जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने की आधिकारिक घोषणा से पहले ट्रंप समर्थकों का संसद कैपिटल में जबर्दस्‍त हंगामा, 4 लोगों की मौत

वॉशिंगटन। अमेरिका के इतिहास में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जितना बवाल इस बार हुआ है, उतना शायद ही पहले कभी हुआ हो। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रैट जो बाइडेन की जीत स्वीकार करने को पहले ही तैयार नहीं थे लेकिन शायद ही किसी को अंदाजा होगा कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे। ट्रंप समर्थक बुधवार को जबरन संसद कैपिटल में घुस गए। ट्रंप समर्थकों की खूनी हिंसा से अब तक चार लोगों की मौत हो गई है और तीन लोगों की हालत गंभीर है। 52 लोग ग‍िरफ्तार किए जा चुके हैं।
बताया जा रहा है कि मारे गए लोगों में एक महिला है जो जिसे पुलिस ने गोली मार दी थी। इसके अलावा तीन अन्‍य लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इस बीच वॉशिंगटन के मेयर ने शहर में 15 दिन के इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। यह इमरजेंसी 21 जनवरी तक लागू रहेगी।
पुलिस के अनुसार डोनाल्‍ड ट्रंप के समर्थकों ने हिंसा के दौरान रसायनों का इस्‍तेमाल किया ताकि संसद भवन परिसर पर कब्‍जा किया जा सके। हालांकि बड़ी तादाद में पुलिसकर्मियों के पहुंचने पर उन्‍हें भगा दिया गया। उन्‍होंने कहा कि भीड़ कैप‍िटल बिल्डिंग के बैरिकेड्स को तोड़ने का प्रयास कर रही थी और उन्‍हें हटाने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इसमें महिला को गोली लग गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बिगड़ते हालात के बीच राष्ट्रीय राजधानी वॉशिंगटन में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसके बाद भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर उतर आए।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रैट जो बाइडेन की जीत स्वीकार करने को पहले ही तैयार नहीं थे लेकिन शायद ही किसी को अंदाजा होगा कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे।
इतिहासकार बताते हैं कि देश की संसद ने ऐसा हाल कम से कम 200 साल में पहली बार देखा है। यह घटना इतनी गंभीर है कि खुद रिपब्लिकन नेता लोकतंत्र पर हुए इस हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप को बाहर करने की मांग करने लगे हैं।
उपराष्‍ट्रपति माइक पेंस ने इसे संसद के इतिहास का काला दिन करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि हिंसा की ‘कभी जीत नहीं हो सकती है।’ अमेरिकी संसद पर कब्‍जे की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को जहां ट्रंप ने ट्वीट करके उकसाने का काम किया, वहीं माइक पेंस ने हिंसा के बाद 6 घंटे से ज्‍यादा भाषण देकर प्रदर्शनकारियों की कड़ी आलोचना की। इस बीच अब अमेरिका में मांग उठ रही है कि ट्रंप को हटाने के लिए माइक पेंस संविधान के 25वें संशोधन को लागू करें।
जानें क्‍या है अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन
अमेरिका में 14 हजार कंपनियों की संस्‍था के प्रमुख ने उपराष्‍ट्रपति से मांग की है कि वह राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को हटाने के लिए संविधान के 25 संशोधन को लागू करने पर गंभीरता से विचार करें। इस संवैधानिक संशोधन में कहा गया है कि उपराष्‍ट्रपति राष्‍ट्रपति बन सकते हैं, जब कैबिनेट बहुमत से यह घोषित कर दे कि राष्‍ट्रपति अब काम करने में सक्षम नहीं है। अगर राष्‍ट्रपति इस घोषणा का विरोध करते हैं तो संसद के दोनों ही सदनों में दो त‍िहाई बहुमत से प्रस्‍ताव को पारित करके राष्‍ट्रपति को हटाया जा सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सांसदों ने भी उपराष्‍ट्रपति से ट्रंप को हटाने की अपील की है।
हटाए जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप?
सदन के कुछ सदस्यों का कहना है महाभियोग की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। हालांकि ट्रंप को हटाने के लिए पर्याप्त सदस्यों की संख्या है या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। CNN के मुताबिक ट्रंप पर महाभियोग लगाने और उन्हें पद से हटाने के बाद सीनेट उन्हें भविष्य में फेडरल ऑफिस में लौटने से रोक सकती है। सीनेट के वोट से उन्हें हमेशा के लिए डिसक्वॉलिफाई कर दिया जाएगा। देश के संविधान के 25वें संशोधन के तहत उपराष्ट्रपति माइक पेंस और कैबिनेट के बहुमत को ट्रंप को पद से हटाने के लिए वोट करना होगा। ‘अपने पद पर ताकतों और कर्तव्यों का’ पालन करने में अस्थिरता का हवाला देते हुए ऐसा करना अपने आप में एक बड़ा कदम होगा।
एरिजोना में बाइडन की जीत पर ट्रंप की आपत्तियां खारिज
अमेरिकी संसद ने एरिजोना में बाइडन की जीत पर ट्रंप की ओर की गई आपत्तियों को खारिज कर दिया है और चुनाव के परिणाम को बरकरार रखा है।
उधर, ट्रंप समर्थकों द्वारा कैपिटल हिल परिसर में हिंसा के बाद अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफनी ग्रीसम तथा व्हाइट हाउस की उप प्रेस सचिव सारा मैथ्यूज ने इस्तीफा दे दिया। ग्रीसम इससे पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के रूप में भी सेवा दे चुकी हैं।
ट्रंप के विरोधियों ने इसे गृहयुद्ध छेड़ने का प्रयास करार दिया
ट्रंप समर्थकों की हिंसा के बाद अब संसद भवन के अंदर बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और कार्यवाही अब फिर से शुरू हो गई है। ट्रंप के विरोधियों ने इसे गृहयुद्ध छेड़ने का प्रयास करार दिया है। दुनियाभर के नेता इस हिंसा की आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप समर्थक कैपिटल हिल इमारत के सामने कई बार पुलिस से भिड़ गए और कई लोग संसद के अंदर भी घुसने में सफल हो गए।
ट्रंप समर्थकों की हिंसा पर पीएम मोदी समेत दुनिया के कई नेता बोले
दुनिया भर के नेताओं ने वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल बिल्डिंग में हुई हिंसा की निंदा की है।
कई वैश्विक नेताओं ने अमेरिकी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कैपिटल बिल्डिंग पर हुए हमले को ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताया है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है, “वॉशिंगटन डीसी में दंगों और हिंसा की ख़बर देखकर परेशान हूँ। सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को किसी ग़ैर-क़ानूनी विरोध के ज़रिये बिगड़ने नहीं दिया जा सकता।”
-एजेंसियां

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