माघ मास में गीता और रामायण का पाठ करने की क्यों है परंपरा

आज से माघ माह शुरू हो गया है, ये हिन्दी पंचांग का ग्यारहवां महीना है। इस महीने में मौनी अमावस्या (11 फरवरी) और बसंत पंचमी (16 फरवरी) मनाई जाएगी। ये महीना 27 फरवरी तक रहेगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार माघ महीने में श्रीमद् भगवद् गीता और रामायण का पाठ करने का विशेष महत्व है।

माघ माह में रोज सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में धूप-दीप जलाएं, पूजा करें। पूजन के बाद अपने समय के अनुसार ग्रंथ का पाठ करना चाहिए। रोज नियमित रूप से ग्रंथ के थोड़े-थोड़े हिस्से का पाठ करें और उसके संदेश को समझकर जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।

नदी में स्नान और तीर्थ दर्शन की परंपरा

माघ माह में पवित्र नदियों में डुबकी लगाने की परंपरा है। इसी वजह से इस माह में हरिद्वार, काशी, मथुरा, उज्जैन जैसे धार्मिक शहरों में काफी भक्त पहुंचते हैं और यहां की पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। माह में तीर्थ दर्शन करने की भी परंपरा है। किसी ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ, चारधाम या किसी अन्य प्राचीन मंदिर में दर्शन किए जा सकते हैं।

जरूरतमंद लोगों को दान जरूर करें

पूजा-पाठ के साथ ही इस महीने में जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान जरूर करें। इन दिनों ठंड काफी अधिक रहती है, ऐसे में कंबल, तिल-गुड़ का दान जरूर करें। किसी गौशाला में पैसों के साथ ही हरी घास भी दान करनी चाहिए।

पंचदेवों की पूजा करें

इस माह में रोज सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, शिवजी, देवी मां की पूजा करें। पूजा की शुरुआत गणेश पूजन से करनी चाहिए। ये पांचों पंचदेव माने गए हैं। इनकी पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति हो सकती है।

ये शुभ काम भी जरूर करें

रोज सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

चतुर्थी, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या जैसी तिथियों पर व्रत-उपवास और पूजा-पाठ के साथ ही दान-पुण्य भी जरूर करें।

इस समय में स्वास्थ्य लाभ के लिए सुबह जल्दी उठें और व्यायाम जरूर करें। सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाने से भी स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
– Legend News

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