यह न्‍याय नहीं, हमें 5 एकड़ जमीन की भीख नामंजूर: ओवैसी

हैदाराबाद। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने असहमति जताई है। फैसले को लेकर ओवैसी ने कहा कि मेरी निजी राय है कि हमें मस्जिद के लिए 5 एकड़ की जमीन के ऑफर को खारिज कर देना चाहिए। अपने तीखे बयानों के लिए चर्चित ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम जरूर है, लेकिन इनफिलेबल यानी अचूक नहीं है। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने कहा कि मेरा सवाल है कि यदि 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद न ढहाई जाती तो क्या सुप्रीम कोर्ट का यही फैसला होता।
ओवैसी ने बेहद तीखा बयान देते हुए कहा, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। जिन्होंने बाबरी मस्जिद को शहीद किया, कोर्ट ने उन्हें ही ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है। यदि बाबरी मस्जिद नहीं ढहाई जाती तो कोर्ट आखिर क्या फैसला देता।’
यही नहीं, शीर्ष अदालत के फैसले में 5 एकड़ जमीन दिए जाने के फैसले को उन्होंने खारिज करते हुए कि यह न्याय नहीं है।
‘भीख मांग लूं तो मिल जाएंगे 5 एकड़ जमीन के पैसे’
उन्होंने कहा, ‘मुस्लिमों के साथ अत्याचार हुआ है, इसे कोई भी खारिज नहीं कर सकता। मुसलमान इतना गरीब नहीं है कि वह 5 एकड़ जमीन नहीं खरीद सकता। यदि मैं हैदराबाद की अवाम से ही भीख मांगू तो 5 एकड़ जमीन ले सकेंगे। हमें किसी की भीख की जरूरत नहीं है।’
‘आने वाली पीढ़ियों को बताएंगे वहां मस्जिद थी’
कोर्ट के फैसले के खिलाफ टिप्पणी में ओवैसी ने कहा कि क्या मुझे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि ओवैसी के बाद भी जब तक दुनिया कायम रहेगी, तब तक इस मुल्क में हम बाइज्जत शहरी थे और रहेंगे। हम अपनी कौम को बताते जाएंगे कि 500 साल से यहां मस्जिद थी, लेकिन 6 दिसंबर, 1992 को गिरा दी गई। संघ परिवार ने कांग्रेस की साजिश की मदद से ऐसा किया।
‘डर है कि काशी, मथुरा को भी मुद्दा बनाएंगे संघ के लोग’
ओवैसी ने कहा कि बीजेपी ने 1989 में पालमपुर में राम मंदिर का प्रस्ताव पारित किया था। अब डर है कि ऐसी कई जगहों पर संघ परिवार के लोग दावा करेंगे, जहां वे कहते रहे हैं कि यहां पहले मंदिर था। मुझे डर है कि कल संघ परिवार के लोग काशी, मथुरा का भी मुद्दा बनाएंगे।
-एजेंसियां

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