संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा ‘रेडी टू स्किल योरसेल्फ’ पर वेबीनार

मथुरा। विद्यार्थियों के कौशल और ज्ञान की उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए समर्पित संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा, ‘रेडी टू स्किल योरसेल्फ’ विषयक एक महत्वपूर्ण वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार के मुख्य वक्ता अनस्कूल (Unschool )के सीईओ नारायनन ने विद्यार्थियों प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे कालेज के अलावा अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए विभिन्न माध्यमों का लगातार उपयोग करें और भरपूर उपयोग करें। उन्होंने कहा कि हर विषय में कुछ न कुछ नया करने को है और उस नए को आपको हासिल करना है।

27 वर्षीय युवा नारायनन ने बताया कि उन्होंने पिछले 5-7 वर्षों में 15-20 देशों में घूम-घूमकर जाना है कि लोगों की भविष्य की जरूरतें क्या हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अनस्कूल कंपनी बच्चों को सभी विषय में नए-नए पाठ्यक्रमों की ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध करा रही है। मैं आज भी लगातार अपने को कौशलयुक्त करने के लिए नए कोर्स करता रहता हूं। विद्यार्थियों को शिक्षित करने में विद्यालयों का बहुत बड़ा रोल होता है लेकिन विद्यार्थी का दायित्व तब पूरा होता है जब वो अपने को एक्सप्लोर कर जानता है कि उसे से किस दिशा में जाना है और क्या लक्ष्य हासिल करना है। महत्वपूर्ण यह कि विद्यार्थी जब निरतंर प्रयास करता है तो उसे पता लगता है कि जो ज्ञान और कौशल उसे चाहिए वह कहां से हासिल कर सकता है।

उन्होंने कहा कि अनस्कूल विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा प्लेटफार्म है जो हर विषय में विभिन्न उपयोगी पाठ्यक्रम की शिक्षा उपलब्ध कराता है। इस प्लेटफार्म में भारत की लगभग सभी रीजनल लैंग्वेज में विद्यार्थी अपनी शंकाओं का समाधान कर सकता है। इस प्लेटफार्म पर प्रैक्टिकल नॉलेज भी हासिल होती है। इसके माध्यम से बड़ी-बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप भी कर सकते हैं, जो पेड होती है, यानि इंटर्नशिप के साथ विद्यार्थियों को एलाउंस भी मिलता है। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को बहुत सारी चीजों में भाग लेना चाहिए, फिर अपना गोल सेट करना चाहिए। सीईओ नारयनन ने कहा कि हमें अपने शिक्षकों का दिल से सम्मान करना चाहिए। उनको अपना अच्छा दोस्त बनाना चाहिए क्योंकि वे ही आपकी समस्याओं का सम्मान कर सकते हैं। अपने शिक्षकों से खूब सवाल करने चाहिए, सवाल करने से हिचकना नहीं चाहिए।

विद्यार्थियों के सवालों के उत्तर में उन्होंने कहा कि दुनिया के सफलतम लोगों के पास भी वही 24 घंटे हैं जो आपके पास है। इन 24 घंटों का सही ढ़ंग से उपयोग ही आपको ऊंचाइयां दे सकता है। एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि ऐसा शोध में जना गया है कि 45 मिनट के बाद हमारा ध्यान भटकने लगता है। आप 15 मिनट का विश्राम लेकर फिर से पढ़ाई कर सकते हैं और इस तरह से विश्राम लेकर 10-12 घंटे तक ध्यान से पढ़ सकते हैं।

उन्होंने संस्कृति विवि के विद्यार्थियों को बताया कि उनके लिए अनस्कूल के कोर्सों में 20-30 प्रतिशत की छूट दी जाती है। इस अवसर का विद्यार्थियों को लाभ उठाना चाहिए। वेबिनार का संचालन एड्जूडाइट कंपनी के प्रतीक खरे ने किया। मुख्यवक्ता का स्वागत संस्कृति स्कूल आफ इंजीनियरिंग के डीन सुरेश कासवान ने किया।

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