प. बंगाल ह‍िंसा: गैंगरेप पीड़‍िताओं ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

नई द‍िल्‍ली। पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर विधानसभा चुनाव से पहले और बाद की स्थिति कोई खासा फर्क नहीं है। चुनावी नतीजों के दिन ही बंगाल में कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं सामने आई थी और तब से लेकर अब तक बंगाल के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की कुछ महिलाओं ने हिंसा के दौरान खुद के साथ गैंगरेप होने की बात कही है और इन महिलाओं ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगाया है।

इस संबंध में कई महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन महिलाओं ने उस दौरान अपने साथ हुई वारदातों के बारे में कोर्ट के समक्ष बताते हुए इस मामले की एसआईटी जांच की मांग उठाई है। महिलाओं ने कोर्ट के सामने 4 मई को उनके साथ हुई बदसलूकी का हाल बताया है।

पोते के सामने ही 60 वर्षीय महिला से रेप

सुप्रीम कोर्ट में एक 60 वर्षीय महिला ने बताया कि 4 मई की रात उनके घर में टीएमसी के कार्यकर्ता जबदस्ती घुस आए थे और उन्होंने महिला के पोते के सामने ही उनके साथ दुष्कर्म किया। महिला ने बताया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घर में लूट भी की। यह मामला मेदिनीपुर जिले का है, जिसपर महिला का कहना है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बदला लेने के लिए रेप जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।

बंगाल पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी अर्जी में महिला ने आरोप लगाया कि बंगाल में पुलिस की निष्क्रियता के चलते ऐसी घटनाओं को बढावा मिल रहा है।

एक महिला ने आप बीती बताते हुए कहा कि उसके पति ने बीजेपी के लिए प्रचार किया था, जिसके चलते टीएमसी के लोगों ने दिनदहाड़े उन्हें कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतार दिया।इसके बाद उसके साथ भी रेप की कोशिश की गई।

रेप के बाद परिवार को मारने की धमकी

एक 17 वर्षीय नाबालिग ने भी कोर्ट में टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ इसी तरह के गंभीर आरोप लगाए। लड़की का कहना है कि पहले 9 मई को टीएमसी के लोगों ने जगंल में उसके साथ रेप कर उसे वहीं मरने के लिए छोड़ दिया। इसके बाद अगले दिन टीएमसी के नेता उसके घर पर आकर धमकी दी कि अगर उसने मामले की शिकायत पुलिस में की तो उसका घर जलाकर पूरे परिवार जान से मार देंगे।

मई में कोर्ट ने बंगाल सरकार को जारी किया था नोटिस
आपको बता दें कि इससे पहले बंगाल मे चुनाव के बाद हुई हिंसा में बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की हत्या के आरोप में अर्जी दाखिल की गई थी। इसमें हिंसा की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। इस पर मई में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था। इसके अलावा 4 जून को कोलकाता हाई कोर्ट ने भी बंगाल सरकार को इस संबंध में आदेश जारी किया था। आदेश में प्रशासन को हिंसा के बाद घरों को छोड़कर भागे लोगों को वापस बसाने के लिए प्रयास करने के निर्देश दिया गया था।

-एजेंसी

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