प्रदेश के पहले रियल एस्टेट सम्मेलन में जम्‍मू पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी

जम्मू स्थित कन्वेंशन सेंटर में प्रदेश का पहला पहला रियल एस्टेट सम्मेलन शुरू हो गया है। इसका शुभारंभ केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद प्रदेश में पहली बार रियल एस्टेट निवेशक सम्मेलन होने जा रहा है।
सोमवार को रियल एस्टेट सम्मेलन के शुरुआत में शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव धीरज गुप्ता ने कार्यक्रम के बारे में बताया। मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है। वर्ष 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में काफी बदलाव आया है।

कोरोना महामारी के बावजूद जेडीपी विकास दर सकारात्मक रही। जम्मू-कश्मीर में निवेश आकर्षित करने के लिहाज से सम्मेलन को बेहद अहम माना जा रहा है। खास बात है कि रियल एस्टेट सम्मेलन में किफायती दरों में आवास के अलावा होटल, वित्त, शिक्षा, पर्यटन, कला एवं संस्कृति समेत अन्य सेक्टर से जुड़े निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

सम्मेलन में आवास एवं शहरी विकास विभाग और रियल एस्टेट कंपनियों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। टेनेंसी एक्ट को जम्मू-कश्मीर में लागू करने के अलावा हाउसिंग बोर्ड और जेडीए के अंतर्गत कॉलोनियों के लिए हाउसिंग पोर्टल की शुरूआत भी होगी। केंद्रीय व प्रदेश के कर्मचारियों के लिए आवासीय कॉलोनियों के निर्माण के लिए भी एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे।

कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर सरकार ने आवास और वाणिज्यिक परियोजनाओं के विकास के लिए 18,300 करोड़ रुपये के 39 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के बाद देश के रियल एस्टेट निवेशकों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में कारोबार का द्वार खुल गया है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन में एमओयू पर हस्ताक्षर को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह केंद्रशासित प्रदेश के परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही रियल्टी कानून रेरा लागू कर दिया है और यूटी में मॉडल टेनेंसी एक्ट को अपनाया है।

उन्होंने जोर दिया कि सरकार संपत्तियों के पंजीकरण पर स्टांप शुल्क कम करने और परियोजनाओं के तेजी से अनुमोदन के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम स्थापित करने पर विचार करेगी।
रोजगार के द्वार पैदा होंगे
सिन्हा ने कहा कि इस करार से जम्मू-कश्मीर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। घोषणा की कि इसी तरह का एक रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन अगले साल 21-22 मई को श्रीनगर में आयोजित किया जाएगा। विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की जमीन हड़पने के विपक्षी दलों के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा कि यह डर पैदा करने और लोगों को भड़काने का प्रयास है।

कोई जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं
उन्होंने कहा कि कोई जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं होगा। उपराज्यपाल ने कहा कि रियल एस्टेट डेवलपर्स को यूटी के स्थानीय बिल्डरों के साथ साझेदारी करने के लिए कहा गया है। सिन्हा ने कहा कि सरकार ने परियोजनाओं के विकास के लिए 6,000 एकड़ भूमि की पहचान की है। इसके अलावा कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव के लिए भी नियम बनाए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार नई औद्योगिक नीति के तहत परियोजनाओं के विकास के लिए अपनी जमीन भी देगी। जिन लोगों के पास जमीन है, उन्हें यह तय करने की आजादी होनी चाहिए कि वह इसका इस्तेमाल कैसे करना चाहते हैं।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *