पाकिस्तान में मौलवी पर बनी फ़िल्म Zindagi Tamasha पर हंगामा

पाकिस्तान में एक धार्मिक पार्टी के विरोध के बाद एक मौलवी के संघर्ष पर आधारित एक फ़िल्म Zindagi Tamasha रिलीज़ नहीं हो पाई. पाकिस्तान में  फ़िल्म Zindagi Tamasha आज शुक्रवार 24 जनवरी को रिलीज़ की जानी थी मगर इसपर रोक लगा दी गई है.

‘ज़िंदगी तमाशा’ नाम की इस फ़िल्म को पिछले साल बुसान इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में पुरस्कार मिल चुका है.

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) नाम की पार्टी का कहना है कि ये फ़िल्म लोगों को इस्लाम और पैग़ंबर से दूर कर सकती है. पार्टी ने साथ ही चेतावनी दी है कि इसके प्रदर्शन से हिंसा भड़क सकती है.

‘ज़िंदगी तमाशा’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसका एक शादी में डांस करने वाला वीडियो वायरल हो जाता है जिसके बाद उसका जीवन बदल जाता है.
हालाँकि, फ़िल्म के निर्देशक सरमत ख़ूसट का कहना है कि उनका इरादा कभी किसी को नाराज़ करने का नहीं रहा.

रोक से पहले पाकिस्तान के जाने-माने निर्देशक सरमत खूसट ने कहा था​ कि उन्हें, उनके परिवार और फिल्म की टीम से जुड़े लोगों को डराया जा रहा है और धमकी दी जा रही है.

स्थानीय मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के एक प्रवक्ता का कहना है कि यह फ़िल्म “ईश निंदा” करती है.

पाकिस्तान में ईश निंदा का इलज़ाम एक बेहद संवेदनशील मामला है और ऐसे कई विवादास्पद मामले दुनिया भर में चर्चा में रहे हैं.
पिछले साल प्रतिष्ठित बुसान इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टीवल में ‘ज़िंदगी तमाशा’ को सर्वश्रेष्ठ फ़िक्शन का पुरस्कार मिला था.

24 जनवरी को पाकिस्तान में रिलीज़ से पहले फिल्म का एक ट्रेलर जारी किया गया था जिसमें एक दाढ़ी वाला व्यक्ति नजर आ रहा है जो नात (धार्मिक कविताएँ) सुनाता है.

फ़िल्म को प्रांतीय बोर्डों के साथ-साथ देश के मुख्य सेंसर बोर्ड से मंज़ूरी मिलने के बावजूद इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई.

पिछले सप्ताह खूसट ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें शिकायत और धमकी भरे फोन कॉल किए जा रहे हैं और फिल्म प्रदर्शित नहीं करने पर विचार करने को कहा जा रहा है.

इसके बाद टीएलपी ने फिल्म के प्रदर्शन का विरोध करने के लिए देश भर में बड़े पैमाने पर रैलियों का भी आयोजन किया.

समूह ने एक बयान में कहा, “फिल्म में नात-वाचन करने वाले का चरित्र-चित्रण ऐसा है कि यह जनता को आहत कर सकता है और उन्हें इस्लाम और पैग़ंबर मोहम्मद से विमुख कर सकता है.”

बयान में कहा गया था, “ऐसे में यह फिल्म प्रदर्शित नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह पाकिस्तान के मुसलमानों के लिए गंभीर चुनौती हो सकती है.”

सूचना और प्रसारण पर प्रधानमंत्री की सलाहकार फ़िरदौस आशिक अवान ने मंगलवार को ट्वीट किया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म निर्माताओं को फिल्म रिलीज़ नहीं करने का निर्देश दिया है और मामले पर विचार के लिए काउंसिल ऑफ़ इस्लामिक विचारधारा पर विचार करने वाली समिति से संपर्क करने का निर्णय लिया गया है.

यह एक सलाह देने वाली प्रभावशाली संस्था है लेकिन इसके पास कोई बाध्यकारी अधिकार नहीं है. इस घोषणा के बाद टीएलपी ने देशव्यापी विरोध का अपना आह्वान वापस ले लिया.

फ़िल्म का विरोध कौन कर रहा है?

टीएलपी, तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह (टीएलवाईआरए) नामक संगठन की एक राजनीतिक शाखा है जिसने पूर्व में ईश निंदा के मुद्दों पर विरोध करने के लिए भारी भीड़ जमा की थी.

खादिम हुसैन रिज़वी की अगुवाई में एक पुलिसकर्मी मुमताज क़ादरी की फांसी का विरोध करने के कारण यह संगठन प्रमुखता से सामने आया. कादरी ने 2011 में ईश निंदा क़ानून के ख़िलाफ़ बोलने के लिए पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर दी थी.

पाकिस्तानी क़ानून के ​तहत, पैग़ंबर मोहम्मद का अपमान करने का दोषी पाए जाने पर मौत की सज़ा दी जा सकती है.

टीएलपी ने 2017 में उस वक्त अपनी ताक़त दिखाई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ सरकार के ख़िलाफ़ कई सप्ताह तक प्रदर्शन कर इसने देश की राजधानी में कामकाज ठप्प कर दिया था.

हालांकि, पिछले साल इसके प्रभाव में उस वक़्त कुछ कमी देखने को मिली जब एक ईसाई महिला आसिया बीबी की रिहाई के ख़िलाफ़ हिंसक प्रदर्शन करने पर खादिम हुसैन रिज़वी सहित संगठन के शीर्ष नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

– बीबीसी

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