अमेरिका ने साउथ चाइना सी में चीन की चौकियों पर गहरी आपत्ति जताई, 2015 का वादा याद दिलाया

वॉशिंगटन। अमेरिका ने साउथ चाइना सी में चीन की सैन्य चौकियों पर गहरी आपत्ति जताई है। अमेरिका ने कहा कि चीन अपनी उन चौकियों का इस्तेमाल धौंस जमाने तथा उस जल क्षेत्र में अपना कब्जा जमाने के लिए कर रहा है। समुद्र में कृत्रिम द्वीपों पर बने सैन्य चौकियों पर उसका कानूनन हक भी नहीं है। अमेरिका ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि वह समुद्री क्षेत्र में अपने इन निर्माणों का किसी अन्य देश को प्रभावित करने या हमला करने के लिए इस्तेमाल नहीं करने के अपने वादे का सम्मान करें।
पूरे साउथ चाइना सी पर चीन करता है दावा
चीन 13 लाख वर्गमील में फैले लगभग पूरे साउथ चाइना सी पर दावा जताता है। चीन इस क्षेत्र में उन कृत्रिम द्वीपों पर सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहा है जिन पर ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपीन, ताईवान और वियतनाम भी अपना दावा जताते हैं। पेइचिंग ने हाल के वर्षों में पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा इलाके में मछली पकड़ने तथा खनिज उत्खनन जैसी गतिविधियों को अवरुद्ध किया है और कहा है कि संसाधन समृद्ध इस समुद्री क्षेत्र पर सैकड़ों वर्षों से उसका मालिकाना हक है।
अमेरिका ने जिनपिंग को याद दिलाया वादा
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टगस ने रविवार को कहा कि पांच साल पहले 25 सितंबर 2015 को चीन के राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में वादा किया था कि चीन का द्वीपों का सैन्यीकरण करने का इरादा नहीं है और चीन की चौकियां किसी को निशाना नहीं बनाएंगी या किसी देश को प्रभावित नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि लेकिन इसके बजाए चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) समर्थित चीन की सरकार ने इन विवादित चौकियों का अंधाधुंध तरीके से सैन्यीकरण करना शुरू कर दिया, यहां पोत भेदी क्रूज मिसाइलों की तैनाती की, लड़ाकू विमानों के लिए कई दर्जन हैंगर तथा रनवे बनाए।
अमेरिका बोला, चीन का अधिकार नहीं
ऑर्टगस ने कहा कि सीसीपी ने इन सैन्यीकृत चौकियों का इस्तेमाल धमकाने तथा उस जलक्षेत्र पर कब्जा जमाने के लिए किया जिन पर उसका कानूनन कोई अधिकार नहीं है। हम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध करते हैं कि वे इस खतरनाक एवं अस्वीकार्य व्यवहार के खिलाफ आवाज बुलंद करें और सीसीपी को यह साफ कर दें कि उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। दक्षिण चीन सागर में चीन के प्रतिरोधी प्रयासों के खिलाफ अमेरिका दक्षिण-पूर्वी एशियाई सहयोगियों और साझेदारों के साथ खड़ा है।
एशिया में किन-किन देशों को चीन से खतरा
एशिया में चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत को सबसे ज्यादा खतरा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है। इसके अलावा चीन और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है। हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के प्रयोग की धमकी दे चुका है। इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं चीन का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी विवाद है।
-एजेंसियां

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