भागवत कथा में आज, दक्ष ने यज्ञ में क‍िया भगवान शिव का अपमान

आगरा। जड़भरत ऋषि स्वायंभुव मनु वंशी ऋषभदेव के पुत्र थे। इनके नाम से ही आर्यावर्त का नाम भारत नाम पड़ा। इन्होंने शासन करने के बाद राजपाट पुत्रों को सौंपकर वानप्रस्थ आश्रम ग्रहण किया तथा भगवान की भक्ति में जीवन बिताने लगे। ये कहना था बम्बई वाली बगीची स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर चल रही श्रीमद भागवतकथा ज्ञान यज्ञ में व्यासपीठ से आचार्य सुभाषचंद्र शास्त्री का । कथा मे तीसरे दिन रविवार को जड़भरत, दक्ष प्रजापति, प्रह्लाद चरित्र, नरसिंह अवतार व नरकलोक का वर्णन किया गया ।

व्यास आचार्य सुभाषचंद्र शास्त्री ने कहा कि राजा दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उसमें पहुंची दक्ष की पुत्री सती के समक्ष भगवान शिव का अपमान करने के फलस्वरूप सती ने दक्ष का यज्ञ भंग करने के लिए अपनी स्वयं की आहुति यज्ञ मे दे दी। कथा के मुख्य यजमान जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी व ह्रदेश चतुर्वेदी रहे। सोमवार को वामन अवतार व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन किया जायेगा । इस अवसर पर प्रमुख रूप से महंत प्रेमप्रकाश गौड़, सपना चतुर्वेदी, शोभा यादव, तृप्ति चतुर्वेदी, डॉ० कुसुम चतुर्वेदी, डॉ० एनके चतुर्वेदी, राकेश यादव, डॉ० शिशिर चतुर्वेदी, अशोक शर्मा, डॉ० एनके यादव, निशांत चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे ।

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