बालसुलभ क्रियाओं की तरह ही होते हैं ADHD के लक्षण

अटेंशन डिफिसिट हायपरएक्‍टिविटी डिसऑर्डर छोटे बच्चों में होने वाला एक कॉमन डिसऑर्डर है लेकिन दिक्कत की बात यह है कि इसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी हो पाती है कि उनका बच्चा ADHD से पीड़ित है।
इसकी वजह यह है कि इस डिसऑर्डर के लक्षण आमतौर पर बालसुलभ क्रियाओं की तरह ही होते हैं इसलिए माता-पिता इनमें अंतर नहीं कर पाते हैं।
हालांकि हर 20 में से एक बच्चा ADHD से पीड़ित होता है। खास बात यह है कि लड़कियों की तुलना में यह डिसऑर्डर लड़कों में अधिक देखने को मिलता है। जो बच्चे ADHD से पीड़ित होते हैं, वे आमतौर पर हाइपर एक्टिव होते हैं। किसी एक काम को ध्यान लगाकर नहीं कर पाते हैं। एक साथ कई कामों में व्यस्त हो जाते हैं और फिर कोई एक भी काम ठीक से नहीं कर पाते हैं। यह डिसऑर्डर 3-4 साल की उम्र से लेकर 13 साल तक की उम्र तक बच्चों में देखने को मिलता है और इस उम्र के बाद ज्यादातर बच्चों में यह दिक्कत दूर हो जाती है लेकिन कुछ केसेज में यह समस्या 25 साल की उम्र तक बच्चे को परेशान कर सकती है।
ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि ADHD के ट्रीटमेंट के दौरान बच्चों को जो ज्यादातर ड्रग्स दी जाती हैं, वे 20 से 40 प्रतिशत तक बच्चों पर बेअसर साबित होती हैं। ADHD के लिए दी जाने वाली दवाइयां लंबे समय से विवाद का विषय रही हैं। कई स्टडीज में यह बात सामने आई है कि ओमेगा-3 फिश ऑइल ADHD से पीड़ित बच्चों को ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है लेकिन वहीं कुछ रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि ओमेगा-3 के सेवन से कुछ बच्चों में तो तेजी से सुधार देखने को मिला क्योंकि ये टॉलरेटेड और सेफ होते हैं जबकि कुछ बच्चों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
ओमेगा-3 हमारे दिमाग की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। फिर सेहतमंद ब्रेन के लिए भी इसकी आश्यकता होती है। इसे हम फिश ऑइल और नट्स से प्राप्त कर सकते हैं। पूर्व में हुए शोध में ADHD से पीड़ित बच्चों को बिना यह चेक किए ओमेगा-3 की डोज दी गई कि उनके शरीर को इसकी जरूरत है भी या नहीं जबकि जिन बच्चों को इसकी जरूरत होती है, उनके नाखून रूखे-खुरदरे, त्वचा शुष्क और एग्जिमा जैसी समस्या उन्हें हो सकती है।
ट्रासलेशन सायकाइट्री जर्नल में प्रकाशित हुए ताजा शोध में बताया गया है कि जिन बच्चों को ओमेगा-3 की जरूरत होती है, उन्हें ADHD के ट्रीटमेंट के दौरान इसके सप्लिमेंट्स देने पर तेजी से सुधार होता है। जबकि जिन बच्चों की बॉडी में इसकी कोई कमी नहीं होती है उन्हें इसकी डोज देने पर उनमें ADHD के कई सिंप्टम्स में बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है। उनके लिए यह ड्रग्स की तरह काम करता है।
-एजेंसियां

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