भूमि पूजन से पहले अयोध्या में मूंछ वाले राम की मांग क्यों?

महाराष्ट्र के हिंदुत्ववादी नेता संभाजी भिड़े ने मांग की है कि अयोध्या के राम मंदिर में बनने वाली भगवान राम की मूर्ति में मूंछें भी लगाई जाएं। उन्होंने कहा कि राम की मूर्ति में मूंछें न लगाना कलाकारों की गलती है, जिसे उन्हें सुधारना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति की मूंछें नहीं होंगी तो ऐसे राम के मंदिर का मेरे जैसे भक्तों के लिए कोई अर्थ नहीं है।
हिंदू देवताओं की मूंछें
संभाजी भिड़े ने राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति में मूंछों की कल्पना तो की है लेकिन अगर हम देखें तो हिंदू धर्म में ब्रह्मा को छोड़कर किसी देवता की तस्वीरों या मूर्तियों की मूछें सामान्यतः नहीं होतीं। कुछ जगहों पर शिव की मूर्तियों में मूंछें दिखाई पड़ती हैं लेकिन विष्णु, कृष्ण, राम और अन्य देवताओं की बिना मूंछों वाली मूर्तियां ही हमारी नजर में हैं। ऐसा माना जाता है कि ईश्वर चिर-किशोर होते हैं। इसे ध्यान में रखकर ही उनकी मूर्तियों या तस्वीरों में उनकी मूंछें नहीं बनाई जातीं लेकिन संभाजी की मांग इस धारणा के विपरीत है।
कलाकारों की ऐतिहासिक गलती
संभाजी ने कहा है कि भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियों में मूंछों का न होना कलाकार की गलती है। उन्होंने कहा, राम एक प्रेरणादायक देवता हैं। साथ ही वह पुरुष देवता भी हैं। उनके अलावा लक्ष्मण और हनुमान भी पुरुष देवता हैं। ऐसे में उन्हें बिना मूंछों के दिखाना चित्रकारों और मूर्तिकारों की ऐतिहासिक गलती है। उन्होंने कहा कि इन मूर्तियों को मूंछों वाला होना चाहिए।
बड़ी और घनी मूछों में अक्सर देखे जाने वाले संभाजी ने तो इतना तक कह दिया कि अगर मूर्तियों में मूंछें नहीं बनती हैं तो उनके जैसे अनुयायियों के लिए ऐसे मंदिर के होने का ही कोई फायदा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐतिहासिक और सदियों पुरानी गलती है, जिसे सुधारा जाना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने ट्रस्ट के अध्यक्ष से भी आग्रह किया है। संभाजी के बयान पर जाएं तो उनके लिए रामजी की मूंछें होना सिर्फ इसलिए जरूरी है क्योंकि वह पुरुष देवता हैं।
सत्येंद्र दास का संभाजी को जवाब
वहीं अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्रदास ने संभाजी की मांग को गलत बताया है। उन्होंने कहा, ‘कहीं भी राम, कृष्ण और शिव की मूर्ति की मूंछें नहीं हैं क्योंकि तीनों देवताओं को षोडष वर्षीय यानी कि सोलह वर्ष का माना जाता है। वह जब तक धरती पर रहेंगे, तब तक सोलह साल के ही रहेंगे।’ सत्येंद्रदास ने कहा, ‘हिंदू धर्म में तीन देवता राम-कृष्ण और शिव प्रसिद्ध माने जाते हैं। इनके अलावा ब्रह्मा, जिनके पांच मुख हैं, उनकी आयु सीमित है लेकिन राम सदा तरुण अवस्था में पूजे जाते हैं।’
सत्येंद्र दास ने संभाजी की मांग पर कहा कि अगर वह ऐसा कह रहे हैं तो उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसे में उन्हें अनर्गल बातें नहीं बोलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मूंछों वाली राम की मूर्ति कहीं नहीं है और अगर है तो उन्हीं (संभाजी) जैसे अज्ञानियों की वजह से है।
मूंछों वाले राम का मंदिर
भिड़े की मांग अनोखी नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि मूंछों के साथ राम का मंदिर कहीं नहीं है। मध्य प्रदेश के इंदौर में श्रीराम का एक ऐसा मंदिर है, जहां उनकी मूंछे हैं। उनके अलावा लक्ष्मण की भी मूंछें हैं। कुमावतपुरा में स्थित इस मंदिर को 150 साल पुराना बताया जाता है। लोगों में ऐसी मान्यता है कि अगर दशरथ की दाढ़ी-मूंछें हो सकती हैं तो राम की भी मूंछें जरूर होंगीं।
ओडिशा में भी मूर्ति में रामजी की मूंछें
इसके अलावा ओडिशा के ओडागांव में भी एक मंदिर में भगवान राम की मूंछों वाली प्रतिमा स्थापित है। बताया जाता है कि राम-लक्ष्मण और सीता वनवास के दौरान महर्षि अत्रि के आश्रम में आए थे। ऋषि ने उनकी खूब आवभगत की थी। जब वे चले गए तो निशानी के तौर पर महर्षि ने आश्रम में तीन पत्थर स्थापित कर दिए। बाद में इसे मूर्ति का आकार दे दिया गया।
चूंकि राम और लक्ष्मण वनवास के दौरान यहां आए थे इसलिए ऐसा माना गया कि उनकी दाढ़ी-मूंछें बढ़ी होंगी इसलिए यहां भगवान की मूर्ति की दाढ़ी-मूंछें हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान के एक मंदिर में हनुमान की मूर्ति की भी मूंछें हैं। यह मंदिर हनुमानजी की इन मूंछों के कारण ही लोकप्रिय है।
कौन हैं संभाजी?
कट्टर हिंदुत्ववादी और उग्र विचारों के लिए जाने जाने वाले संभाजी भिड़े पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे लेकिन बाद में किसी मतभेद के कारण उन्होंने संघ छोड़ दिया और खुद का संगठन श्रीशिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान का गठन किया। अपने विवादित बयानों के कारण वह कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे है। संभाजी के चेहरे पर उनकी घनी और बड़ी मूंछे आकर्षण का केंद्र होती हैं। संभाजी के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज्यादातर नेताओं और संघ प्रमुख मोहन भागवत के चेहरे पर भी घनी मूंछें देखी जा सकती हैं।
-एजेंसियां

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