अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के मद्देनजर भारत ने तैनात किए दो युद्धपोत

नई दिल्‍ली। ईरान द्वारा अमेरिका का जासूसी ड्रोन मार गिराए जाने के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ईरान पर हमला करने का आदेश दे दिया। हालांकि, अफसरों से चर्चा के बाद ट्रम्प ने अपना फैसला बदला। इस बीच सतर्कता के लिहाज से भारत ने भी इस क्षेत्र में दो युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। भारत का 40% ऊर्जा आयात इसी जल मार्ग पर निर्भर है।
नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डी के शर्मा के मुताबिक भारत ने आईएनएस चेन्नई और आईएनएस सुनयना के अलावा समुद्रीय इलाकों पर नजर रखने वाले एयरक्राफ्ट को भी तैनात किया है। यह निर्णय समुद्री सुरक्षा कारणों के मद्देनजर लिया गया। ये युद्धपोत भारतीय व्यापारिक जहाजों और साझेदारों के बीच समन्वय का काम करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फारस की खाड़ी को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग माना जाता है। दुनियाभर में एनर्जी का अधिकांश हिस्सा इसी मार्ग से सप्लाई होता है।
जंग के लिए तैयार थे अमेरिकी जेट्स और युद्धपोत
इससे पहले भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 12.30 बजे अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने की आशंका जताई गई। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में ट्रम्प प्रशासन के अधिकारी का हवाला देते हुए कहा गया कि लड़ाकू विमान और जंगी जहाज हमला करने की स्थिति में थे लेकिन आदेश को रद्द कर दिया गया। इससे पहले ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी थी कि जासूसी ड्रोन को गिराकर उसने बड़ी गलती की है। ईरान ने बुधवार को हार्मोज्गान प्रांत में अमेरिका के जासूसी ड्रोन को मार गिराया था।
ईरान ने 1250 करोड़ रुपए का ड्रोन मार गिराया
अमेरिका ने शुक्रवार को अपने विमानों को ईरान और ओमान की खाड़ी से होकर गुजरने पर रोक लगा दी। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने यह घोषणा की। जिस ड्रोन को ईरान ने मार गिराया, उसकी कीमत करीब 1250 करोड़ रुपए थी। इसके पंख बोइंग 737 जेटलाइनर से भी बड़े थे। करीब 30 साल पहले अमेरिका की नेवी ने भी ईरान के यात्री विमान को मार गिराया था।
ईरान की खाड़ी के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ी
एफएए ने कहा कि ईरान की खाड़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां और राजनीतिक तनाव बढ़ा है लिहाजा इस इलाके में विमानों के परिचालन में बाधा आएगी। अमेरिका का कहना है कि जिस ड्रोन को ईरान ने 19 जून को मार गिराया, वह उसके हवाई क्षेत्र में नहीं था। ड्रोन ओमान की खाड़ी के ऊपर नागरिक वायुमार्गों के आसपास के क्षेत्र में था। ईरान की वायुसेना ने कहा कि ड्रोन ईरान के हवाईक्षेत्र में प्रवेश कर चुका था।
तेल की कीमतों में इजाफा
ट्रम्प की चेतावनी के बाद अमेरिका में तेल की कीमतों में गुरुवार को 6% से अधिक की बढ़ोतरी हुई। न्यूयॉर्क में गुरुवार सुबह से ही तेल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई। यूरोप में क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 5% बढ़ गई। इसके साथ अमेरिका की यूनाइटेड एयरलाइंस ने न्यूजर्सी के नेवार्क से मुंबई के बीच उड़ानों को निलंबित कर दिया। मुंबई के लिए उड़ानें ईरान के हवाईमार्ग से जाती हैं। एयरलाइंस ने कहा कि ईरान द्वारा ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। हालांकि यह नहीं बताया गया कि उड़ानें कब तक निलंबित रहेंगी।
‘अमेरिका अन्य देशों पर दबाव बनाने की कोशिश करता है’
समाचार एजेंसी आईआरएनए ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी के हवाले से गुरुवार को कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच कोई सैन्य टकराव नहीं होगा, क्योंकि युद्ध का कोई कारण नहीं है। दूसरे देशों पर आरोप लगाना अमेरिकी अधिकारियों के लिए एक आम बात है। वे अन्य देशों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।
दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव
यह घटना ऐसे वक्त हुई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। पिछले साल अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था। अमेरिका, ईरान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है।
नया परमाणु समझौता लागू किया जाए: ईरान
ईरान ने ऐलान किया था कि वह अब 2015 में हुए परमाणु समझौते की कुछ शर्तों को नहीं मानेगा। राष्ट्रपति हसन रुहानी ने यूरोप से कहा था कि अगर सात जुलाई तक नया परमाणु समझौता लागू नहीं किया जाता है तो वह अपना यूरेनियम भंडार बढ़ाता रहेगा।
अमेरिका ने मध्यपूर्व में एक हजार अतिरिक्त सैनिक तैनात किए
13 जून को अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों में हुए हमले से जुड़ी कुछ सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं। हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। इन सब के बीच अमेरिका ने मध्यपूर्व में एक हजार अतिरिक्त सैनिकों को भेजा है।
-एजेंसियों

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