अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बताया, भारतीय नौसेना के साथ संयुक्‍त अभ्‍यास कर रहा है यूएस

वॉशिंगटन। चीन सीमा पर तनातनी के बीच अमेरिका ने बताया है कि करीब 12 हजार अमेरिकी जवानों के साथ दक्षिण चीन सागर में अभ्‍यास करने के बाद उसकी सेना भारतीय नौसेना के साथ हिंद महासागर में संयुक्त अभ्यास कर रही है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर ने भारत के साथ अपने सैन्य संबंधों के बारे में बताते हुए कहा यह दर्शाता है कि मजबूत नौसैन्य सहयोग और मुक्त व खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता है।
अमेरिका रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं 21 वीं सदी के सभी महत्वपूर्ण रक्षा संबंधों में से एक भारत के साथ अपने बढ़ते रक्षा सहयोग को उजागर करना चाहता हूं। हमने पिछले नवंबर में अपना पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास किया।”
उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने आज कहा यूएसएस निमित्ज भारतीय नौसेना के साथ हिंद प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहा है। यह मजबूत नौसैन्य सहयोग और मुक्त व खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शा रहा है।”
इससे पहले, चीन के साथ तनातनी के बीच अमेरिका ने विवादित दक्षिण चीन सागर में सैन्य अभ्यास किया। यह अमेरिका का एक महीने में दूसरी बार बड़ा सैन्य अभ्यास था, जिसमें बड़े युद्धपोतों ने हिस्सा लिया। इस दौरान यूएसएस रोनाल्ड और यूएसएस निमित्ज वाहकों को भी शामिल किया गया। सीएनएन ने यूएस पैसिफिक फ्लीट के बयान का हवाला देते हुए बताया था, “करीब 12 हजार अमेरिकी जवानों, दो विमान वाहक और उनके एस्कॉर्टिंग क्रूजर और विध्वंसक के साथ शुक्रवार को दक्षिण चीन सागर में अभ्यास कर रहे थे।” बयान में कहा गया है कि दोनों वाहक, जिनके अंदर करीब 120 से अधिक विमान तैनात थे, वे लड़ाई को लेकर तत्परता और कुशलता बनाए रखने के लिए सामरिक हवाई रक्षा अभ्यास कर रहे थे।
यूएसएस रेगान में सवार नेवी लेफ्टिनेंट कमांडर सिएन ब्रोफी ने 8 जुलाई को कहा था कि प्रत्येक स्ट्राइक ग्रुप अपने संबंधित ऑपरेशनल टास्किंग पर है। चीन दक्षिण चीन सागर के 3.5 मिलियन में से 3.3 मिलियन स्क्वायर माइल्स पर अपना दावा करता है और क्षेत्र में अमेरिकी विमान वाहकों की मौजूदगी पर कड़ा ऐतराज जताया।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा, “अमेरिकी कार्यवाही का उद्देश्य दक्षिण चीन सागर में सैन्यीकरण को बढ़ाना और देशों के बीच खाई पैदा करना है। यह अंतत: क्षेत्र में शांति और स्थिरता को कम करेगा।”
-एजेंसियां

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