अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव: रूसी दखल पर रॉबर्ट मूलर देंगे गवाही

वॉशिंगटन। अमेरिका के विशेष वकील रॉबर्ट मूलर 2016 में देश के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के मामले में अपनी रिपोर्ट पर 17 जुलाई को गवाही देने के लिए तैयार हो गए हैं। प्रतिनिधि सभा की न्यायिक एवं खुफिया समिति ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
समिति के अध्यक्ष ऐडम शिफ ने ट्वीट किया ,’रॉबर्ट मूलर समन जारी होने के बाद कांग्रेस के समक्ष गवाही देने को तैयार हो गए हैं।’
उन्होंने लिखा, ‘ट्रंप को विजयी बनाने के लिए रूस ने हमारे लोकतंत्र पर हमला किया। ट्रंप ने इसका स्वागत किया और उस सहायता का इस्तेमाल किया। जैसा मूलर ने कहा, प्रत्येक अमेरिकी को इससे चिंतित होना चाहिए और अब प्रत्येक अमेरिकी को यह सीधे मूलर से सुनने को मिलेगा।’
ट्रंप के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति
दूसरी ओर अमेरिका में एक संघीय जज ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंगलवार को अनुमति दे दी। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति रहते हुए भी लाभ कमाया है जो संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। कोलंबिया जिले के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एमेट जी. सुलीवन ने विधि विभाग के वकील के अनुरोध के खिलाफ फैसला सुनाया। वकील ने मुकदमे के बीच में उच्च न्यायालय में अपील करने और इस दौरान मुकदमे की सुनवाई रोकने की मांग की थी।
करीब 200 डेमाक्रेटिक सांसदों द्वारा समर्थित इस मुकदमे में कहा गया है कि ट्रंप संसद की मंजूरी के बगैर विदेशी और प्रांतीय सरकारों से तोहफे ले रहे हैं।
इतना ही नहीं, अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों से उलट ट्रंप ने अपने कारोबार से भी पूरी तरह संबंध तोड़ने से इंकार कर दिया था। सांसदों का कहना है कि अनुमति लेने में ट्रंप की अनिच्छा जनप्रतिनिधियों को उनका काम ठीक से नहीं करने देने जैसा है।
जज के फैसले के बाद सांसद अब सूचनाएं एकत्र करने के लिए समन भेज सकेंगे।
गौरतलब है कि मंगलवार को यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब ट्रंप 2020 राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक गोलमेज कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन स्थित अपने ही नाम वाले होटल में जा रहे हैं। यह होटल व्‍हाइट हाउस के बिलकुल करीब है। इस कार्यक्रम में चुनावी अभियान के लिए धन जुटाया जाएगा।
विधि विभाग की प्रवक्ता केली लाको का कहना है कि इस मुकदमे को खारिज हो जाना चाहिए था। ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न हीं प्रतिक्रिया के लिए अनुरोधों का जवाब दिया है। सदन की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘कोई कानून की जद से बाहर नहीं है….राष्ट्रपति भी नहीं।’
-एजेंसियां

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