यूपी की सरकारी मशीनरी सुधरने को तैयार नहीं, अब निलंबन की तैयारी

लखनऊ। लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लगी सरकारी मशीनरी ही चुनावी गणित बिगाड़ने में जुटी है। मतदान की ट्रेनिंग से लेकर बूथों की तैयारियों तक में जगह-जगह अफसरों की लापरवाही सामने आ रही है। जिला निर्वाचन अधिकारी लापरवाह अफसरों को नोटिस पर नोटिस तामील कर रहे हैं, लेकिन वे सुधरने को तैयार नहीं हैं। अब निर्वाचन कार्य में लापरवाह अफसरों को सूचीबद्ध कर उनके निलंबन की कवायद शुरू की जा रही है।
चुनाव का ऐलान होने से पहले ही जिला निर्वाचन अधिकारियों ने मतदान तक के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय कर दी थी। लेकिन कर्मचारियों ने मतदान करवाने के लिए शुरू किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम से ही रंग दिखाना शुरू कर दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जहां तमाम कर्मचारी अनुपस्थित मिल रहे हैं, वहीं अनेक कर्मचारियों ने प्रॉपर ट्रेनिंग ही नहीं ली है, नतीजतन ट्रेनिंग लेने वाले कर्मचारी भी प्रशिक्षण के बाद करवाई गई परीक्षा में फेल हो रहे हैं।
ये ऐसे कर्मचारी थे, जिन्हें खुद प्रशिक्षण लेने के बाद दूसरे कर्मचारियों को ट्रेनिंग देनी था। लापरवाही बरतने पर 23 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है और फेल हुए ट्रेनरों को सजा के तौर पर दोबारा ट्रेनिंग भी करवाई जा रही है।
प्रशिक्षण के बाद भी निर्वाचन कार्य में लगे अफसरों व कर्मचारियों की लापरवाही जारी है। इसका भेद तब खुला जब पिछले तीन दिन से जोनल व सेक्टर मैजिस्ट्रेट की टीमों ने बूथों का जायजा लिया। पड़ताल में पता चला कि सभी ब्लॉकों में बूथों की हालत बदतर है।
पुलिसकर्मियों को रिलीव नहीं कर रहे कई अफसर
चुनाव आयोग के निर्देश के बाद पुलिस महकमे के भी कई विभागों से पुलिसकर्मियों को रिलीव नहीं किया गया है। इनमें ईओडब्ल्यू, एंटी करप्शन सेल और एसटीएफ समेत कई विंग शामिल हैं।
सूत्रों का कहना है कि यहां तैनात पुलिसकर्मियों को चुनाव आयोग के निर्देश पर दूसरे जिलों में ट्रांसफर किया गया है लेकिन विभागाध्यक्ष पुलिसकर्मियों को रिलीव नहीं कर रहे। इसकी वजह से दूसरे जिलों में पुलिसकर्मियों के तैनाती के समीकरण बिगड़ सकते हैं।
-एजेंसियां

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