गलवान घाटी का असली खलनायक है यह चीनी जनरल

अमेरिकी की खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए हमले के पीछे चीन के क्रूर जनरल झाओ जोंगकी का हाथ था।
यह वही जनरल है जो चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का बेहद करीबी है।
चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की ‘आंख और कान’ कहे जाने वाले पश्चिमी थियेटर कमांड के प्रमुख जनरल झाओ जोंगकी को एक बार फिर से बुरी तरह से मुंह की खानी पड़ी है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक जनरल झाओ गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमला करके भारत को ‘सबक सीखाना’ चाहता था लेकिन उनका यह दांव उल्‍टा पड़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वियतनाम युद्ध और डोकलाम के बाद यह जनरल झाओ की तीसरी हार है।
कौन है विवादित चीनी जनरल झाओ जोंगकी
जनरल झाओ जोंगकी एक बेहद महत्‍वाकांक्षी व्‍यक्ति है। वह वर्ष 2016 से चीन के नवनिर्मित पश्चिमी थिएटर कमांड का नेतृत्‍व कर रहा है। जनरल झाओ ने अपने करियर में इतनी सफलता हासिल की है जितना कि किसी अधिकारी के लिए सपना होता है। उन्‍होंने करीब 20 साल तिब्‍बत के पठारों पर अपना समय बिताया है। इसी वजह से उन्‍हें सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में शामिल किया गया जो चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की सैन्‍य फैसले लेने वाली सर्वोच्‍च संस्‍था है। वर्ष 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान उन पर भीषण हमला हुआ था लेकिन वह बच निकला। वर्ष 2016 में जनरल झाओ भारत की यात्रा पर आया था।
चीनी राष्‍ट्रपति का बेहद करीबी है जनरल झाओ
जनरल झाओ चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद नजदीकी लोगों में शामिल है। उसे चीनी सेना में बहुत क्रूर जनरल माना जाता है जो घात लगाकर हमले करता रहा है। उसकी इसी स्‍टाइल में चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में हमला किया। जनरल झाओ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को यह दिखाना चाहता है कि वह बहुत काम का व्‍यक्ति है और इसी वजह से उसने वर्ष 2017 में डोकलाम की घटना को अंजाम देने की कोशिश की थी। जनरल झाओ चाहता था कि डोकलाम में और ज्‍यादा जमीन को हड़प लिया जाए। राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग और जनरल झाओ दोनों ही सीपीसी के शांक्‍सी प्रांत के क्रांतिकारी हीरो में शामिल थे। माना जाता है कि इसी वजह से दोनों बेहद करीब हैं।
वियतनाम, डोकलाम दोनों में फेल हुआ चीनी जनरल
अमेरिकी खुफ‍िया रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल झाओ वर्ष 1979 में हुए वियतनाम युद्ध के दौरान पीएलए में था और माना जाता है कि उसके कुप्रबंधन की वजह से विवाद काफी बढ़ गया था। इसी युद्ध के दौरान जनरल झाओ पर जानलेवा हमला हुआ था लेकिन वह बच गया। वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान भी जनरल झाओ शामिल था। करीब 72‍ दिनों तक चले गतिरोध के बाद भारतीय सैनिकों ने सफलतापूर्वक चीनी सैनिकों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था। इस हार के बाद जनरल झाओ को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा और चीनी सेना पीछे हट गई।
गलवान घाटी में जनरल झाओ को मिली करारी हार
अमेरिकी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जनरल झाओ जोंगकी ने गलवान घाटी हमले को मंजूरी दी थी। झाओ ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि भारत, अमेरिका और उसके सहयोगियों के शोषण से बचने के लिए चीन को कमजोर नहीं दिखना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि झाओ भारतीय सैनिकों पर हमले के जरिए ‘भारत को सबक सिखाना चाहता था।’ अमेरिकी रिपोर्ट से यह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि चीन इस हमले के जरिए भारत को अपनी ताकत का संदेश देना चाहता था। हालांकि चीन की यह योजना उल्‍टी पड़ गई और इस हिंसक झड़प में उसके 40 से ज्‍यादा सैनिक हताहत हो गए। अमेरिका का मानना है कि जनरल झाओ ने इस हमले में मारे गए चीनी सैनिकों की याद में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। हालांकि चीन ने अभी तक अपने मारे गए सैनिकों की संख्‍या नहीं बताई है। दरअसल, चीन चाहता था कि इस कार्यवाही के जरिए भारत पर दबाव बनाया जाए ताकि वार्ता की मेज पर भारतीय पक्ष को दबाया जा सके।
-एजेंसियां

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