेगा।
बाइडेन ने कहा कि अगले महीने तक अफगानिस्‍तान से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा और चीन तथा रूस से उभरते हुए खतरों पर पूरा फोकस करेगा। बाइडेन ने कहा कि 31 अगस्‍त तक सभी अमेरिकी सैनिक वापस आ जाएंगे। उन्‍होंने कहा, ‘हम अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध का अंत कर रहे हैं।’ अमेरिका ने 9/11 आतंकी हमले के बाद अफगानिस्‍तान पर हमला किया था। अमेरिका के निशाने पर अलकायदा और उसको शरण देने वाला तालिबान था।
शी जिनपिंग और पुतिन से अमेरिका को कड़ी चुनौती
वर्ष 2013 के शुरुआत में अमेरिका को पता चला कि चीन बहुत तेजी से शी जिनपिंग के नेतृत्‍व में अपनी सैन्‍य ताकत को बढ़ा रहा है। चीन ने दक्षिण चीन सागर, जिबूती और एशिया तथा मध्‍य एशिया के कई जगहों पर सैन्‍य ठिकाने बनाने में लग गया है। वर्ष 2014 में रूस ने भी यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्‍जा कर‍ लिया और पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों को मदद देना शुरू कर दिया है। रूस पर अमेरिकी चुनाव को भी प्रभावित करने के आरोप लगे।
वर्ष 2017 में तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था, ‘चीन और रूस अमेरिकी शक्ति, प्रभाव और हितों को चुनौती देते हैं। वे अमेरिकी सुरक्षा और समृद्धि को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।’ वर्तमान समय में चीन और अमेरिका के बीच ताइवान को लेकर माहौल बहुत गर्माया हुआ है। यही नहीं अंतरिक्ष और साइबर स्‍पेस में भी अमेरिका की चीन और रूस के साथ कड़ी प्रतिस्‍पर्द्धा चल रही है। इसी वजह से अमेरिका अब अपनी नौसेना को ज्‍यादा मजबूत करना चाहता है, लंबी दूरी मार करने वाले बमवर्षक विमान बना रहा और किलर पनडुब्बियों की संख्‍या को बढ़ा रहा है।
लद्दाख में आंख दिखा रहा चीन, साथ आए भारत-अमेरिका
चीनी ड्रैगन लद्दाख में भारतीय जमीन पर नजरें गड़ाए हुए है। कई दौर की बातचीत के बाद भी चीन का आक्रामक रवैया बरकरार है और वह पीछे हटने को तैयार नहीं हो रहा है।
चीन की इसी दादागिरी को रोकने के लिए अमेरिका ने अब क्‍वॉड को मजबूत करने की ठानी है। क्‍वॉड में अभी भारत, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और अमेरिका सदस्‍य हैं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जल्‍द ही क्‍वॉड के शीर्ष नेताओं की बैठक करने जा रहे हैं। क्‍वॉड एक ऐसा संगठन है जो हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्‍यवहार के खिलाफ साथ आता दिख रहा है। ऐसे में अब भारत को चीन के मोर्चे पर अमेरिका जैसा ताकतवर सहयोगी मिल सकता है।
-एजेंसियां

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