राफेल के साथ क्‍यों सुर्खियों में है एयर कोमोडोर हिलाल अहमद का नाम?

नई दिल्‍ली। एयर कोमोडोर हिलाल अहमद राठेर इन दिनों सुर्खियों में छाए हुए हैं। राफेल के पहले बैच ने रविवार को फ्रांस से भारत के लिए उड़ान भरी तो उस समय पैरिस में एयर कोमोडोर हिलाल अहमद राठेर भी मौजूद थे। वह फ्रांस में भारत के एयर अताशे हैं। हिलाल के साथ फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ और राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन के चेयरमैन एरिक ट्रैपियर भी समारोह का हिस्सा थे। एयर कोमोडोर हिलाल अहमद जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के हैं।
राफेल में चुन-चुनकर लगवाए हथियार, एक साल से जुटे हुए थे राठेर
एयर कोमोडोर हिलाल अहमद राठेर ने केवल राफेल की वक्त पर डिलीवरी सुनिश्चित की बल्कि इसमें भारत की जरूरतों के मुताबिक किन-किन हथियारों को लगाया जाए, यह तय करने में भी अहम भूमिका निभाई है। अब उनका नाम राफेल के साथ हमेशा-हमेशा के लिए जुड़ चुका है। राठेर ने भारतीय वर्जन के राफेल में 13 नई कैपिटिसटी को शामिल करवाया। इसके अलावा राठेर ने भारतीय मौसम में राफेल को पूरी तरह से मारक बनाने के लिए कई तरह के हथियार लगवाए। फ्रांस में एयर अताशे राठेर जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के रहने वाले हैं। राठेर के पिता रिटायर्ड डीएसपी हैं।
शस्त्र पूजा की तैयारियों में मशगूल
वो अक्टूबर 2019 में पैरिस राफेल की शस्त्र पूजा के वक्त भी काफी एक्टिव थे। इस वीडियो में वह शस्त्र पूजा की तैयारियां करते नजर आ रहे हैं। ध्यान रहे कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल फ्रांस जाकर राफेल की शस्त्र पूजा की थी।
NDA में जीता था ‘सॉर्ड ऑफ ऑनर’
हिलाल का जन्म मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता मरहूम मोहम्मद अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर पुलिस डिपार्टमेंट से बतौर डेप्युटी एसपी रिटायर हुए थे। हिलाल के परिवार में तीन बहनें हैं जबकि वो अकेले भाई हैं। हिलाल अहमद राठेर ने जम्मू जिले के नगरोता टाउन स्थित सैनिक स्कूल से पढ़ाई की। उन्होंने डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज (DSSC) से ग्रेजुएशन डिग्री ली। वो अमेरिका के एयर वॉर कॉलेज से भी ग्रेजुएट हैं। नेशनल डिफेंस अकैडमी (NDA) में उन्होंने ‘सॉर्ड ऑफ ऑनर’ हासिल किया।
1988 में जॉइन की भारतीय वायु सेना
17 दिसंबर 1988 को उन्होंने एक फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना को जॉइन किया। 1993 में वो फ्लाइट लेफ्टिनेंट, 2004 में विंग कमांडर, 2016 में ग्रुप कैप्टन और फिर 2019 में एयर कोमोडोर के पद पर पहुंच गए। उनके पास 3000 घंटे तक मिग-21, मिराज- 2000 और किरन एयरक्राफ्ट उड़ाने का अनुभव है। इंडियन एयर फोर्स की वेबसाइट पर इनके करियर डिटेल्स में एयर कोमोडोर हिलाल अहमद दुनिया के सर्वोत्तम फ्लाइंग ऑफिसरों में शुमार बताया गया है। एयर कोमोडोर हिलाल अहमद राठेर को 2010 में वायु सेना मेडल से नवाजा गया था जब वो विंग कमांडर हुआ करते थे। 2016 में उन्हें विशिष्ट सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया है। उस वक्त वो ग्रुप कैप्टन थे।
-एजेंसियां

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