खासा चर्चित हो रहा है शिवपाल यादव का यह बयान…

शिवपाल यादव का एक बयान खासा चर्चित हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘किसी घर के तब टुकड़े होते हैं जब उस घर में कोई न कोई शकुनि होता है। हमारे घर में भी शकुनि जैसे लोग हैं।’ राजनीतिक गलियारों में यह पहेली बूझने की कोशिश हो रही है कि आखिर शिवपाल यादव किसे शकुनि मान रहे हैं?
मौजूदा पंचायत चुनाव के दौरान यूपी की यादव बेल्ट में एक बार फिर से मुलायम परिवार के अंदर बंटवारे की लकीरों को गहरा होते देखा जा रहा है। ऐसा तब हो रहा है जबकि राज्य विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं और यूपी में समाजवादी पार्टी की ताकत यादव बेल्ट ही मानी जाती है। धर्मेंद्र यादव की बहन के बीजेपी में जाने के बीच यादव परिवार में एका को लेकर छिड़ी बहस के बीच शिवपाल यादव का एक बयान खासा चर्चित हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘किसी घर के तब टुकड़े होते हैं, जब उस घर में कोई न कोई शकुनि होता है। हमारे घर में भी शकुनि जैसे लोग हैं।’ राजनीतिक गलियारों में यह पहेली बूझने की कोशिश हो रही है कि आखिर शिवपाल यादव किसे शकुनि मान रहे हैं? वैसे उनका इशारा राम गोपाल यादव की तरफ माना जा रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव के वक्त जब परिवार में पहली बार विभाजन की लकीर खिंची थी, तो भी शिवपाल यादव ने इशारों-इशारों में इसके लिए रामगोपाल यादव को ही जिम्मेदार माना था। ऐसा कहा जाता है कि 2012 में समाजवादी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बहुमत मिलने के बाद मुलायम सिंह यादव जब अपने सियासी उत्तराधिकारी का फैसला करने जा रहे थे, तो वह राम गोपाल यादव ही थे जिन्होंने मुलायम सिंह यादव को इस बात के लिए राजी किया था कि उन्हें मुख्यमंत्री पद अखिलेश यादव को देना चाहिए। शिवपाल यादव इस पद के लिए अपने को दावेदार मानकर चल रहे थे। शिवपाल यादव के भीतर की वह टीस अभी तक गई नहीं है।
-एजेंसियां

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