अमेरिका और तालिबान वार्ता के नेतृत्‍वकर्ता ज़ल्मय ख़लीलज़ाद का इस्‍तीफा

वॉशिंगटन। अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ राजनीतिक समाधान के लिए जिस वार्ता की शुरुआत की थी, उसमें ज़ल्मय ख़लीलज़ाद को विशेष प्रतिनिधि बनाया था. अब उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
ज़ल्मय ख़लीलज़ाद ने तालिबान के साथ अमेरिकी वार्ता का नेतृत्व किया था लेकिन महीनों की कूटनीतिक वार्ता के बावजूद वो इस समूह को अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने से रोकने में नाकाम रहे.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बताया कि ख़लीलज़ाद की जगह उनके डिप्टी रहे थॉमस वेस्ट अब इस पद को संभालेंगे.
ज़ल्मय ख़लीलज़ाद ने अपने इस्तीफ़े की जानकारी ट्वीट करके भी दी. जिसमें उन्होंने लिखा, “आज मैं अफ़ग़ानिस्तान शांति समझौते के विशेष प्रतिनिधि के पद से इस्तीफ़ा देता हूं. अमेरिकी लोगों की फिर से सेवा करना सम्मान की बात है.”
“अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना बाहर निकल चुकी है और यूएस के लिए युद्ध समाप्त हो गया है लेकिन यह अंतिम चैप्टर नहीं है. अफ़ग़ान लोगों के सामने अर्थव्यवस्था और सुरक्षा समेत बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.”
“मैं अफ़ग़ानिस्तान और इस बड़े क्षेत्र में शांति और खुशहाली की संभावना के लिए प्रतिबद्ध हूं. यह वो ही है जो अफ़ग़ानिस्तान के लोग बीते 40 वर्षों से भी अधिक समय से चाहते थे. अमेरिका उनके साथ खड़ा है.”
“मैं टॉम वेस्ट का अफ़ग़ानिस्तान के लिए विशेष प्रतिनिधि की भूमिका में स्वागत करता हूं क्योंकि अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और अफ़ग़ान नेताओं को आगे ले जाने के लिए वचनबद्ध है.”
“मैं विदेश विभाग, पेंटागन और ख़ुफ़िया समुदाय के अपने सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने इस मिशन में मेरा साथ दिया.”
कौन हैं ख़लीलज़ाद?
70 वर्षीय ख़लीलज़ाद अफ़ग़ानिस्तान में पैदा हुए और काबुल में पले बढ़े. वे एक अनुभवी अमेरिकी राजनयिक हैं, जो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अपने पद पर बने रहे.
तालिबान के साथ वार्ता में जो उनकी भूमिका रही है, उसकी आलोचना होती है. आलोचकों का कहना है कि पिछले तीन सालों में ख़लीलज़ाद की रणनीति कहीं काम नहीं आई और तालिबान चुनी हुई सरकार को बेदख़ल कर ख़ुद ही सत्ता पर क़ाबिज़ हो गए.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 2020 में तालिबान के साथ हुए समझौते की आलोचना की थी. ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें विशेष दूत के पद से हटा दिया जाएगा लेकिन बाइडन ने हटाया नहीं. ख़लीलज़ाद अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के राजदूत रहे हैं और उन्होंने इस इलाक़े में 20 सालों तक काम किया है.
उन्होंने 2020 के समझौते के लिए अपने से पहले वालों पर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा था कि 2018 में उन्हें इसलिए नियुक्त किया गया था क्योंकि अमेरिका जो हासिल करना चाहता था, वो नहीं मिल पाया था.
ख़लीलज़ाद ने एक इंटरव्यू में कहा था कहा, ”मुझसे ज़्यादा उम्मीद थी लेकिन मैं जो कर सकता था, उसे किया है. मैंने हालात के हिसाब से चीज़ों को सुलझाने की कोशिश की.”
उन्होंने तालिबान के साथ बातचीत की अगुवाई की जिसके बाद बीते वर्ष फ़रवरी में तथाकथित दोहा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए और उसके मुताबिक अमेरिकी सैनिकों की अफ़ग़ानिस्तान से वापसी की तारीख़ तय की गई.
-एजेंसियां

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