समय की मांग: आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों महिलाएं

महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों, यह समय की मांग है। इसके लिए जरूरी है ऐसी प्लानिंग, जो न केवल संकट के समय काम आए बल्कि परिवार के दूसरे सदस्यों को भी संकट से निकालने में मदद करें।
जानें, उम्र के अलग-अलग मोड़ की फाइनैंशनल प्लानिंग, जो आपको बनाएंगी मजबूत और आत्मनिर्भर।
अगर आपने अभी-अभी नौकरी शुरू की है
पहली नौकरी सबसे खास होती है क्योंकि इसी से फाइनैंशल आजादी की शुरुआत होती है। इस नई-नई मिली फाइनैंशल आजादी के साथ खर्च करने की इच्छा भी जाग उठती है, जिसकी वजह से फ्यूचर की फाइनैंशल प्लानिंग पीछे रह जाती है इसलिए अगर आप 20 की उम्र से ही फाइनैंशल प्लानिंग शुरू कर देंगी तो आगे चलकर आपको बड़ी से बड़ी फाइनैंशल जिम्मेदारियां संभालने में काफी आसानी होगी। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखें।
इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ाएं कदम: सेविंग और इन्वेस्टिंग, फाइनैंशल प्लानिंग के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। जहां एक तरफ सेविंग करने से आपके हाथ में पैसे आते हैं, वहीं दूसरी तरफ इन्वेस्टमेंट से आपके पैसे को बढ़ने का मौका मिलता है। ऐसे में जरूरी है कि पैसा कमाना शुरू करते ही पैसे को इन्वेस्टमेंट में भी लगाएं। मार्केट में अनगिनत इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस मौजूद हैं, इसलिए अच्छी तरह सोच-समझकर कोई ऑप्शन चुनना चाहिए।

बजट प्लान करें: जोश में आकर कोई खरीदारी करने से बचें। एक ऐसा बजट प्लान तैयार करने की कोशिश करें, जो पैसे बचाने में आपकी मदद कर सके। अपनी आमदनी और खर्च को अलग करने से आपको अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सैलरी मिलते ही कुछ पैसे जरूरी चीजों, सेविंग्स, कर्ज और अचानक आने वाली जरूरतों के लिए रख दें।

फ्यूचर की सोचें: आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने फ्यूचर को सुरक्षित करना जरूरी है। इंश्योरेंस खरीदना एक ऐसा ही बुद्धिमानी वाला कदम है, जो फाइनैंशल इमर्जेंसी से आपकी रक्षा करेगा। एक निश्चित वेतन मिलना शुरू होने के साथ ही आपको एक टर्म इंश्योरेंस खरीद लेना चाहिए। एक टर्म प्लान, इंश्योर्ड व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिवार के लिए उसके इनकम की कमी को पूरा करने का काम करता है। इसके अलावा एक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान भी लेकर रख लेना चाहिए, जो एक इमर्जेंसी में बढ़ते इलाज के खर्च से निपटने में आपकी मदद करेगा।

इमर्जेंसी के लिए खुद को तैयार करें: इमर्जेंसी बिन बताए आती है। नौकरी छूटने या मेडिकल इमर्जेंसी जैसे बुरे दिनों के लिए अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा सेव करके रखना हमेशा बेहतर होता है। एक इमर्जेंसी फंड आपको अपने रोजमर्रा की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा और आपको अपनी फाइनैंशल स्ट्रेटजी पर फिर से काम करने का समय भी देगा।

अपना लोन चुकाएं: आपको काम करना शुरू करते ही अपना लोन (जैसे एजुकेशन लोन) चुका देना चाहिए या अपने कर्ज से छुटकारा पाने का प्लान बना लेना चाहिए। कर्ज का बोझ कम करने से आपके पैसे को बचाने के लिए पर्याप्त समय भी मिलेगा और मन होने पर जल्दी रिटायर होने का ऑप्शन भी मिलेगा। लोन का प्रीपेमेंट करने से आपको अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग जैसे अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों की दिशा में काम करने में भी मदद मिलती है। इन स्मार्ट मनी मूव्स की मदद से, एक महिला अपनी सभी जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने फाइनैंशल फ्यूचर को स्थिर भी बना सकती है।

अगर आप हैं सिंगल मदर
अगर आप किसी बच्चे की मां हैं तो बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए आपकी ओर से भी फाइनैंशल प्लैनिंग बनाई जानी चाहिए। इसमें लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस से लेकर इमर्जेंसी फंड तक शामिल होना चाहिए। आपकी यह प्लैनिंग आपके और आपके बच्चों के बेहद काम आ सकती है।

लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस: ये आपकी फाइनैंशल प्लानिंग के सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। इनकी आपको उस समय और ज्यादा जरूरत होती है जब आपके बच्चे सिर्फ आपके ऊपर निर्भर हैं। जहां एक तरफ एक लाइफ कवर, आपके असमय विदा होने की स्थिति में आपकी इनकम की जगह लेता है वहीं दूसरी तरफ एक हेल्थ इंश्योरेंस एक प्लान में कवर्ड सदस्यों के अस्पताल के सारे खर्च का ख्याल रखता है। एक पर्याप्त लाइफ कवर आपके सालाना इनकम का लगभग 20 गुना होना चाहिए।

टर्म इंश्योरेंस: टर्म इंश्योरेंस बहुत कम प्रीमियम पर एक अच्छा कवर दे सकता है। जहां तक हेल्थ इंश्योरेंस की बात है तो अपने परिवार में सदस्यों की संख्या और अपनी जरूरत के हिसाब से कवरेज की सीमा के आधार पर, इंडिविजुअल प्लान और फ्लोटर प्लान में से उसी का चुनाव करें जो आपके लिए सबसे उपयुक्त हो।

इमर्जेंसी फंड: सभी प्रकार के इंश्योरेंस के अलावा आपके पास एक इमर्जेंसी फंड भी होना चाहिए। अगर किसी कारणवश नौकरी छूटने जैसी कोई समस्या सामने आ जाती है तो इससे अच्छी तरह निपटने के लिए इमर्जेंसी फंड बहुत काम आता है। इमर्जेंसी फंड आपके 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर होना चाहिए।

हायर एजुकेशन और शादी: आपको अपने बच्चों की हायर एजुकेशन और शादी को लेकर भी प्लान करना चाहिए। इसके लिए हर महीने कुछ पैसे बचाकर उन्हें लॉन्ग टर्म निवेश में लगाएं। इसके लिए आप एसआईपी के माध्यम से म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना शुरू कर सकती हैं। साथ ही, अगर बेटी 10 से कम की है तो सुकन्या समृद्धि योजना में उसका अकाउंट खुलवाकर निवेश करना शुरू कर सकती हैं।

रिटायरमेंट फंड तैयार करें: भविष्य का ख्याल रखना जरूरी है। ऐसे में रिटायरमेंट फंड तैयार करें। यह पैसा आपको रिटायरमेंट के बाद किसी पर आत्मनिर्भरता खत्म करता है। अपना रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए हर महीने कुछ पैसे एनपीएस जैसी स्कीम में लगाएं।

अगर आप हैं हाउस वाइफ
गर आप गृहिणी हैं और अलग से आपकी कोई कमाई नहीं है तो आपको जीवनसाथी से कुछ बातें जरूर कहनी चाहिए। ये आपके सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी हैं। अपनी जरूरतों को अलग रखें अमूमन पति से पत्नी को घर चलाने के लिए एकमुश्त रकम मिलती है। सुनिश्चित कर लें कि इसमें वह रकम शामिल न हो, जो आपको अपने निजी खर्च के लिए चाहिए। इसके लिए अलग से पैसे लें। यह आपका अधिकार है।

अपने लिए हेल्थ इंश्योरेंस मांगें: बिना किसी झिझक के अपने जीवनसाथी से फैमिली फ्लोटर प्लान को खरीदने के लिए कहना चाहिए। यह प्लान परिवार के साथ आपको भी कवर करता है। अगर आप मेट्रो शहर में रहती हैं तो कवर 5-10 लाख रुपये होना चाहिए।
पता कर लें कि कहां-कहां नॉमिनी हैं: फाइनैंशल प्लानिंग की सभी जिम्मेदारी जीवनसाथी पर न डाल दें। तमाम मसलों पर अपनी राय जरूर रखें। आपको पता होना चाहिए कि फाइनैंस से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स कहां-कहां रखे हुए हैं। इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि इन्वेस्टमेंट के किन साधनों में आपको नॉमिनी बनाया गया है। जीवनसाथी की असमय मौत पर इससे वित्तीय लाभ को ट्रांसफर करने में आसानी होती है।

शादी के बाद भी अपना बैंक खाता बनाए रखें: शादी के बाद कुछ सालों तक अपना मौजूदा बैंक खाता बंद नहीं करें। फिर चाहे नौकरी कर रही हों या नहीं। अपने नाम जो संपत्तियां हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं करना चाहिए।

रिटायरमेंट की रकम का सही आंकलन करें: औसतन महिलाएं पुरुषों के मुकाबले 5-7 साल ज्यादा जीती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आपके पास इस तरह का रिटायरमेंट फंड उपलब्ध होना चाहिए जो आपके जीवनसाथी के न रहने पर भी कुछ सालों तक चले।

जमाने के साथ चलें: अगर आप स्मार्टफोन चला लेती हैं और ऑनलाइन शॉपिंग कर लेती हैं तो फिर निश्चित ही आपको मोबाइल या नेटबैंकिंग के बारे में भी सीखना चाहिए। ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट पर भी आपको नजर रखनी चाहिए। यह न केवल आपका आत्मविश्वास बढ़ाएगा, बल्कि वित्तीय मुश्किलों से निपटने में भी आपकी मदद करेगा। और हां, दुनिया में नामुमकिन कुछ भी नहीं है, इसलिए अगर आप चाह लेंगी तो कुछ भी सीख सकती हैं।
-एजेंसियां

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