उत्पन्ना एकादशी: पद्मपुराण व स्कंद पुराण में है इनके प्राकट्य की कथा

कल 10 द‍िसंबर को अगहन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। मान्यता है कि इसी तिथि पर एकादशी नाम की देवी प्रकट हुई थीं। शुक्रवार और एकादशी के योग में भगवान विष्णु के साथ ही महालक्ष्मी की पूजा भी जरूर करें। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया गया है। अगहन यानी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर एक देवी प्रकट हुई थीं, जिन्हें एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसी वजह से इस तिथि उत्पन्ना एकादशी कहते हैं।

पद्मपुराण में धर्मराज युधिष्ठिर के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण से पुण्यमयीएकादशी तिथि की उत्पत्ति के विषय पर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि सत्ययुग में मुर नामक भयंकर दानव ने देवराज इन्द्र को पराजित करके जब स्वर्ग पर अपना आधिपत्य जमा लिया, तब सब देवता महादेव जी के पास पहुंचे। महादेवजीदेवगणोंको साथ लेकर क्षीरसागरगए। वहां शेषनाग की शय्यापर योग-निद्रालीन भगवान विष्णु को देखकर देवराज इन्द्र ने उनकी स्तुति की। देवताओं के अनुरोध पर श्रीहरिने उस अत्याचारीदैत्य पर आक्रमण कर दिया। सैकडों असुरों का संहार करके नारायण बदरिकाश्रमचले गए। वहां वे बारह योजन लम्बी सिंहावतीगुफामें निद्रालीनहो गए। दानव मुर ने भगवान विष्णु को मारने के उद्देश्य से जैसे ही उस गुफामें प्रवेश किया, वैसे ही श्रीहरिके शरीर से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से युक्त एक अति रूपवती कन्या उत्पन्न हुई। उस कन्या ने अपने हुंकार से दानव मुर को भस्म कर दिया। नारायण ने जगने पर पूछा तो कन्या ने उन्हें सूचित किया कि आतातायीदैत्य का वध उसी ने किया है। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने एकादशी नामक उस कन्या को मनोवांछित वरदान देकर उसे अपनी प्रिय तिथि घोषित कर दिया। श्रीहरिके द्वारा अभीष्ट वरदान पाकर परम पुण्यप्रदाएकादशी बहुत खुश हुई।

ये है उत्पन्ना एकादशी की कथा

सतयुग की कथा है। उस समय मुर नाम के एक राक्षस ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। इंद्र का मदद के लिए विष्णुजी ने मुर दैत्य से युद्ध किया। युद्ध की वजह से विष्णुजी थक गए। इस कारण वे बद्रिकाश्रम की एक गुफा में विश्राम करने चले गए। भगवान के पीछे मुर दैत्य भी पहुंच गया।

विष्णुजी सो रहे थे, तब मुर ने उन पर प्रहार किया, लेकिन वहां एक देवी प्रकट हुईं और उसने मुर दैत्य का वध कर दिया। जब विष्णुजी की नींद पूरी हुई तो देवी ने पूरी घटना की जानकारी दी। तब विष्णुजी ने वर मांगने के लिए कहा। देवी ने मांगा कि इस तिथि पर जो लोग व्रत-उपवास करेंगे, उनके पाप नष्ट हो जाए, सभी का कल्याण हो। तब भगवान ने उस देवी को एकादशी नाम दिया। इस तिथि से एकादशी उत्पन्न हुई थीं, इसीलिए इसे उत्पन्ना एकादशी कहते हैं।

एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम

इस तिथि पर पूजा-पाठ के साथ ही जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान जरूर करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री अर्पित करें। गौशाला में घास और धन का दान करें। अभी ठंड के दिन चल रहे हैं, ऐसी स्थिति में कंबल और गर्म कपड़ों का दान भी करना चाहिए।

– Legend News

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