‘यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ की रिपोर्ट: पाकिस्तान को और ज्यादा सहयोग देकर भारत के लिए मुसीबतें पैदा करना चाहता है चीन

वॉशिंगटन। चीन दक्षिण एशिया के देशों में अपना दबदबा बनाना चाहता है। अगले दशक में वह इस क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मामलों में प्रभाव बनाने की कोशिशों को बढ़ाएगा। ड्रैगन पाकिस्तान को और ज्यादा सहयोग देकर भारत के लिए मुसीबतें पैदा करना चाहता है।
मौजूदा हालात और चीन की नीतियों पर अमेरिका के थिक टैंक ‘यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से चीन इस क्षेत्र को अपने अनुरूप आकार देने का प्रयास कर रहा है।
रिपोर्ट में अमेरिका को सलाह दी गई है कि वह इस क्षेत्र को सर्वोच्च वरीयता पर रखते हुए अपनी सफल योजनाओं को अंजाम दे।
इस अध्ययन में वरिष्ठ विशेषज्ञ, योजनाकार और रिटायर राजनयिक शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान के बीच संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। उसका प्रभाव पाकिस्तान की सरकार, प्रशासन के साथ ही आर्थिक नीतियों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। चीन भारत और पाक के विवाद में भी पाकिस्तान की तरफदारी के लिए बराबर रुचि दिखा रहा है। विशेषतौर पर पिछले साल से चीन ने कश्मीर के मसले पर तटस्थता से आगे बढ़ते हुए पाकिस्तान को अपना समर्थन दोगुना बढ़ा दिया है। चीन भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति बनाकर भारत को ऐसी स्थिति में लाना चाहता है, जिसमें उसे दो तरफा संघर्ष की स्थिति बनी दिखाई दे। इस रणनीति से भारत के संसाधन और ध्यान बंटा रहेगा और भारत के लिए मुसीबतें खड़ी रहेंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत-चीन सीमा बड़ा मुद्दा बना रहेगा। इस कारण चीन और भारत दोनों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रतिस्पद्र्धा बनी रहेगी। चीन अपने आर्थिक हितों के लिए समुद्र में भी ताकत को बढ़ा रहा है।ज्ञात हो कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव भूटान प्रमुख रूप से माने जाते हैं।
-एजेंसियां

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