कोरोना से युद्ध करेंगी भारतीय युवाओं की ये नई खोजें

देश को महामारी से बचाने में भारतीय युवा शक्ति ने जतनी जल्दी अपनी खोजों को अंजाम तक पहुंचाया वह काब‍िले तारीफ है। भारतीय युवाओं की ये खोजें अब सरकार के प्रयासों के ल‍िए ‘ब्रह्मास्त्र’ बन सकती हैं। कोरोना से देश को बचाने को भारतीय युवा शक्ति ने बीमारी में रोकथाम में प्रयोग होने वाली ऐसी ऐसी तकनीकें ईजाद कर दींं, जो अमेरिका, इटली, जर्मनी और चीन जैसे संपन्न देश नहीं कर पाए।

संकट में आईआईटी, एनआईटी, आईआईएससी के छात्र, शोधार्थी से लेकर वैज्ञानिकों ने रात-दिन लॉकडाउन के बावजूद सीमित संसाधनों में सस्ते पोर्टेबल वेंटिलेंटर, रोबो, ड्रोन, जांच किट, मॉस्क, सेनिटाइजर, फेसशीट, दस्ताने से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को दी जाने वाली पीपीई किट तक तैयार कर भारत सरकार को सौंपी। कोरोना मरीजों की पहचान के लिए देश के इन होनहारों ने ऐसे स्मार्ट ऐप बना दिए कि तकनीक के चलते सारी जानकारी सरकार तक खुद पहुंच जाएगी।

IIT Delhi के छात्रों ने ऐसा ऐप बनाया है जो #COVID19 पीड़ितों के संपर्क में आने वाले मरीजों की जानकारी देगा। आईआईटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन में पीएचडी छात्र अरशद नासर के मुताबिक, ‘ब्लूटूथ’ का उपयोग कर के ऐप से उन सभी व्यक्तियों को ट्रैक और अलर्ट करेगा, जो पिछले दिनों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के संपर्क में आए हों, या उसके आसपास से गुजरे हो। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की तारीख और क्षेत्र का भी इस ऐप के माध्यम से पता लग सकेगा।

इसी तरह से Indian Institute of Technology Ropar के बीटेक छात्र साहिल वर्मा ने ‘संपर्क-ओ-मीटर’ नामक मोबाइल ऐप बनाया है, जो मानचित्र के जरिये कोरोना वायरस के अधिकतम संक्रमण की आशंका वाले वाले क्षेत्रों को इंगित कर सकता है। इसके अलावा आईआईटी बॉम्बे के छात्रों और पूर्व छात्रों की एक टीम ने ‘क्वारंटीन’ नामक मोबाइल ऐप बनाया है। यह कोरोना वायरस के लक्षण वाले या वायरस के संपर्क में आये संदिग्ध लोगों को ट्रैक करने में मदद करेगा। यदि कोई व्यक्ति अपने एकांतवास से बाहर निकलता है तो ऐसे में इसके माध्यम से उस व्यक्ति का पता लग जाएगा।

इंटरनेट न होने पर एसएमएस से मिलेगी जानकारी
Indian Institute of Technology, Roorkee के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर कमल जैन ने एक ऐसा ट्रैकिंग ऐप विकसित किया है, जो कोरोना वायरस को रोकने के लिए आवश्यक निगरानी प्रणाली को मजबूत कर सकता है। प्रो. जैन के मुताबिक, इस ऐप से कोरोना पॉजीटिव से लेकर आइसोलेशन में भेजे गए व्यक्ति की किसी भी तरह के उल्लंघन करने पर सतर्क कर सकता है। यदि जीपीएस डाटा नहीं मिलता है तो मोबाइल टॉवर के जरिए लोकेशन अपने आप मिल जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में इंटरनेट नहीं चल रहा है तो एसएमएस द्वारा भी लोकेशन भी मिल सकती है।

गो कोरोना गो….करेगा संदिग्ध मरीज की पहचान

IISc Bengluru की टीम ने ‘गो कोरोना गो’ ऐप विकसित किया है। आईआईएससी की फैकल्टी मैंबर डॉ. तरुण रंभा ने बताया कि यह ऐप ब्लूटूथ और जीपीएस के माध्यम से कोविड-19 से संक्रमितों या संदिग्धों के संपर्क में आये लोगों की पहचान कर सकता है। यह दूर के संपर्कों से भी जोखिम की प्रवृत्ति को समझने के लिए अस्थायी नेटवर्क एनालिटिक्स का उपयोग करता है। इसके माध्यम से बीमारी के प्रसार का आकलन करने और उन लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिन्हें वायरस की चपेट में आने की आशंका है।

टैंट के चलते डॉक्टर और कर्मी नहीं होंगे संक्रमित
आईआईटी रोपड़ के प्रोफेसर धीरज कुमार महाजन ने कोरोना योद्धाओं को संक्रमण से बचाने के लिए दक्षिण कोरिया की तर्ज पर ऐसा टैंट (9 गुणा 8 की प्लास्टिक शीट ) बनाया है, जो वायरस को बाहर ही नहीं आने देगा। जो हवा इस टेंट से बाहर निकलेगी, उसे ट्रीट करके निकाला जाएगा। प्रो. का दावा है कि टेस्टिंग स्टेशन बनाने संबंधी उनकी स्टडी पूरी हो गई है। कोरिया न इसी टेस्टिंग स्टेशनों की सहायता से वायरस पर काबू किया है। इसमें ब्लोर, हैपा फिल्टर लगे होंगे। मरीज को इस प्लास्टिक टेंट में रखा जाएगा।

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