हाॅकी के जादूगर Major Dhyanchand की पुण्य तिथि आज

हाकी के सर्वश्रेष्ठ सितारे Major Dhyanchand की 3 दिसंबर 1979 में मृत्यु बीमारी के कारण हो गयी थी। हम इस महान खिलाड़ी की पुण्य तिथि पर सभी देशवासियों की तरफ से शत शत नमन करते है। आस्ट्रिया की राजधानी विएना में चार हाकी स्टिक पकड़े चार हाथों वाली उनकी मूर्ति स्थापित है जो उनके खेल कौशल को दर्शाती है। वियना की यह मूर्ति जिसके चार हाथ और चार स्टिक हैं, जैसे वो हाॅकी के देवता हों। मेजर ध्यानचन्द का कहना था कि मेरा देश क्या देता है मुझे जरूरी नही, पर मेरा फर्ज है मैं देश को क्या देता हूँ। इस उच्च जज्बे के धनी दिलो बसने वाले मेजर ध्यानचंद सदैव देशवासियों तथा खेल प्रेमियों के दिलों में अमर रहेंगे।

दुनिया भर में ‘हाकी के जादूगर’ के नाम से प्रसिद्ध भारत के महानतम हाकी खिलाड़ी ‘मेजर ध्यानचंद’ के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए उनके जन्मदिन 29 अगस्त को हर वर्ष भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। खेल दिवस हार-जीत की चिंता किए बिना खेल की भावना के अन्तर्गत सहयोग, अनुशासन, एकाग्रता तथा चुस्ती-फूर्ती व दमखम को बढ़ाता है। खेल में खिलाड़ियों को पूरी तैयारी के साथ प्रतिभागिता महत्वपूर्ण है और अन्य बातें बाद में आती हैं। खेल दिवस का मुख्य उद्देश्य खेलों में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और हर आयु वर्ग और लिंग के लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

इस दिन राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति देश के लिए खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित करते हैं, जिसमें राजीव गांधी खेल रत्न, ध्यानचंद पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कारों के अलावा तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार प्रमुख हैं। इस अवसर पर खिलाड़ियों के साथ-साथ उनकी प्रतिभा निखारने वाले कोचों को भी सम्मानित किया जाता है। इसके अतिरिक्त देश के लगभग सभी स्कूल, कालेज और खेल संस्थान ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के दिन अपना सालाना खेल समारोह आयोजित करते हैं।

ऐतिहासिक सफलता – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विगत वर्ष सभी देशवासियों को बधाई देते हुए कहा था कि वर्ष 2018 खेल जगत के लिए बहुत अच्छा रहा है, भारतीय एथलीटों ने एशियाई खेलों 2018 और राष्ट्रमंडल खेलों समेत विभिन्न टूर्नामेंटों में उत्कृष्टता हासिल की है। 25 अगस्त 2019 का दिन भारत की दो बेटियों के लिए स्वर्णिम रहा। पीवी सिंधु ने बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में महिलाओं का एकल खिताब जीत कर इतिहास रच दिया। वह इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गई हैं। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने अपने सन्देश में कहा है कि बीडब्लूएफ विश्व चैंपियनशिप जीतने के लिए पीवी सिंधु को बधाई। यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने सन्देश में कहा है कि आश्चर्यजनक रूप से प्रतिभाशाली पीवी सिंधु ने हमें गर्व महसूस कराया है। उनका जुनून और लगन प्रेरणादायक है। पीवी सिंधु, भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने इस ऐतिहासिक अवसर को इन शब्दों में बयां किया कि वह वास्तव में विशेष क्षण था जब तिरंगा लहराया जा रहा था और राष्ट्रगान बज रहा था। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मेरे पास बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं क्योंकि आप अपने देश के लिए खेलते हैं और निश्चित तौर पर मेरे लिए गौरवशाली क्षण है।

इसी दिन स्पेन की राजधानी मैड्रिड में आयोजित विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप के रिकर्व कैडेट वर्ग में भारत के झारखण्ड राज्य की कोमालिका बारी ने स्वर्ण पदक जीता। उसने एकतरफा फाइनल में जापान की उच्च रैंकिग वाली सोनोदा वाका को हराया। विश्व स्तर की स्वर्णिम सफलता प्राप्त पीवी सिंधु तथा कोमालिका बारी को हम सभी देशवासियों की ओर से हार्दिक बधाइयाँ।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त पर ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ चलाने की घोषणा की। श्री मोदी ने कहा कि 29 अगस्त को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर हम देशभर में फिट इंडिया मूवमेंट की शुरूआत करने वाले हैं। खुद को फिट रखना है। देश को फिट बनाना है। हर बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिला सब के लिए यह रोचक अभियान होगा। प्रधानमंत्री के फिट इडिया अभियान से देश के सभी विद्यालय जुडें़गे। इस दिन छात्र छात्राओं को न सिर्फ प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सजीव प्रसारण दिखाया गया, बल्कि बच्चों एवं युवाओं के खेलकूद के कार्यक्रम भी हुए।

खेल दिवस पर हम क्रिकेट के इतिहास में विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाने वाले महानतम सचिन तेंदुलकर को भी सलाम करते हैं। भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले वह सर्वप्रथम खिलाड़ी और सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले क्रिकेट खिलाड़ी हैं। सन् 2008 में वे पद्म विभूषण से भी पुरस्कृत किये जा चुके हैं।

प्रसिद्ध हाकी खिलाड़ी मेजर ध्यान चंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। उन्हें व्यापक रूप से सबसे बड़ा फील्ड हाकी खिलाड़ी माना जाता है। उन्होंने 16 साल की आयु में सेना में शामिल होने के बाद ही हाकी खेलना शुरू कर दिया था। उन्हें अपने शानदार गेंद नियंत्रण के लिए प्रसिद्ध तौर पर ‘द विजार्ड’ के रूप में जाना जाता था और उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान सर्वाधिक 400 से अधिक गोल किए थे। मेजर ध्यानचंद ने हमारे देश का नाम खेल में अपने उत्तम प्रदर्शन द्वारा बहुत ऊँचा किया था।

इस दिवस को मनाने के पीछे एक उद्देश्य यह भी हैं कि हम अपने देश के युवाओं में खेल को अपना करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर पायें और उनके अंदर ये भावना उत्पन्न कर पायें, कि वे अपने खेल के उम्दा प्रदर्शन के द्वारा खुद की तरक्की तो कर ही सकते हैं, साथ ही साथ अपने अच्छे खेल प्रदर्शन से देश का नाम भी वे ऊँचा करेंगे और राष्ट्रीय गौरव भी बढाएँगे।

हाॅकी में महारत के चलते जर्मनी का तानाशाह रूडोल्फ हिटलर भी मेजर ध्यानचंद का मुरीद था और उसने मेजर से जर्मनी के लिए खेलने की पेशकश की थी। उनके शानदार खेल से विरोधियों को उनकी हाॅकी स्टिक में चुंबक होने की आशंका थी। हाॅलैंड में लोगों ने उनकी हाॅकी स्टिक तुड़वा कर देखी थी कि कहीं उसमें चुम्बक तो नहीं लगा है। जापान के लोगों को अंदेशा था कि उन्होंने अपनी स्टिक में गोंद लगा रखी है। एक बार उन्होंने जूते उतारे और नंगे पाॅव खेलने लगे, इसके बाद गोलों की झड़ी लग गई। एक बार जर्मनी गोलकीपर की हाॅकी ध्यानचंद के मुंह पर लगी और दांत टूट गया लेकिन वो खेलते रहे।

मेजर ध्यानचंद में अपने खेल हाकी के हुनर की अद्वितीय क्षमताएं थी। अगर ये कहा जायें कि उन्होंने अपने खेल के द्वारा देश में हाकी खेल को एक अलग और खास मुकाम दिलाया, तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मेजर ध्यानचंद अपनी हाकी स्टिक के साथ खेल के मैदान में जैसे कोई जादू करते थे और खेल जीता देते थे। उन्होंने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरूआत सन 1926 में की और अपनी कप्तानी में उन्होंने सन् 1928, सन् 1932 और सन् 1936 में देश को स्वर्ण पदक हाकी में जिताये थे।

यह एक जग जाहिर बात हैं कि जिस समय मेजर ध्यानचंद भारत के लिए हाकी खेला करते थे, वह समय भारतीय हाकी प्रदर्शन का और राष्ट्रीय खेलों तथा इंडियन नेशनल स्पोर्ट्स का भी स्वर्ण युग था। इस महान खिलाड़ी ने अपने खेल द्वारा सन् 1948 तक अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, इस समय उनकी आयु 42 वर्ष थी। मेजर ध्यानचंद चाहे खेल के मैदान में हो अथवा बाहर, वे हमेशा एक अच्छे इंसान रहें। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया जो कि हमारे देश का तीसरा सबसे बड़ा सिविलियन अवार्ड है।

2022 में चीन के हांगझोऊ में 29वें एशियाई खेल 10 से 25 सितंबर के बीच आयोजित किए जाएंगे। खबरों के ओलम्पिक चीन की ओलम्पिक समिति और ओलिंपिक काउंसिल आफ एशिया के बीच करार हो गया है। 2022 के विंटर ओलिंपिक्स गेम्स भी चीन में ही होने हैं। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ने 2022 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों का मेजबान बर्मिंघम को घोषित किया है। इंग्लैण्ड के बर्मिघम शहर में 2022 राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन 27 जुलाई, 2022 से 7 अगस्त, 2022 तक होगा। इन दोनों खेलों में भी सर्वक्षेष्ठ प्रदर्शन करने की रणनीति हमें बनानी चाहिए।

हमें अपने देश में स्कूल स्तरों पर अधिक से अधिक खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन करके बच्चों की खेल प्रतिभा को निखारना चाहिए। सरकार को उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए धन तथा खेल के मैदान शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सर्वसुलभ कराना चाहिए। ओलम्पिक गेम्स 2020, एशियन गेम्स 2022, राष्ट्रमंडल खेल 2022 आदि ऐसे खेलों के चयन के दौरान कोई भी भेदभाव, आरक्षण और पक्षपातपूर्ण विचार नहीं होना चाहिए। खिलाड़ी की योग्यता एकमात्र उसके खेल से आंकी जानी चाहिए। भारत के हर खेल को क्रिकेट की तरह प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि खिलाड़ी पूरे मनोयोग तथा भरपूर उत्साह से अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन कर सके।

भारतीय खिलाड़ियांे ने 30 ओलम्पिक खेलों में अब तक कुल 9 गोल्ड, 7 सिल्वर और 12 कास्य पदक जीते और भारत को विश्व खेल जगत में गौरवान्वित किया है। भारत का अगला लक्ष्य टोक्यो में 24 जुलाई से 9 अगस्त, 2020 तक आयोजित होने वाले अगले ओलम्पिक खेल में खेल भावना के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का होना चाहिए। अगले ओलम्पिक में भारतीय टीम विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लगभग 130 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करेगी। विजेता खिलाड़ी विश्व खेल जगत में अपने-अपने देश का नाम गौरवान्वित करते हंै। ओलम्पिक पदक विजेता इस बात को वैश्विक स्तर पर प्रमाणित करते हैं कि उनके देश में खेल को कितना महत्व दिया जाता है। सरकार के साथ ही निजी संस्थानों को भी यह सोचना है कि विश्व खेल जगत में भारत का नाम रोशन करने में वे क्या योगदान कर सकते हैं? जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता का मूल मंत्र व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति, अटूट विश्वास एवं एकनिष्ठ प्रयास है।

युद्धों की तैयारी से जनता का टेक्स का पैसा बचाकर सर्वसुलभ शिक्षा, खेलों के विकास तथा सभी के रहने के लिए आवास उपलब्ध कराना चाहिए। हमें अपने मानव संसाधन भूख, गरीबी, कुपोषण तथा बेरोजगारी से लड़ने में लगाना चाहिए। युद्धों से बचे इस पैसे को प्रत्येक वोटर को वोटरशिप के रूप में वितरित करना चाहिए। जगत गुरू भारत को वैश्विक स्तर पर हर क्षेत्र में अग्रणी बनना है ताकि शक्तिशाली भारत अपनी संस्कृति के अनुरूप सारी वसुधा को कुटुम्ब बना सके। अर्थात वीटो पाॅवर रहित तथा युद्धरहित वैश्विक लोकतांत्रिक तथा न्यायपूर्ण व्यवस्था का गठन कर सके। संसार को एक विशाल खेल के मैदान की तरह समझना चाहिए। कब्र में जाने के पूर्व हमें खेल की भावना से अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन विश्व शान्ति, विश्व एकता तथा विश्व बन्धुत्व के लिए समर्पित करना चाहिए। हर कीमत पर सदैव मानवता की जीत होनी चाहिए।
– प्रदीप कुमार सिंह, लेखक
विश्व परिवर्तन मिशन, लखनऊ

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