किन-किन देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने रोकी अफगानिस्‍तान की वित्तीय मदद?

अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण की परियोजनाओं के लिए विशेष अमेरिकी निरीक्षक के अनुसार देश के कुल बजट का 80 फीसदी हिस्सा विदेशी मदद से मिलता है.
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद इस आर्थिक मदद के बंद हो जाने का खतरा मंडरा रहा है.
अभी तक कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, वित्तीय एजेंसियों और कुछ देशों ने अफ़ग़ानिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद रोक दी है.
विश्व बैंक ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण से जुड़ी परियोजनाओं से अपना हाथ खींच लिया है.
अगस्त में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की तरफ़ से अफ़ग़ान हुकूमत तो 440 मिलियन डॉलर की मदद मिलनी थी, जो अब अधर में लटक गई है.
अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान के सात अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को फ़्रीज़ कर दिया है.
जर्मनी ने भी अफ़ग़ानिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोकने का फ़ैसला किया है. इस साल वो अफ़ग़ानिस्तान को 300 मिलियन डॉलर देने वाला था. स्वीडन और फिनलैंड ने भी ऐसे ही कदम उठाए हैं.
यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के विकास के मद में दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोक देगा. यूरोपीय संघ की तरफ़ से अफ़ग़ानिस्तान को साल 2021 से 2024 के बीच 1.4 अरब डॉलर की रकम मिलनी थी.
हालांकि दूसरी तरफ़ मानवीय सहायता के मद में दी जाने वाली मदद बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
19 अगस्त को ब्रिटेन ने कहा था कि वो इस साल मानवीय सहायता के रूप में दी जाने वाली रकम को बढ़ाकर 268 मिलियन पाउंड कर देगा.
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार ने अभी तक ये साफ़ नहीं किया है कि तालिबान के आने से इस राशि के भुगतान पर कोई असर पड़ेगा या नहीं.
पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान के दान दाता संगठनों और देशों की एक कॉन्फ्रेंस में उसे 12 अरब डॉलर की सहायता राशि देने का वादा किया गया था लेकिन सत्ता में बदलाव से इन भुगतानों पर क्या असर पड़ेगा, ये अभी तक साफ़ नहीं है.
-एजेंसियां

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