इस राजा के सैनिकों को उनकी लंबाई के हिसाब से मिलता था वेतन

इतिहास में कई ऐसे शासक हुए हैं जिनको उनकी सनक के वजह से जाना जाता है। उन्हीं शासक या राजाओं में से एक था प्रशा का राजा फ्रेडरिक विलियम प्रथम। लंबे सैनिकों को लेकर उसकी सनक बहुत ही अजीब किस्म की थी।
प्रशा (Prussia) एक राज्य हुआ करता था जिसका 1932 में जर्मनी में विलय हो गया। वहां का एक राजा हुआ है जिसका नाम किंग फ्रेडरिक विलियम (Frederick William I of Prussia) प्रथम था। वैसे वह काफी न्यायप्रिय और दयावान राजा था। उसने ऐश भरी जिंदगी सिर्फ इसलिए त्याग दी कि उस पैसे को स्कूलों और अस्पतालों पर खर्च किया जा सके लेकिन उसे सेना के विस्तार का काफी शौक था। प्रशा की सेना में 38,000 सैनिक होते थे, जिनकी संख्या को बढ़ाकर उसने 83,000 किया गया। सेना के प्रति लगाव की वजह से उसे Soldier King कहा जाता था। कुल मिलाकर जनता के लिए फ्रेडरिक बहुत ही अच्छा राजा था लेकिन उसको एक अजीब शौक था जिसे आप उसकी सनक भी कह सकते हैं। वह अजीब शौक यह था कि उसे लंबे सैनिकों से काफी प्यार थी। उसने लंबे सैनिकों की एक अलग ही रेजिमेंट बना डाली थी।
​पॉट्सडैम जायंट्स
फ्रेडरिक विलियम की रेजिमेंट का ऑफिशल नाम था The Grand Grenadiers of Potsdam लेकिन उनको पॉट्सडैम जायंट्स (Potsdam Giants) या The Long Guys (लॉन्ग गाइज) के नाम से जाना जाता था। उस रेजिमेंट में भर्ती के लिए सिर्फ एक ही शर्त थी। वह शर्ती यह थी कि रंगरूट की लंबाई छह फीट से ज्यादा हो। उसने पूरे यूरोप से हजारों लोगों को अपनी उस फौज में भर्ती किया था। उसकी फौज में सबसे लंबे सैनिक की लंबाई 7 फीट और 1 ईंच थी। आयरलैंड मूल के उस सैनिक का नाम जेम्स किर्कलैंड था। वैसे एक चीज यहां बता देना जरूरी है कि भले ही फ्रेडरिक को लंबे सैनिकों को भर्ती करने का शौक था लेकिन वह लड़ाई नहीं चाहता था। उसको लड़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी।
लड़ाई नहीं तो फिर क्या था मकसद
अब यह सवाल उठता है कि जब फ्रेडरिक लड़ाई नहीं चाहता था तो वह आखिर लंबे सैनिकों की भर्ती क्यों कर रहा था। इसके बारे में इतिहासकारों का मानना है कि सिर्फ दूसरों को डराने के लिए वह ऐसा करता था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि लंबे सैनिकों के बड़े हाथ राइफल के मजल को तेजी से लोड करने में सक्षम था। हालांकि यह सही नहीं लगता है क्योंकि ज्यादा लंबे सैनिक को निशाना बनने का ज्यादा खतरा रहता है।
लंबे सैनिकों की खूब मौज
लंबे सैनिकों की खूब आवभगत की जाती थी। उनका वेतन उनकी लंबाई पर निर्भर करता था। जितनी ज्यादा लंबाई, उतना ज्यादा वेतन। उनकी खूब खातिरदारी की जाती थी और सम्मान दिया जाता था। पॉट्सडैम जायंट्स के लिए नीले रंग की वर्दी होती थी और ग्रेनेडियर कैप। ग्रेनिडयर कैप की लंबाई 45 सेंटीमीटर होती थी जिसे पहनने के बाद सैनिक और लंबे दिखते थे। उनके आवास भी काफी भव्य होते थे और काफी स्वादिष्ट एवं बेहतरीन खाना दिया जाता था।
ऐसे होती थी भर्ती
कुछ जायंट्स तो खुद से फ्रेडरिक की उस रेजिमेंट में भर्ती होते थे लेकिन ज्यादातर को या तो अपहरण के बाद भर्ती किया जाता था या फिर उनको खरीदा जाता था। फ्रेडरिक विलियम लोगों को पैसा देकर उनके लंबे बेटे को खरीद लेता था। जमीनदारों से भी फ्रेडरिक के संबंध थे जो अपने सबसे लंबे मजदूर को फ्रेडरिक को सौंप दिया करते थे। जिस नवजात को लंबा होने की उम्मीद होती थी, उसे लाल रंग का चमकीला स्कार्फ पहनाया था। फ्रेडरिक के दूसरे देश के शासक से अच्छे संबंध थे जो फ्रेडरिक को खुश खरने के लिए अपने सबसे लंबे सैनिकों को फ्रेडरिक के पास भेज देते थे। फ्रेडरिक की सेना में सबसे लंबा सैनिक जेम्स किर्कलैंड था।
और शौक सनक में बदल गया
फ्रेडरिक अपने लंबे सैनिकों को सर्कस के जानवर की तरह इस्तेमाल करने लगे। अगर वह उदास होता तो 200-300 सैनिकों को जमा करता और उनको वाद्ययंत्र देकर नाचने-गाने को कहता। अगर वह बीमार पड़ता तो सैनिकों को उसके बेडरूम में मार्च करना पड़ता था।
इससे भी बड़ी सनक का एक और उदाहरण था। उसने एक खास रैक बना रखा था। उस रैक में पहले से लंबे सैनिकों को खींचा जाता था ताकि उसकी लंबाई और बढ़ सके। इस वजह से कई सैनिक की मौत हो गई।
एक और भयानक प्रयोग उसने किया। वह चाहता था कि यूरोप में लंबी रेजिमेंट हमेशा बनी रहे। इसके लिए उसने लंबे सैनिकों और अपने राज्य की लंबी महिलाओं को संबंध बनाने पर मजबूर किया ताकि उनसे जो नई नस्ल पैदा हो उसकी लंबाई ज्यादा हो।
भंग कर दी गई रेजिमेंट
1740 में फ्रेडरिक विलियम का निधन हो गया। उस समय तक लंबे सैनिकों की संख्या करीब 3000 तक पहुंच गई थी। फ्रेडरिक की मौत के बाद उसके बेटे फ्रेडरिक ग्रेट ने पॉट्सडैम जायंट्स रेजिमेंट को 1806 में भंग कर दिया और सभी सैनिकों को आम सैन्य यूनिट में भेज दिया।
-एजेंसियां

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