JEE और NEET को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दिया बयान

नई दिल्‍ली। JEE और NEET को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अहम बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कोरोना वायरस की महामारी के बीच हमारे लिए छात्रों की सुरक्षा और करियर अहम है। इन परीक्षाओं को पूर्व में दो बार स्‍थगित किया गया। अब अधिकांश छात्र और उनके अभिभावक चाहते हैं कि परीक्षा निर्धारित समय पर आयोजिक हो। निशंक ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में यह भी कहा कि हम छात्रों का एकेडमिक वर्ष खराब नहीं कर सकते। उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर बेवजह विरोध और राजनीति नहीं करने का आग्रह किया है।
केंद्रीय मंत्री निशंक ने बताया कि 80 फीसदी स्‍टूडेंट JEE-NEET परीक्षा के एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं। JEE के लिए 8.58 लाख में से 7.50 लाख के आसपास एडमिट कार्ड डाउनलोड हो गए हैं, इसी तरह NEET के लिए 15.97 लाख में से, 10 लाख से अधिक छात्रों ने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिया है। उन्‍होंने बताया कि ज्‍यादातर मामलों में छात्रों की सुविधा के लिए परीक्षा केंद्रों को कई बार बदला गया है।
उन्होंने कहा 99% प्रतिशत स्‍टूडेंट्स को उनकी पसंद का केंद्र मिला है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इन परीक्षाओं के लिए दिशानिर्देश और SOP तैयार किया है। इसके साथ ही बेहतर समन्वय के लिए एनटीए और राज्यों के बीच लगातार बैठक हो रही है। बता दें कि बाढ़ से प्रभावित राज्यों के छात्र लंबे अरसे से परीक्षाओं की तिथि और आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक दलों ने भी इसको मुद्दा बनाकर राजनीति शुरू कर दी है।
परीक्षाओं के खिलाफ लामबंद है विपक्ष
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी परीक्षा को टालने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि परिस्थिति सामान्य होने तक परीक्षा नहीं करवाई जानी चाहिए। उधर, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बात कर राज्य में कोविड-19 और बाढ़ से उत्पन्न हालात के मद्देनजर नीट और जेईई की परीक्षाएं स्थगित करने का अनुरोध किया।
ये चाहते हैं तय समय पर हो परीक्षाएं
तमाम शिक्षाविदों ने परीक्षा सितंबर में कराने की मांग की है। उनका मानना है कि यह छात्रों के हित में हैं। आईआईटी दिल्ली के निदेशक द्वारा पीएम मोदी को चिट्ठी लिखे जाने के बाद अब तक करीब 150 शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर परीक्षा तय समय पर ही करवाने की मांग की है और विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक एजेंडा करार दिया है। गुजरात के शिक्षा मंत्री का कहना है हाल ही में हुई गुजरात संयुक्त प्रवेश परीक्षा में 90 फीसदी छात्रों ने हिस्सा लिया जिससे जाहिर है कि छात्र पढ़ना चाहते हैं। केवल एक छोटा सा वर्ग इसका विरोध कर रहा है।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *