योगी जी को वेस्टर्न यूपी के ही किसी जनपद से चुनाव लड़वाने पर विचार, चर्चा में मथुरा का नाम सबसे आगे

उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी जोर पकड़ रही है, वैसे-वैसे इस बात की भी चर्चा तेज होती जा रही है कि योगी आदित्‍यनाथ को आखिर कहां से चुनाव मैदान में उतारा जाएगा।
योगी जी के चुनाव लड़ने के लिए संभावित सीटों की बात करें तो अयोध्या और गोरखपुर के साथ सबसे ज्यादा चर्चा मथुरा की है।
इस चर्चा का मुख्‍य आधार है अयोध्‍या तथा काशी के बाद मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि पर बने मंदिर को भव्‍य तथा दिव्‍य बनाए जाने की वो मंशा, जिसे कभी खुद भाजपा ने जाहिर किया था।
बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखा पत्र

राज्‍यसभा सांसद हरनाथ सिंह का पत्र

बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर योगी को मथुरा सीट से चुनाव लड़ाने की सलाह दी है। यादव ने लिखा है कि ब्रज क्षेत्र की जनता की विशेष इच्छा है कि योगीजी भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से चुनाव लड़ें। यादव ने कहा कि योगी जी ने भी कहा है कि पार्टी जहां से कहेगी, वह वहीं से चुनाव लड़ेंगे। हरिनाथ सिंह ने कहा, ‘बीती रात मेरी आंखें दो बार खुलीं और मुझे लगा कि भगवान श्रीकृष्ण मुझसे कह रहे हैं कि मैं नेतृत्व को कहूं कि योगी जी मथुरा से चुनाव लड़ें इसलिए सुबह मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखा।’
योगी जी ने भी जाहिर की थी इच्‍छा
ज्यादा दिन नहीं हुए जब योगी जी ने मंच से कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, काशी में विश्वनाथ का धाम बना है, तो मथुरा-वृंदावन कैसे छूट जाएगा। मतलब साफ है कि बीजेपी इस चुनाव में भी हिंदुत्व के एजेंडे पर बढ़ रही है और सपा खेमे में चिंता का यही सबसे बड़ा कारण भी है। अयोध्या-काशी के बाद अब मथुरा की तैयारी है… यह नारा यूपी की चुनावी चर्चाओं गूंज रहा है।
वैसे भी बीजेपी के अंदर ये आवाज पहले से गूंजती रही है कि अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है! भगवान राम, कृष्ण, शिव से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। अयोध्या, काशी, मथुरा तीनों ही जगहों पर मंदिर-मस्जिद का मसला रहा है और वैसे भी बीजेपी तथा संघ के एजेंडे में ये रहा है।
हरनाथ सिंह यादव खुद कहते हैं कि भगवान कृष्ण के मंदिर पर जो मस्जिद खड़ी है उससे मुक्ति कौन दिला सकता है, इस बारे में लोग सोच रहे हैं।
राम मंदिर ना बने इसके लिए जिन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी, ऐसे लोग भगवान कृष्ण का मंदिर कभी नहीं बनाएंगे। चाहे वह अखिलेश यादव हों, राहुल गांधी हों, मायावती या कोई अन्‍य। भगवान कृष्ण के मंदिर का निर्माण सिर्फ योगी आदित्यनाथ ही कर सकते हैं। सियासी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना शुरू करें तो योगी के मथुरा से चुनाव में उतरने की संभावना प्रबल दिखती है। हालांकि योगी आदित्यनाथ फिलहाल विधान परिषद के सदस्य हैं।
बीजेपी को फायदा क्या होगा?
मथुरा से योगी को चुनाव में उतारकर भाजपा कुछ वैसा ही समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात छोड़कर काशी आने पर उसे पूर्वांचल में हुआ। यह हिंदुत्व के एजेंडे पर भी बिल्कुल सटीक बैठता है। मथुरा में कुछ दिनों में तो मंदिर बनने से रहा, हां योगी यहां से चुनाव लड़ते हैं तो इसका जनता में मैसेज साफ जाएगा। वैसे भी किसान आंदोलन के झटके से उबर रही बीजेपी को पश्चिमी यूपी की विशेष चिंता होगी। शायद यही वजह है कि भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रणनीति मुथरा-वृंदावन में ही तैयार कर रही है। इसके जरिए भगवा दल पूरे पश्चिम को साधने की कोशिश में है, जो किसान आंदोलन के चलते थोड़ा दूर जाता दिख रहा था।
सीटों का नफा-नुकसान भी समझ लीजिए
वेस्टर्न यूपी के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कृषि कानून के विरोध में जिस प्रकार से किसानों का आंदोलन एक साल से अधिक समय तक चला। कई किसानों की मौत भी हुई, उससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को लेकर किसानों में नाराजगी है। इसका नुकसान बीजेपी को विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है। इस मुद्दे का फायदा राष्ट्रीय लोक दल या उससे गठबंधन करने वाली समाजवादी पार्टी को मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो 16 जनपदों की करीब 136 सीटों पर सीधे तौर पर बीजेपी को नुकसान हो सकता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र की 136 में से 109 सीटें जीती थीं। यही कारण है कि बीजेपी के रणनीतिकार इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। योगी इस चुनाव में बीजेपी के पास मजबूत चेहरा हैं, इसीलिए उन्हें वेस्टर्न यूपी के ही किसी जनपद से चुनाव लड़वाने पर विचार हो रहा है और मथुरा इसके लिए सबसे मुफीद नजर आता है।
मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि को लेकर विवाद क्या है
कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में मथुरा की जिला सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि मुसलमानों की मदद से शाही ईदगाह ट्रस्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया और ईश्वर के स्थान पर एक ढांचे का निर्माण कर दिया। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए स्वामित्व मांगने के साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। मथुरा में शादी ईदगाह मस्जिद कृष्ण जन्मभूमि से लगी हुई बनी है। इतिहासकार मानते हैं कि मुगल शासक औरंगजेब ने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया था और शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था।
-Legend News

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