चीन की दादागिरी को खत्म करने के लिए अमेरिका और जापान ने बनाई नई रणनीति, कई शक्‍तिशाली देशों को आमंत्रित किया

टोक्‍यो। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दादागिरी को खत्म करने के लिए अमेरिका और जापान ने नई रणनीति बनाई है। समुद्र में चीनी चाल को खत्म करने के लिए अमेरिका और जापान ने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे शक्तिशाली देशों को दक्षिण चीन सागर में आमंत्रित किया है। उधर चीन भी तेजी से अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, जिसके जरिए वह अपनी समुद्री और क्षेत्रीय महत्वकांक्षा को पूरा करना चाहता है।
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भेज रहे युद्धपोत
2021 में यूरोपीय देश अपनी सामरिक रणनीति में बड़े पैमाने पर इंडो पैसिफिक क्षेत्र को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि आने वाले कुछ महीनों में ब्रिटेन विमानवाहक युद्धपोत क्वीन एलिजाबेथ और उसके स्ट्राइक ग्रुप को पूर्वी एशिया में तैनात करेगा। वहीं, फ्रांस जापान के पास अपना नौसैनिक युद्धपोत भेजने जा रहा है जबकि जर्मनी एक फ्रिगेट भेजेगा।
जर्मनी के साथ संबंध मजबूत कर रहा जापान
चीन पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका और जापान यूरोपीय देशों को भी साथ मिलाना चाहते हैं। जापानी रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने 15 दिसंबर को अपने जर्मन समकक्ष एनेग्रेट क्रैम्प-कर्रेनबॉयर के साथ एक ऑनलाइन बैठक में कहा था कि जापान में यूरोप के साथ रक्षा सहयोग के और अधिक विकास की क्षमता है। जिसके जवाब में क्रैम्प-कर्रेनबॉयर ने कहा कि इंडो-पैसिफिक में जो होता है, उससे जर्मनी और यूरोप भी प्रभावित होते हैं। हम इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित नौपरिवहन की सुरक्षा में सहयोग करना चाहते हैं।
दक्षिण चीन सागर में इन देशों से भिड़ा है चीन
दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन अपनी सैनिक गतिविधियों को लगातार बढ़ा रहा है। यही कारण है कि उसने इन दोनों सागरों में स्थित कई निर्जन द्वीपों पर अपने सैन्य अड्डों को स्थापित कर लिया है। चीन की जमीन कब्जाने की बढ़ती भूख के कारण उसका ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम के साथ भी विवाद है।
चीन के खिलाफ जंग को क्यों तैयार हुआ ब्रिटेन
ब्रिटेन और चीन के बीच हॉन्ग कॉन्ग को लेकर खींचतान मची हुई है। चीन ने जुलाई में हॉन्ग कॉन्ग के ऊपर जबरदस्ती राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को थोप दिया। जिसके बाद से चीन की विरोध करने वाले या लोकतंत्र की मांग करने वाले नेता और कार्यकर्ताओं को जेल की सलाखों में कैद कर दिया गया। चूंकि, हॉन्ग कॉन्ग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था। ब्रिटेन ने इस उपनिवेश को चीन को कुछ शर्तों के साथ सौंपा था। जब चीन ने सभी नियम और शर्तों का माखौल उड़ाते हुए हॉन्ग कॉन्ग में अपनी मनमानी शुरू कर दी तब ब्रिटेन ने भी चीन के खिलाफ अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप क्वीन एलिजाबेथ को तैनात करने का निर्णय लिया।
जर्मनी का युद्धपोत भी लगाएगा गश्त
जर्मनी भी चीन के बढ़ते विस्तारवाद पर लगाम लगाने के लिए हिंद महासागर और आसपास के इलाके में अपनी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहा है। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की उत्तराधिकारी समझी जाने वाली विदेश मंत्री अन्‍नग्रेट क्रांप ने कुछ दिनों पहले कहा था कि दुनिया की भलाई के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है। हमारा मानना है कि जर्मनी को इस क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ानी होगी। AKK के नाम से मशहूर अन्‍नग्रेट ने कहा क‍ि यूरोप चीन के आर्थिक अजेंडे और भूराजनीतिक रणनीति से पिछले साल पूरी तरह से वाफिक हो गया है। चीन जर्मनी का एक महत्‍वपूर्ण व्‍यापारिक साझीदार है और हमारा चीन के साथ मज‍बूत आर्थिक संबंध है जो दोनों ही देशों के हित में है।
-एजेंसियां

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