जब रणवीर ने कहा, इस सवाल को जोर से और बार-बार पूछा जाए

मुंबई। रणवीर सिंह की फिल्म ‘गली बॉय’ के ट्रेलर लॉन्च पर जब उनसे शाहरुख, सलमान और आमिर की फ्लॉप फिल्मों के बारे में सवाल पूछा गया तो रणवीर ने मस्ती भरे अंदाज में हंसते और खुश होते हुए कहा, इस सवाल को और जोर से माइक में पूछा जाए और बार-बार पूछा जाए।
आमतौर पर पिछले दो दशकों से बॉलिवुड में साल के अंत में जब फिल्मों की सफलता, सराहना और बिजनेस का बैलंसशीट बनाई जाती थी तो उसमें शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान के अवॉर्ड, मोटी कमाई और सराहना-सम्मान का ही जिक्र होता था। बीता साल सफल फिल्मों के मामले में बॉलिवुड के तीनों खान के लिए बेहद निराशाजनक रहा।
आनंद एल राय जैसे सफल निर्देशक का साथ मिलने के बाद भी शाहरुख एक बार फिर गच्चा खा गए… मोटी कमाई करने वाली तौरानी ब्रदर्स की ‘रेस’ फ्रेंचाइजी की ‘रेस 3’ में सलमान खान की दबंगई नहीं चली और पहली बार रुपहले परदे पर नजर आई सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और आमिर खान की जोड़ी का धुंआ निकल गया। इन दिनों बॉलिवुड के गलियारों में बुरी तरह फिसले खान्स की चर्चा खूब हो रही है। खान्स के प्रतियोगी सितारे दबे मुंह उनके जले पर नमक भी छिड़क रहे हैं। उनके बात करने के अंदाज से साफ नजर आता है कि खान्स की असफलता की बातें सुनकर वह खुश हो जाते हैं। खैर इसे ही तो प्रतियोगिता कहा जाता है।
रणवीर के साथ-साथ खान्स के जले में नमक छिड़कने का काम किया है उनकी बेगमजान यानी दीपिका पादुकोण ने। एक इवेंट में जब दीपिका से बीते साल का लेखा-जोखा सुनाते हुए टॉप 5 फिल्मों का नाम लेते हुए सवाल किया गया कि खान्स की फिल्में भी नहीं चलीं और महिला प्रधान फिल्मों ने बाजी मार ली। बड़ी चालाकी से मैडम पादुकोण ने भी फिल्मों के बिजनेस का अर्थशात्र बताया और बाद में झटपट दबी जुबान से कह गईं कि वह मानती हैं कि बीते साल खान्स की फिल्में नहीं चलीं।
दीपिका ने कहा, ‘जब हम फीमेल रोल मॉडल की बात कर रहे हों, तब जरूर यह कहना अच्छा लगता है कि महिला प्रधान फिल्मों ने बीते वर्ष अच्छा बिजनेस किया लेकिन जब हम क्रिएटिविटी की बात करते हैं, तब हमें मेल-फीमेल की धारणा से ऊपर उठकर बात करना चाहिए। मैं मानती हूं कि बीते वर्ष में खान्स ( Salman Khan, Shah Rukh Khan and Amir khan ) की फिल्में नहीं चलीं, लेकिन आयुष्मान खुराना की फिल्म अंधाधुन तो बेहद सफल रही।’
बाद में लीपा-पोती करते हुए दीपिका कहा, ‘यह सिनेमा का ऐसा समय है, जब मेल-फीमेल नहीं बल्कि अच्छी कहानी और कॉन्टेंट का बोलबाला है। यह भी सही है कि पिछले कुछ समय से, जिन फिल्मों में महिला किरदार मजबूत है, वह सफल रही हैं। आज हम ऐसे वक्त में हैं, जब महिला प्रधान फिल्मों के बेहतरीन बिजनस के बाद कई निर्देशक फिल्म बनाने के रूल्स को बदल रहे हैं, ऐसे रूल्स, जिनके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा।’
निर्देशकों के बदले रूल्स के बारे में दीपिका बताती हैं, ‘जैसे अगर कोई फिल्म की कहानी हीरो की मुख्य भूमिका वाली है, तो वह उस कहानी को सुनाते हुए, या बनाने से पहले जरूरत पड़ने पर कहानी को पलट कर हिरोइन की भूमिका को प्रमुख कर देते हैं। ऐसा भी हुआ है, जब किसी एक कहानी को 2 से 3 साल पहले किसी हीरो को सुनाया गया और अब उसी कहानी को बदल कर महिला की मजबूत भूमिका के साथ आपको सुनाया जाता है। मैं इसे बहुत बड़ा बदलाव और अचीवमेंट मानती हूं।’
दीपिका आगे कहती हैं, ‘एक क्रिएटिव व्यक्ति होने के नाते कहूंगी कि इस बात को मेल-फीमेल के विचार से नहीं देखना चाहिए, बल्कि मैं इसे कहूंगी कि आज ग्रेट कॉन्टेंट ही है जो सबसे ज्यादा काम कर रहा है। मेरे ख्याल से यह सब दर्शकों की रूचि के हिसाब से बदल रहा है, मुझे लगता है आगे चलकर दर्शक यह नहीं देखेगें कि आपकी फिल्म में कौन सा बड़ा स्टार है, बल्कि यह देखा जाएगा की किस तरह की कहानी आप कहने जा रहे हैं।’
अपनी बात समाप्त करते हुए दीपिका ने कहा, ‘मेरे ख्याल से अब ऐसा समय आ रहा है जब दर्शक आपकी फिल्म देखने किसी बड़े स्टार की वजह से नहीं आएंगे, बल्कि कॉन्टेंट की वजह दे देखने आएंगे। आज दर्शक इतना ज्यादा समझदार हो गए हैं कि फिल्म का पहला पोस्टर, टीजर और ट्रेलर देखकर वह समझ जाते हैं कि आपकी फिल्म को देखना है या नहीं। अब वह दिन गए जब बड़े स्टार को पोस्टर में देखने के बाद लोग फिल्म देखने जाते थे।’
-एजेंसियां

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