नेपाल ने बातचीत की पहल की तो भारत ने कहा, पहले भरोसा कायम करो

नई दिल्‍ली। कालापानी सीमा विवाद पर नेपाल ने भारत के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत के लिए पहल की है लेकिन भारत ने कहा है कि बातचीत शुरू हो इसके लिए दोनों देशों के बीच पहले भरोसे का माहौल बनने की ज़रूरत है.
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा क्षेत्र को लेकर तनाव चल रहा है. भारत सरकार के जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 हटाने के बाद नेपाल ने एक नया नक्शा जारी किया था. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ गया है.
नेपाल के नक्शे में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल की सीमा में शामिल किया गया है. वहीं बीते साल भारत ने नया नक्शा जारी कर कालापानी को अपना हिस्सा बताया था.
नेपाल सरकार नए नक्शे को क़ानूनी मान्यता देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक भी लाने वाली थी लेकिन प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के अधिक वक्त मांगने के कारण फिलहाल इसे टाल दिया गया है.
जानकारी के अनुसार एक ओर जहां अब नेपाल इस मसले पर सचिव स्तर की बातचीत के लिए ज़ोर दे रहा है वहीं भारत का कहना है कि बातचीत के लिए आपसी विश्वास का माहौल होना ज़रूरी है और दोनों पड़ोसियों के बीच भरोसा होना भी अहम है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के हवाले से अख़बार ने कहा है कि भारत, नेपाल में ताज़ा हालातों पर नज़र रखे हुए है. उन्होंने कहा कि हमें पता है कि नेपाल इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए ही इस पर विचार कर रहा है.
उन्होंने कहा, “भारत विश्वास के माहौल में आपसी संवेदनशीलता के आधार पर अपने सभी पड़ोसी देशों से बातचीत के लिए तैयार है. यह एक प्रक्रिया है और इसके लिए सकारात्मक प्रयासों की ज़रूरत है.”
अपने संबोधन में उन्होंने भारत-नेपाल के ऐतिहासिक और गहरे संबंधों की भी बात कही. उन्होंने कहा, “कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में भी भारत ने नेपाल को ज़रूरी दवाओं की सप्लाई चालू रखी है.”
उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों बीच पैदा हुए सीमा विवाद को सुलझाने के लिए नेपाल सचिव स्तर की बातचीत को शुरू करना चाहता है. कालापानी पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिए वह बीते साल नवंबर से ही कोशिश कर रहा है.
-BBC

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