जब मुल्‍ला नसरुद्दीन पहुंचा कब्रिस्‍तान

मृत्‍यु ही एकमात्र शाश्‍वत सत्‍य है, बाकी सारे सत्‍य सिर्फ भ्रम हैं इसलिए मृत्‍यु को हर पल याद रखने वाले का जीवन सार्थक हो जाता है किंतु अपनी मृत्‍यु को, दूसरों की मृत्‍यु को नहीं।
एक राहगीर मुल्‍ला नसरुद्दीन की टोपी उतारकर ले गया। अचानक की गई इस हरकत से मुल्‍ला बहुत क्रोधित हुआ लेकिन उसका पीछा करने की बजाय सीधा जा पहुंचा कब्रिस्‍तान और वहीं डेरा जमा लिया।
जिन लोगों ने राहगीर को मुल्‍ला की टोपी उतारकर भागते हुए देखा था, उन्‍होंने चकित होकर मुल्‍ला से पूछा- मियां, चोर तो दूसरी ओर भाग गया। अब तुम यहां कब्रिस्‍तान में क्‍या कर रहे हो?
इस पर मुल्‍ला का जवाब था- उसके पीछे कहां तक भागता। एक दिन उसे यहां तो आना ही पड़ेगा, तभी समझ लूंगा।