कांग्रेस की बर्बादी के स्‍पष्‍ट संकेत हैं ये पांच फैक्‍टर्स: संजय झा

नई दिल्‍ली। सस्‍पेंड चल रहे कांग्रेस नेता संजय झा के तेवर तल्‍ख हो चले हैं। उनका मानना है कि कांग्रेस ने अगर अपना रास्‍ता नहीं बदला तो तबाह हो जाएगी।
झा कहते हैं कि ‘कांग्रेस में विपरीत विचारों के लिए असहिष्‍णुता है।’ उनके मुताबिक कांग्रेस बीजेपी पर ‘अवैध लोकतंत्र’ का लांछन लगाती है मगर अपने भीतर भी राजशाही संस्‍कृति को बढ़ावा देती है। झा ने कहा कि कांग्रेस का पाखंड साफ सामने आ रहा है। उन्‍होंने पांच फैक्‍टर्स गिनाए हैं जो कांग्रेस की बर्बादी की तरफ इशारा करते हैं।
कांग्रेस का गिरता वोट शेयर
संजय झा कहते हैं कि कांग्रेस का परंपरागत रूप से औसत वोट शेयर 45% रहा है। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्‍या के फौरन बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्‍यादा 48.1% वोट मिले थे। उसके बाद से लगातार कांग्रेस का वोट शेयर गिरता गया है। 1998 तक कांग्रेस का वोट शेयर 25.8% पर आ चुका था यानी उसके करीब आधे समर्थक छिटक चुके थे। फिर 2009 के चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर सुधरकर 28.5% हो गया लेकिन फिर 2014 में पार्टी धड़ाम से गिरी। उसे सिर्फ 19.52% वोट मिले।
पार्टी के हाथ से फिसलते राज्‍य
झा के मुताबिक कांग्रेस बड़े राज्‍यों से लगभग गायब ही हो चुकी है। उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात और ओडिशा जैसे राज्‍य गिनाए जहां कांग्रेस की दशकों से सरकार नहीं बनी। इन राज्‍यों में लोकसभा की 247 सीटें हैं। झा ने मध्‍य प्रदेश का उदाहरण दिया जहां कांग्रेस ने 15 साल बाद सत्‍ता पाई थी मगर बीजेपी के हाथों गंवा दी।
वोटर्स की संख्‍या में खास इजाफा नहीं
संजय झा के मुताबिक कांग्रेस के वोटर बेस के आंकड़े ‘नॉकआउट पंच’ जैसे हैं। 2004 में 10.3 करोड़ वोटर्स का साथ पाने वाली कांग्रेस 2019 में 11.9 करोड़ वोटर्स को ही लुभा सकी। यानी उसके वोटर बेस में सिर्फ 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ। झा इसके मुकाबले बीजेपी के आंकड़े देते हैं जिसने इसी समयकाल में अपना वोटर बेस 166% बढ़ा लिया। झा के मुताबिक कांग्रेस के युवा वोट खोने का यही आंकड़ा है।
2019 के बाद कांग्रेस का सरेंडर
सस्‍पेंड होने के बाद झा लिखते हैं कि 2019 की करारी हार के बाद कांग्रेस सिमटकर रह गई। उनके मुताबिक, पार्टी ने बीजेपी को कर्नाटक हथियाने दिया। मध्‍य प्रदेश में बीजेपी कांग्रेस के मुंह से मलाई छीन ले गई और साथ में ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को भी। राजस्‍थान को झा कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील मानते हैं। उन्‍होंने कहा कि कांगेस की पीएचडी थीसिस का टाइटल होना चाहिए – 10 आसान स्‍टेप्‍स में खुद की बर्बादी कैसे सुनिश्चित करें!
नेतृत्‍व करने वाला कोई नहीं
संजय झा के मुताबिक पिछले 20 साल मे कांग्रेस में केवल दो अध्‍यक्ष रहे। उन्‍होंने ध्‍यान दिलाया क‍ि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव 1997 के बाद से नहीं हुए हैं। मई 2019 के बाद से कांग्रेस के पास परमानेंट अध्‍यक्ष तक नहीं है। झा ने कहा कि पार्टी के भीतर जबर्दस्‍त गुटबाजी चलती है। उनका मानना है कि पार्टी 2024 में बीजेपी को टक्‍कर दे सकती है अगर वक्‍त न गंवाए। झा के मुताबिक कांग्रेस को एक गैर-गांधी अध्‍यक्ष बनाना चाहिए और पारदर्शी तरीके से संगठन के चुनाव कराने चाहिए। झा ने यह भी लिखा है कि उनका लेख पढ़कर पार्टी शायद उन्‍हें प्राथमिक सदस्‍यता से भी निकाल दे।
-एजेंसियां

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