केंद्रीय गृह सचिव ने कहा, लॉकडाउन के उल्लंघन पर सख्त कार्यवाही हो

नई दिल्‍ली। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर लॉकडाउन के उपायों के उल्लंघन पर सख्त कार्यवाही करने को कहा है। पत्र में कहा गया है, ‘डीएम अधिनियम और आईपीसी के तहत दंडात्मक प्रावधानों को व्यापक रूप से परिचालित किया जाए।
लॉकडाउन के उल्लंघन के लिए, कानून प्रवर्तन अधिकारी डीएम अधिनियम और आईपीसी के प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकेंगे। इसमें जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
बिना किसी कारण के अगर कोई व्यक्ति, किसी अधिकारी, जो केंद्र या राज्य द्वारा तैनात किया गया हो, के कामकाज में बाधा डालता है या उसका कहना नहीं मानता है, तो उसे एक साल की सजा या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यदि उस व्यक्ति की गलती के चलते दूसरे लोगों की जान खतरे में पड़ती है, तो उस हालत में वह सजा दो साल तक बढ़ाई जा सकती है।
कोरोना वायरस की दवा बनाने या उसका इलाज करने का फर्जी दावा करने वाले लोगों पर भी अब कठोर कार्यवाही की जाएगी। इस मामले में दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
इसके अलावा केंद्र, राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण और राज्य आपदा प्राधिकरण के किसी अफसर को कोई जानबूझकर गुमराह करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही होगी। वह कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी यह झूठा दावा करे कि वो फलां जगह की स्थिति के बारे में अच्छी तरह जानता है। जबकि वहां की स्थिति बिल्कुल उलट होती है। ऐसा करने पर उस कर्मचारी को दो साल की सजा और जुर्माना भरना पड़ सकता है।
कोरोना वायरस की लड़ाई में अगर कोई कर्मचारी जानबूझकर सरकारी फंड का दुरुपयोग करता है या किसी दूसरे व्यक्ति से कराता है तो उसे सजा मिलेगी। इसमें भी दो साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि कोई व्यक्ति कोरोना के लॉकडाउन में बिना किसी कारण के चेतावनी जारी कर लोगों में भय का माहौल पैदा कर देता है, तो पकड़े जाने पर उसे एक साल की सजा और जुर्माना भरना होगा।
यह भी प्रावधान किया गया है कि उपरोक्त दिए गए नियमों को अगर कोई सरकारी विभाग तोड़ता है, तो उसका जिम्मेदार संबंधित विभागाध्यक्ष माना जाएगा।
उसके खिलाफ तब तक कार्यवाही जारी रहेगी, जब तक वह यह साबित न कर दे कि ये काम उसकी जानकारी के बिना हुआ है।
अगर इस तरह का अपराध उस दफ्तर के किसी दूसरे अधिकारी ने किया है और वह साबित हो जाता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही होगी।
कोई अफसर जिसे ड्यूटी दी गई है लेकिन वह उसे पूर्ण तरीके से नहीं निभाता है या उसका कोई बहाना बना देता है और अपने वरिष्ठ अधिकारी की इजाजत के बिना ऐसा करता है, तो उसे एक साल का दंड मिलेगा। इसमें जुर्माना भी हो सकता है।
यदि कोई अधिकारी जिसे किन्हीं विशेष आदेशों के द्वारा नियुक्त किया गया है और उसने उपरोक्त किन्हीं नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ बिना राज्य सरकार या केंद्र की इजाजत के कानूनी प्रकिया शुरू नहीं की जा सकती।
-एजेंसियां

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