NDA में बेटियों के प्रवेश पर सेना के पूर्व अधिकारी का दृष्टिकोण

मुझे आज भी वह समय याद है जब बारहवीं कक्षा के किसी भी लड़के से पूछो तो वह IIT, AIIMS, या NDA में ही जाना चाहता था परंतु लड़कियों के लिए NDA का विकल्प नहीं होता था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के फलस्वरूप विश्व के सर्वोत्तम सेना प्रशिक्षण संस्थानों में से एक NDA अब बेटियों का भी स्वागत करेगा।

किसी भी परीक्षा को पास करने के बाद जो पहला पत्र मिलता है उसको देख कर बहुत प्रसन्नता होती है परंतु NDA का ज्वाइनिंग लेटर जिसमें सबसे ऊपर लिखा होता है “Yes, you have it in you !” ख़ुशी के साथ साथ गर्व भी महसूस करवाता है।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी या नेशनल डिफ़ेन्स अकेडमी में बारहवीं कक्षा पास करने के बाद कडेट्स स्नातक की पढ़ाई के साथ साथ सैन्य प्रशिक्षण भी पाते हैं। आम यूनिवर्सिटी के स्नातक में तीन विषय होते हैं लेकिन एनडीए में तीन प्रमुख विषयों के साथ साथ फ़ॉरेन लैंग्विज, कम्प्यूटर साइयन्स, पोलिटिकल साइयन्स, जीआग्रफ़ी, मिलिटेरी हिस्ट्री, वेपन ट्रेनिंग भी सिखायी जाती है और इसके अलावा फ़िज़िकल ट्रेनिंग, ड्रिल तथा तीनों सेवाओं के विशिष्ट ट्रेनिंग आदि भी होती है।

तीन सालों की इस ट्रेनिंग के दौरान प्रत्येक कडेट को प्रत्येक सेमिसटेर सभी विषयों के इग्ज़ैम पास करने होते हैं जिसमें फ़िज़िकल ट्रेनिंग, स्विमिंग, इक्वेस्ट्रीयन ट्रेनिंग भी अन्य विषयों के साथ शामिल होते हैं तथा हर समेस्टर (टर्म) क्रॉसकंट्री रेस में भी भाग लेना पड़ता है। एनडीए की ट्रेनिंग का एक अहम हिस्सा होते हैं दूसरे, चौथे तथा छठे टर्म में होने वाले ग्रीन हॉर्न, कैम्प रोवर तथा त्रिशूल कैम्प, इन कैम्पस में से कैम्प रोवर सबसे ख़ास है जिसको इक्कीस साल से कम आयु में होने वाले विश्व के सबसे मुश्किल मिलिटेरी कैम्पस में से एक माना गया है और NDA ट्रेनिंग के दौरान कुछ कडेट्स की जान भी गयी है।

मुझे आज भी याद है कि कैम्प रोवर पूर्ण होने के बाद मेरे डिविज़नल ऑफ़िसर ने मुझसे कहा था “इफ़ यू केन डू दिस यू केन डू एनीथिंग“।

एनडीए की तीन साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कडेट्स अपने अपने सर्विस इन्स्टिटूशन में आगे एक साल की ट्रेनिंग के लिए चले जाते हैं। जैसे मैं आर्मी के लिए इंडियन मिलिटेरी अकैडमी (IMA) गया था। और फिर आईएमए की एक साल की ट्रेनिंग के बाद चार सालों की ट्रेनिंग पूरी कर के ही एक कडेट एक डिफ़ेन्स ऑफ़िसर बनता है।

भारतीय सेना में हम महिला अधिकारियों को काफ़ी वर्षों से देख रहे हैं और उन सभी ने अपने कार्य कौशल से खुद को पुरुष अधिकारियों के समान साबित किया है। अब तक महिला ऑफ़िसर सिर्फ़ सर्विसेज़ तथा टेक्निकल आर्म्ज़ में ही जाती रही हैं लेकिन अब NDA की ट्रेनिंग पा कर, मुझे उम्मीद है की महिलाएँ फ़ाइटिंग आर्म्ज़ जैसे इन्फ़ंट्री और स्पेशल फ़ॉर्सेज़ में भी प्रवेश करेंगी और पुरुष अधिकारियों के कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध के मैदान में भी दुश्मन के दांत खट्टे करेंगी।

जिस प्रकार मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में सभी महिला और पुरुष उम्मीदवारों के लिए एक ही परीक्षा और एक ही ट्रेनिंग होती है, मैं उम्मीद करता हूँ कि उसी प्रकार एनडीए में भी सभी कडेट्स को समान ट्रेनिंग मिलेगी तथा राष्ट्र की सेवा में महिला और पुरुष बराबर योगदान कर सकेंगे।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय अवश्य ही यह चाहता होगा कि देश की सेना देश के बेटे और बेटी दोनो को एक समान समझे और बेटियों को भी एनडीए में बेटों जैसे ट्रेनिंग दे कर राष्ट्र सेवा के लिए तैयार करें और यह तभी सम्भव है जब हम जेंडर से ऊपर राष्ट्रीय लक्ष्य को रखें। एनडीए की वैल्यू वहाँ की ट्रेनिंग के कारण ही है यदि एनडीए की ट्रेनिंग में बदलाव किया जाता है तो शायद नया एनडीए वो एनडीए ना रहे जिसमें प्रशिक्षण पाने की महिला कडेट्स उम्मीद कर रही हैं। बेटियों को बेटों के बराबर कहना ही नहीं बल्कि व्यवहार में लाना भी ज़रूरी है।

मेजर (रि‍) लवेन्द्र चौधरी के दृष्टिकोण से एनडीए में बेटियों का प्रवेश

 

मेजर (रि) लवेन्द्र चौधरी,
कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान चोटिल होने के उपरांत सेवानिवृत्त

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