Fake News रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने दिए स्पेशल यूनिट्स बनाने के आदेश

गृह मंत्रालय ने खुफिया ब्यूरो और राज्य पुलिस बलों को Fake News पर एक्शन लेने के लिए स्पेशल यूनिट्स बनाने के आदेश दिए

नई दिल्‍ली। Fake News से पूरा देश परेशान है. व्हाट्सएप और कुछ दूसरी सोशल मैसेजिंग टूल्स के जरिए देश भर में फर्जी न्यूज़ पनप रहे हैं। लिहाजा कई बार फेक न्यूज का शिकार निर्दोष लोग बनते हैं। ऐसे में फेक न्यूज़ से छुटकारा पाने के लिए गृह मंत्रालय ने खुफिया ब्यूरो और राज्य पुलिस बलों को इस पर एक्शन लेने के लिए स्पेशल यूनिट्स बनाने के आदेश दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहल पर गृह मंत्रालय ने ये कदम उठाए हैं। दरअसल हाल ही में नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर बढ़ते फेक नूज़ पर चिंता जताई थी।

वॉट्सऐप और फेसबुक जैसे सोशल मैसेजिंग टूल्स झूठी खबरें और नफरत भरे संदेश फैलाने वालों के पसंदीदा हथियार बन चुके हैं। सोशल मीडिया से फैली किसी फेक न्यूज या जहरीले संदेश के नतीजे के तौर पर बेकसूर लोगों की मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) जैसी जघन्य और शर्मनाक घटनाएं सामने आ रही हैं। लिहाजा फेक न्यूज के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार सतर्क हो गई है।

गृह मंत्रालय ने खुफिया विभाग (इंटेलिजेंस ब्यूरो) और राज्य पुलिस बलों से सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली झूठी खबरों, गलत सूचनाओं और नफरत फैलाने वाले संदेशों पर नजर रखने और उनपर नकेल कसने को कहा है।

गृह मंत्रालय ने इस काम के लिए स्पेशल यूनिट्स बनाने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, Fake News के खिलाफ यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।
दरअसल हाल ही में पीएम मोदी ने असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके घृणा, दुर्भावना और तनाव फैलाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताई थी।

मौजूदा हालात में, देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए वॉट्सऐप समेत सभी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं पर खबरों के रूप में फैलाए जाने वाले झूठे और जहरीले संदेशों पर निगरानी रखना और उनकी प्रामाणिकता परखना मुश्किल है।

गृह मंत्रालय ने इस काम के लिए स्पेशल यूनिट्स बनाने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, फेक न्यूज के खिलाफ यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।  दरअसल हाल ही में पीएम मोदी ने असामाजिक तत्वों द्वारा Fake News के ज़रिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके घृणा, दुर्भावना और तनाव फैलाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताई थी।

-एजेंसी

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