पिछली बार से कई गुना ज्यादा कहर बरपा रही है कोरोना की नई लहर

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस की नई लहर पिछली बार से कई गुना ज्यादा कहर बरपा रही है। हालात इतने भयावह हैं कि भारी संख्या में मरीजों को अस्पताल में ऑक्सिजन और आइसीयू बेड नहीं मिल पा रहे हैं। परेशानी यहीं खत्म नहीं हो रही है। सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ने वाले मरीजों का अंतिम संस्कार करना भी बड़ी चुनौती बन गई है। परिजन पहले इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल का चक्कर लगाते रहते हैं और जब मरीज की मौत हो जाती है तो उन्हें श्मशान घाट या कब्रिस्तान में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश में ऑक्सिजन और बेड की भारी किल्लत
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 100 से ज्यादा अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो रही है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि घंटों लाइन में लगकर कुछ सिलेंडर मिल रहे हैं। वहीं, इंदौर के अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन कमी से मरीज और उनके परिजन परेशान हाल हैं। ऑक्सिजन की कमी के कारण मौतें हो रही हैं और परिजन हंगामा कर रहे हैं। इस कारण अस्पतालों ने परिजनों से पहले ही हलफनामा ले रहे हैं कि ऑक्सिजन की कमी से मौत हुई तो जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की नहीं, उनकी खुद की होगी।
ऑक्सिजन की शॉर्ट सप्लाई से जूझ रहा महाराष्ट्र
कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र की हालत लगातार खराब हो रही है। राज्य के अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। मुंबई से सटे नालासोपारा इलाके में ऑक्सीजन की कमी के कारण एक दिन में सात मरीजों की जान चली गई। पढ़ें पूरी खबर…वहीं, नागपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई। जनवरी और फरवरी की शुरुआत में महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की खपत 150 टन थी, अब रोजाना 700 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है।
छत्तीसगढ़ की भी वही कहानी
कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पतालों ने ऑक्सीजन वाले बेड की कमी की शिकायत की थी। रायपुर के भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी के गुस्साए जूनियर डॉक्टरों ने स्ट्राइक की थी। अस्पातल में ऑक्सीजन की कमी है। वहां कोविड एडमिशन एरिया के बाहर लोग पड़े हुए हैं,उन्हें ऑक्सीजन बेड नहीं मिल रहा है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है, वह जमीन पर लेटे हुए हैं।
दिल्ली में ऑक्सिजन सिलिंडरों की कालाबाजारी
दिल्ली के अस्पतालों में भी ऑक्सिजन की कमी हो रही है। खबरों में कहा जा रहा है कि कुछ लोग ऑक्सीजन सिलेंडर स्टोर करने लगे हैं। साउथ दिल्ली के ग्रीन पार्क में ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लायर आयुष्मान के मुताबिक छह लीटर के एल्युमिनियम सिलेंडर की कीमत 6 हजार रुपये से शुरू है. सबसे ज्यादा मांग 10 लीटर के सिलेंडर की है, जिसकी कीमत 7,780 है. जिन कोरोना मरीजों की हालत नाजुक होती है, वे 40 लीटर वाला ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर जाते हैं, जिसकी कीमत 16 हजार रुपये है. ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने आए एक ग्राहक का कहना है कि सात हजार वाला सिलेंडर अब 9 हजार का हो गया है।
गुजरात में भी ऑक्सिजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं
गुजरात के कुछ शहरों से भी ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही हैं। अहमदाबाद के अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग चार गुना बढ़ गई है। सूरत में भी ऑक्सिनज की सप्लाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का कहना है कि राज्य में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
दिल्ली में वेंटिलेटर बेड्स की कमी
राजधानी दिल्‍ली में कोविड-19 के बढ़ते केसेज ने हेल्‍थ इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की कमर तोड़ दी है। चौथी लहर में हाल ये है कि अस्‍पतालों में वेंटिलेटर बेड्स की उपलब्‍धता कम होती जा रही है। ऐंटी-वायरल दवा रे‍मडेसिवीर की सप्‍लाई भी कम है। हालात देखते हुए 14 बड़े निजी अस्‍पतालों में कोविड के लिए खासतौर पर बेड्स रिजर्व किए गए हैं। 15 होटल्‍स को कोविड केयर सेंटर बना दिया गया है।
छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में बेड की कमी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अस्पतालों में एंबुलेंस की कमी हुई तो शवों को अंतिम संस्कार के लिए ट्रकों में रखकर श्मशान घाट ले जाया जा रहा है। हालत यह है कि एक ट्रक में 7 से 8 शवों को ले जाना पड़ रहा है। वहीं, शवों को परिजनों को सौंपने और अंतिम संस्कार के लिए भेजने की प्रक्रिया में देर हो रही है, जिसकी वजह से शवगृह भर गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने कोविड से होने वाली मौतों पर बेबसी जाहिर की. अस्‍पताल में स्थिति यह है कि आइसीयू और ऑक्‍सीजन वाले बेड पिछले सप्‍ताह से भर चुके हैं और कोई बेड यहां खाली नहीं है।
मुंबई में बेड की किल्लत, एम्बुलेंस में इंतजार कर रहे मरीज
मुंबई में कोरोना से हालात इस कदर बेकाबू हो गए हैं कि लोगों को अब अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल हो चुका है। दहिसर इलाके में एक व्यक्ति अपनी पत्नी को अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए लेकर आया लेकिन उसे यहां आईसीयू बेड नहीं मिल पा रहा था। मरीज के परिजनों ने बताया कि उन्हें फोन पर कहा गया था कि यहां बेड उपलब्ध है।
अहमदनगर से आईं विचलित कर देने वाली तस्वीरें
महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित अमरधाम श्मशान भूमि में 9 अप्रैल को 42 शवों का दाह संस्कार किया गया। पार्थिव शरीर को ले जाने वाली वैन में प्लास्टिक बैग में एक साथ 6 शव रख दिए गए थे। शवदाह गृह में काम करने वाले कर्मचारी भी इतनी बड़ी संख्या में कोरोना से मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार करने में हिचकिचा रहे हैं। वाहनों की भी कमी के कारण परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के कई जिलों में कोरोना से मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वहां शवों को जलाने या दफनाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
यूपी के श्मशान घाटों पर लंबा इंतजार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बैकुंठ धाम और अन्य श्मशान घाटों पर शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों को 10 से 12 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। बैंकुंठ धाम में कोविड प्रोटोकॉल से रोज 30 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। वहीं गुल्लाला श्मशान घाट पर 20 से ज्यादा शव अंतिम संस्कार के लिए रोजाना आ रहे हैं।
वहीं, गाजियाबाद जिले में कोविड-19 संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसे देखते हुए गाजियाबाद के हिंडन नदी स्थित श्मशान घाट में भी पूरी सावधानी रखते हुए यहां टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया है। यहां कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए अलग व्यवस्था की गई है।
एमपी में श्मशानों और कब्रिस्तानों का बुरा हाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के श्मशानों और कब्रिस्तानों में अंतिम संस्कार करने के लिए जगह की कमी सहित कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, भदभदा विश्राम घाट अंतिम संस्कार के लिए कम पड़ रहे हैं। वहां मंगलवार को 58 शवों का दाह संस्कार किया गया। जिनमें से 57 शवों का कोविड-19 के प्रोटोकॉल के मुताबिक किया गया, जबकि बुधवार शाम तक 50 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया गया है।
-एजेंसियां

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