…तो कांग्रेस अगले 50 सालों तक विपक्ष में ही रहेगी: ग़ुलाम नबी आज़ाद

नई दिल्‍ली। कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खींचतान में कई शीर्ष नेता अब खुलकर बोलने लगे हैं. जिन नेताओं ने अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पत्र लिखे थे, उनमें ग़ुलाम नबी आज़ाद, कपिल सिब्बल, शशि थरूर, आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद, मनीष तिवारी, भूपिंदर सिंह हुडा और पृथ्वीराज चौहान जैसे नेता हैं.
हालाँकि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष पद पर बनाए रखा गया है लेकिन ये भी कहा गया कि छह महीने के अंदर अध्यक्ष पद के चुनाव कराए जाएँगे.
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव पर ज़ोर देते हुए राज्यसभा में कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अगर कांग्रेस में अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं हुआ तो पार्टी अगले 50 सालों तक विपक्ष में ही रहेगी.
दूसरी ओर अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कपिल सिब्बल ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी को 24×7 यानी सातों दिन चौबीसो घंटे वाला नेतृत्व चाहिए. सिब्बल ने ये भी कहा है कि कांग्रेस पार्टी इस समय ऐतिहासिक रूस से निचले स्तर पर है.
कांग्रेस के 23 नेताओं की चिट्ठी लीक होने के बाद सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी, जो सात घंटे चली. इस बैठक में पत्र लिखने वाले नेताओं की आलोचना भी हुई. बैठक में पत्र की टाइमिंग, मंशा और पत्र लीक किए जाने पर भी सवाल उठाए गए.
लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कपिल सिब्बल ने कहा, “अगर लोगों के पास वो पत्र है तो वे जान जाएँगे कि पत्र में गांधी परिवार या किसी को कम करके नहीं दिखाया गया है. दरअसल, हमने अभी तक कांग्रेस नेतृत्व के काम की सराहना की है.”
सात अगस्त को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखी गई चिट्ठी में एक प्रभावी, पूर्णकालिक और दिखने वाले नेतृत्व की मांग की गई है. साथ ही पत्र में पार्टी के सभी स्तरों पर चुनाव की भी अपील की गई है.
लेकिन इस पत्र के लीक हो जाने के बाद कांग्रेस पार्टी का एक तबका खुलकर इन नेताओं के ख़िलाफ़ उतर आया. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी इन कथित असंतुष्ट नेताओं की जमकर आलोचना हुई, तो मीडिया में भी इन नेताओं के ख़िलाफ़ जम कर बयानबाज़ी हुई. इन नेताओं में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, अशोक गहलोत समेत कई नेता शामिल थे.
साथ ही कांग्रेस की कई राज्य इकाइयों ने भी पत्र लिखकर सोनिया गांधी के नेतृत्व में आस्था जताई थी.
मंशा पर सवाल
लेकिन ग़ुलाम नबी आज़ाद ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा- हमारी मंशा कांग्रेस को मज़बूत करने की थी. अगर चिट्ठी लीक हो गई तो इतना विवाद खड़ा करने की आवश्यकता क्या. पार्टी को मज़बूत बनाने के लिए कहना और चुनाव की मांग करना कोई राज़ तो नहीं है.
आज़ाद ने आगे कहा, “दशकों से हमारी पार्टी में निर्वाचित बॉडी नहीं है. हमें शायद 10-15 साल पहले ही इस पर ज़ोर देना चाहिए था. अब हम चुनाव दर चुनाव हार रहे हैं. अगर हमें वापसी करनी है तो हमें चुनाव करवाकर अपनी पार्टी को मज़बूत करना चाहिए. अगर मेरी पार्टी अगले 50 सालों तक विपक्ष में रहना चाहती है, तो पार्टी में चुनाव कराए जाने की आवश्यकता नहीं.”
उन्होंने चुनाव पर विरोध करने वालों के बारे में कहा, “जो लोग पार्टी में चुनाव कराए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपना पद जाने का डर है. मैंने दो बार कांग्रेस कार्यसमिति का चुनाव लड़ा है और दोनों बार निर्वाचित हुआ हूँ. चुनाव कराने में नुक़सान क्या है?”
कपिल सिब्बल ने भी कहा कि उनकी मंशा पार्टी को फिर से जीवित करने की है और वे सभी इसमें हिस्सा बनना चाहते हैं.
‘किसी बात का डर नहीं, हम सच्चे कांग्रेसी’
कपिल सिब्बल ने कहा- यही हमारी पार्टी को लेकर प्रतिबद्धता है. काश हमारे पत्र के मुद्दों को सामने रखा गया होता तो कांग्रेस कार्यसमिति में मौजूद लोगों को पता चल जाता कि ये पार्टी को पुनर्जीवित करने और मज़बूत करने के लिए था. कार्यसमिति में मौजूद एक व्यक्ति ने तो गद्दार शब्द का भी इस्तेमाल किया. काश वहाँ मौजूद लोग उन्हें डाँटते. पत्र में एक भी जगह असभ्य भाषा का इस्तेमाल नहीं हुआ है. मुझे आश्चर्य है कि पार्टी के सबसे बड़े मंच पर ऐसे शब्दों की अनुमति दी गई.
सिब्बल ने कहा कि पार्टी के संविधान में पार्टी की संरचना बताई गई है, जिसे स्थापित करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा- मुझे पार्टी और इसके संविधान के बारे में कुछ जानकारी है. पार्टी संविधान के तहत कई संरचना की बात कही गई है, जो पार्टी में नहीं है.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि जिस किसी को भी पार्टी की आंतरिक कार्यशैली में सही मायने में रुचि है, वो हमारे प्रस्ताव का स्वागत करते.
निजी महत्वाकांक्षा के बारे में आज़ाद ने कहा, “मेरी कोई निजी महत्वाकांक्षा नहीं है. मैं पार्टी का वफ़ादार हूँ. मैं मुख्यमंत्री रहा हूँ, केंद्रीय मंत्री रहा हूँ. कार्यसमिति में हूँ और पार्टी का महासचिव भी हूँ. मुझे और कुछ नहीं चाहिए. मैं अगले पाँच-सात साल तक सक्रिय राजनीति में रहूँगा. मैं पार्टी अध्यक्ष नहीं बनना चाहता. सच्चे कांग्रेसी की तरह मैं पार्टी की बेहतरी के लिए चुनाव चाहता हूँ.”
दूसरी ओर चिट्ठी को लेकर निशाना बनाए जाने को लेकर कपिल सिब्बल ने अपने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें किसी बात का डर नहीं है. वो सच्चे कांग्रेसी हैं और वे बिना डर के सच्चे कांग्रेसी बने रहेंगे.
लेकिन कपिल सिब्बल ने जितिन प्रसाद को निशाना बनाए जाने को लेकर ज़रूर कड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा- ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि जितिन प्रसाद को यूपी में आधिकारिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है. कांग्रेस को सर्जिकल स्ट्राइक से बीजेपी को टारगेट करना चाहिए, इसके बदले पार्टी अपनी ऊर्जा अपने लोगों को टारगेट करने में बर्बाद कर रही है.
यूपी में कांग्रेस की एक ज़िला कमेटी ने जितिन प्रसाद के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग की थी.
सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान कपिल सिब्बल ने इस पर आपत्ति जताई थी कि पत्र लिखने वाले नेताओं पर बीजेपी के साथ साँठगाँठ के आरोप लगाए जा रहे हैं.
लेकिन बाद में उन्होंने ट्विटर पर जानकारी दी कि राहुल गांधी के फ़ोन के बाद वे अपना बयान वापस ले रहे हैं. कपिल सिब्बल के मुताबिक़ राहुल गांधी ने उन्हें बताया था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा है.
क्या असंतुष्टों के पर कतरे जा रहे हैं?
इस बीच कांग्रेस ने कई नियुक्तियों की घोषणा की है. पार्टी ने गौरव गोगोई को लोकसभा में नया उपनेता नियुक्त किया है, जबकि नवनीत बिट्टू को सदन में व्हिप नियुक्त किया गया है.
आरोप है कि पार्टी ने सदन में शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे नेताओं की अनदेखी की. इन दोनों नेताओं ने भी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने वाली चिट्ठी पर हस्ताक्षर किए थे.
साथ ही कांग्रेस ने संसद में आने वाले मुद्दों से निपटने के लिए 10 नेताओं के एक ग्रुप का गठन किया है. इस ग्रुप में ग़ुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा का भी नाम है. लेकिन साथ ही गांधी परिवार के वफ़ादार माने जाने वाले अहमद पटेल, जयराम रमेश, अधीर रंजन चौधरी और केसी वेणुगोपाल के नाम भी हैं.
जयराम रमेश को राज्यसभा में पार्टी का चीफ़ व्हिप भी नियुक्त किया गया है.
पिछले साल लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. हालाँकि वे पाँच साल के लिए अध्यक्ष चुने गए थे. इसके बाद सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुना गया.
-एजेंसियां

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