उर्दू साहित्यकार पद्म श्री शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी का निधन

इलाहाबाद। उर्दू साहित्यकार पद्म श्री शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी का निधन उनके इलाहाबाद स्थ‍ित घर पर हो गया। उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध कवि व लेखक शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी का 85 की उम्र में निधन हो गया है। बीते दिनों वह कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। लेकिन, इससे उबरने के बावजूद उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। तब डॉक्टरों ने उन्हें घर ले जाने की सलाह दी थी। शुक्रवार को एयर एंबुलेंस से बड़ी बेटी वर्जीनिया में प्रोफेसर मेहर अफशां और भतीजे महमूद गजाली नई दिल्ली से उन्हें लेकर इलाहाबाद पहुंचे थे लेकिन घर पहुंचने के तकरीबन 1 घंटे बाद ही 11:30 बजे उनकी सांसें थम गईं।

शम्सुर रहमान का जन्म 15 जनवरी 1935 को हुआ था। उदार परिवेश में पले शम्सुर रहमान ने पढ़ाई के बाद कई जगह नौकरी की। इसके बाद वह इलाहाबाद में शबखूं पत्रिका के संपादक रहे। उन्होंने उर्दू साहित्य को ‘कई चांद और थे सरे आसमां, ग़ालिब अफ़साने के हिमायत में, उर्दू का इब्तिदाई ज़माना आदि दिए हैं। शम्सुर रहमान को उर्दू आलोचना के टी.एस.एलियट के रूप में माना जाता है। सरस्वती सम्मान के अलावा उन्हें 1986 में उर्दू के लिए साहित्य अकादमी सम्मान भी दिया गया था।

उनृकी मृत्यु की खबर सुनकर न्याय मार्ग स्थित आवास पर करीबियों शुभचिंतकों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। उनके निजी सहायक अमीन अख्तर के मुताबिक शव यात्रा शाम 6:00 बजे अशोक नगर स्थित कब्रिस्तान के लिए रवाना होगी, जहां उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा।

अनेक पुरस्कारों से सम्मानित पद्मश्री फारूकी का जाना उर्दू अदब का बहुत बड़ा नुकसान है।

समीक्षक और सिद्धांतकार

इसके अलावा उन्होंने ‘शेर, गैर शेर और नस्त्र’, ‘गंजे सोख्ता’, ‘सवार और दूसरे अफसाने’, ‘जदीदियत कल और आज’ की रचना भी की है. फारुकी भारतीय कवि और उर्दू समीक्षक और सिद्धांतकार के तौर पर अपनी पहचान रखते है। उन्होंने साहित्य को नए आयाम दिए। इसके अलावा उन्होंने साहित्यिक आलोचना के वेस्टर्न सिद्धांतों को अपनाया और फिर उन्हें उर्दू साहित्य में अमलीजामा पहनाया।

अपने करियर में फारुकी ने भारतीय डाक सेवा के लिए भी काम किया है. हालांकि उन्होंने लेखन की शुरुआत 1960 में ही कर दी थी। इसके अलावा उन्होंने पोस्टमास्टर-जनरल और पोस्टल सर्विसेज बोर्ड, नई दिल्ली के मेंबर के रूप में भी अपनी सेवाएं दी. यहां तक की फारुकी अपनी साहित्यिक पत्रिका के संपादक भी थे। फारुकी ने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में कुछ वक्त तक प्रोफेसर के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी है।
– एजेंसी

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