वैक्सीन की दो डोज़ के बीच ज़्यादा फर्क रखने पर बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा

वॉशिंगटन। अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ और राष्ट्रपति के शीर्ष सलाहकार डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने कहा है कि अगर कोविड वैक्सीन की दो डोज़ के बीच फ़र्क ज़्यादा रखा गया तो इससे कोरोना के किसी वैरिएंट से संक्रमण का ख़तरा बढ़ सकता है.
एक भारतीय टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर फ़ाउची ने कहा, “आदर्श तौर पर फ़ाइज़र की एमआरएनए कोरोना वैक्सीन की दो डोज़ के बीच तीन सप्ताह और मॉडर्ना की एमआरएनए वैक्सीन की दो डोज़ के बीच में फ़र्क चार सप्ताह का होना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “अगर आप वैक्सीन की डोज़ के बीच के अंतराल को बढ़ाते हैं तो इससे आपके किसी कोरोना वायरस वैरिएंट से संक्रमित होने का ख़तरा बढ़ जाता है. हमने यूके में यही देखा है, वहां वैक्सीन की डोज़ के बीच के अंतराल को बढ़ाया गया था, वहां नए वैरिएंट का ख़तरा बढ़ा गया. हमारी यही राय है कि आप तय वक्त पर ही वैक्सीन लगवाएं.”
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि “अगर वैक्सीन की सप्लाई कम है तो” वैक्सीन की डोज़ के बीच के अंतराल को बढ़ाना ज़रूरी हो सकता है.
बीते महीने भारत सरकार ने भारत में कोविशील्ड के नाम से दी जा रही एस्ट्राज़ेनेका-ऑक्सफ़र्ड की वैक्सीन की दो डोज़ के बीच के अंतराल को बढ़ा कर 12 से 16 सप्ताह कर दिया था.
इससे पहले कोविशील्ड की दो डोज़ के बीच छह से आठ हफ़्ते का अंतर रहता था. उससे पहले ये अंतराल चार से छह हफ़्ते था.
सरकार के इस फ़ैसले की तीखी आलोचना हुई थी. कइयों ने कहा कि वैक्सीन की भारी कमी के कारण सरकार ने दो डोज़ के बीच के अंतराल को बढ़ा दिया है. हालांकि इस पर नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर विनोद पॉल ने कहा कि ये फ़ैसला विज्ञान पर आधारित है.
उससे पहले मार्च में मेडिकल जर्नल द लैंसट में छपे एक रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि की गई थी कि दो डोज़ के बीच 12 हफ़्तों का अंतराल हो तो वैक्सीन का असर बढ़ता है.
डॉक्टर फ़ाउची ने कहा कि कोरोना वायरस ने नए वेरिएंट को हराने के लिए ज़रूरी है कि लोगों को जल्द से जल्द टीका लगाया जाए.
उन्होंने भारत में सबसे पहले पाए गए वायरस के डेल्टा वेरिएंट को लेकर चिंता जताई और कहा कि “जिन लोगों को टीका नहीं लगा है अगर उनमें डेल्टा वेरिएंट फैलना शुरू होता है तो ये बड़ी तेज़ी से अपने पैर पसार लेता है.”
-एजेंसियां

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