देश के अमीरों ने टैक्‍स चोरी का नया तरीका खोजा… विदेशी बीमा कंपनियों से खरीदे जंबो हेल्थ कवर, 25 को ईडी का नोटिस

नई दिल्‍ली। देश के अमीरों ने टैक्स अधिकारियों को चकमा देने का नया तरीका निकाला है। इसके तहत विदेशी बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये के जंबो हेल्थ कवर खरीदे गए। ऐसे लोगों पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नजर है।
सूत्रों के मुताबिक देशभर के करीब 25 अमीरों को ईडी ने नोटिस जारी किया है। उन पर फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। इन नियमों के मुताबिक रेग्युलेटर्स से पूर्व अनुमति के बिना विदेशी कंपनियों से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज नहीं खरीदी जा सकती है।
वेल्थ मैनेजमेंट की दुनिया के बाहर बहुत कम लोगों को इस तरह के इंश्योरेंस कवर की जानकारी है। घरेलू बीमा कंपनियों के मुकाबले इनका प्रीमियम बहुत कम होता है और अक्सर ये सिंगल प्रीमियम प्रोडक्ट होते हैं। जब जंबो पॉलिसी खरीदने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की एलआरएस के तरह फंड ट्रांसफर किया जाता है तो यह नियमों का उल्लंघन है। साथ ही अगर कोई खरीदार पॉलिसी खरीदने के लिए विदेशों में जमा अघोषित फंड्स का इस्तेमाल करता है और इस निवेश को घोषित नहीं करता है तो यह भी नियमों का उल्लंघन है।
पूर्व अनुमति लेनी जरूरी
कंसल्टैंसी फर्म चोकसी एंड चोकसी में सीनियर पार्टनर मितिल चोकसी ने कहा कि कई अमीर परिवारों ने एसेट डाइवर्सिफिकेशन के तहत एलआरएस के जरिए इन प्रोडक्ट्स में निवेश किया है। इन्हें हेज फंड्स या इंश्योरेंस एड-ऑन के साथ ग्लोबल इक्विटीज में निवेश के रूप में डिजाइन किया गया है। एलआरएस के तहत विदेशों में सिक्योरिटीज और प्रॉपर्टीज में 250,000 डॉलर तक निवेश किया जा सकता है लेकिन लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज में सीधे तौर पर निवेश की अनुमति नहीं है।
चोकसी ने कहा कि सवाल यह है कि क्या ये हाइब्रिड इनवेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स एलआरएस के दायरे से बाहर हैं। यह साफ नहीं है कि फेमा या पीएमएलए के तहत जारी नोटिस में इन लोगों को कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शंस का पालन नहीं करने का दोषी पाया जाता है या नहीं। लाइफ इंश्योरेंस के मामले में 2015 के Foreign Exchange Management (Insurance) Regulations में साफ कहा गया है कि विदेशी बीमा कंपनी से पॉलिसी लेने या उसे जारी रखने के लिए पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।
आरबीआई की शर्तें
आरबीआई ने शर्तों के साथ विदेशी कंपनियों से खरीदी गई कुछ बीमा पॉलिसीज को मंजूरी दी है। इनमें पहली शर्त यह है कि क्लेम की राशि का भुगतान होने के बाद सात दिन के भीतर इसे भारत लाना होगा। दूसरी शर्त यह है कि इस तरह की पॉलिसीज पर लोन नहीं लिया जा सकता है। तीसरी शर्त यह है कि प्रीमियम देने के लिए पॉलिसी होल्डर्स को अपने फंड्स का इस्तेमाल करने होगा और इसे एलआरएस के तहत रिमिट करना होगा। साथ ही पॉलिसी होल्डर्स को यह बात भी ध्यान में रखनी होगी कि विदेश में विवाद के मामले में कोई समाधान नहीं है।
-एजेंसियां

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